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छह साल में महज 2132 इंजन बढ़ा पाई सरकार, पर पांच साल में 3000 नई ट्रेनें चलाने की सोच रहे रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव

रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने 16 नवंबर को रेल भवन में संवाददाताओं से कहा क‍ि चार-पांच साल में हमें 1000 करोड़ यात्र‍ियों को सफर कराने की क्षमता व‍िकस‍ित करनी होगी, क्‍योंक‍ि जनसंख्‍या बढ़ रही है। इसके ल‍िए हमें 3000 अत‍िर‍िक्‍त ट्रेनों की जरूरत पड़ेगी।
Written by: विजय कुमार झा
Updated: November 21, 2023 15:51 IST
छह साल में महज 2132 इंजन बढ़ा पाई सरकार  पर पांच साल में 3000 नई ट्रेनें चलाने की सोच रहे रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव
ट्रेनों में भीड़ आम बात है और कई बार यह जानलेवा भी हो चुकी है। (Express File Photo by Amit Mehra)
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बीते हफ्ते रेल यात्र‍ियों की सुव‍िधा से जुड़ी एक बड़ी खबर मीड‍िया में छा गई। क‍िसी ने एजेंसी के हवाले से तो कई ने रेल मंत्रालय के अपने 'करीबी सूत्रों' के हवाले से खबर चलाई। खबर में बताया गया क‍ि रेलवे ऐसा प्‍लान बना रहा है क‍ि चार-पांच साल में वेट‍िंंग ट‍िकट की समस्‍या खत्‍म हो जाएगी। यह खबर रेल मंत्री के एक बयान का मतलब न‍िकालते हुए प्रसार‍ित की गई। रेल मंत्री अश्‍वि‍नी वैष्‍णव का कहना था क‍ि चार-पांच साल में रेलवे की क्षमता 1000 करोड़ यात्र‍ियों को सफर कराने लायक बनानी होगी और इसके ल‍िए 3000 अत‍िर‍िक्‍त ट्रेनों की जरूरत होगी।

आंकड़ों पर नजर डालें तो 2015-16 से 2021-22 के बीच रेलवे में कुल 2132 नए लोकोमोट‍िव्‍स (इंजन) ही बन पाए हैं। कुल रेल कोचों की संख्‍या भी एक साल में 5000 ही बढ़ पाई है। अगर इंजन और कोच बनने की यही रफ्तार रही तो चार-पांच साल में 3000 नई ट्रेनें क‍िसी सूरत में नहीं चल सकतीं। प्‍लान क‍ितना व्‍यावहार‍िक है, यह आगे द‍िए गए और आंकड़ों से समझा जा सकता है।

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पांच साल में 3000 नई गाड़‍ियां संभव हैं क्‍या

रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव कहते हैं क‍ि उनका प्‍लान चार-पांच साल में 3000 नई गाड़‍ियां चलाने का है। पर बीते 35 सालों में लोकोमोट‍िव्‍स की संख्‍या क‍िस रफ्तार से बढ़ी है, उस पर नजर डालें तो सहज अंदाज लगाया जा सकता है क‍ि चार-पांच साल में 3000 नई गाड़‍ियां चलाना व्‍यावहार‍िक रूप से संभव हो सकता है या नहीं?   

वर्षस्टीम इंजनडीजल इंजनइलेक्ट्रिक इंजनकुल
1950-51812017728209
1960-611031218113110624
1970-719387116960211158
1980-8174692403103610908
1990-912915375917438417
2000-0154470228107566
2010-1143513740339213
2015-16395869521411122
2016-17396023539911461
2019-20395898679212729
2020-21395108758712734
2021-22394747842913215
लोकोमोट‍िव्‍स की संख्‍या (सोर्स- इंडियन रेलवे ईयर बुक)

पटरी भी तो होनी चाह‍िए

नई गाड़‍ियों के ल‍िए पटरी भी होनी चाह‍िए। भारत में 1980-81 में कुल 75,860 क‍िलोमीटर लंबा रन‍िंंग रेल ट्रैक (यार्ड, क्रॉस‍िंंगआद‍ि छोड़ कर) था। 2016-17 में यह 93,902 क‍िलोमीटर हुआ और 2021-22 में 1,02,831 किलोमीटर पर पहुंचा। इस हिसाब से पांच साल (2016-17 से 2021-22) में केवल 8,929 किलोमीटर का विस्तार हुआ (नीचे टेबल देखें)। अगर आगे भी पटरी ब‍िछाने की औसत रफ्तार यही मान ली जाए तो भी 3000 नई गाड़‍ियों के ल‍िहाज से यह काफी नहीं होगा।

data
सोर्स- इंडियन रेलवे

योजनाओं के अमल में देरी आम बात

बुन‍ियादी ढांचा व‍िकस‍ित करने की योजनाओं पर अमल में देरी का भी उदाहरण है। मौजूदा सरकार के कुछ पुराने वादों का उदाहरण देखते हैं।

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बुलेट ट्रेन हुई सालों देर

2017 में 14 स‍ितंबर को भारत और जापान के प्रधानमंत्र‍ियों ने मुंबई और अहमदाबाद के बीच बुलेट ट्रेन चलाने की पर‍ियोजना का श‍िलान्‍यास क‍िया था। पीआईबी के मुताब‍िक, इसे द‍िसंबर 2023 तक पूरा करना है। लेक‍िन, जून 2023 तक जमीन अध‍िग्रहण का पूरा काम भी नहीं हो पाया था। अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने बताया था क‍ि 430.45 हेक्‍टेयर में से जून 2023 तक 429.53 हेक्‍टेयर जमीन अध‍िग्रहीत हुई है।

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वंदे भारत का भी टारगेट पूरा नहीं 

15 अगस्‍त, 2021 को लाल क‍िले से भाषण देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की थी आने वाले 75 सप्‍ताह (यान‍ि करीब डेढ़ साल) के भीतर 75 वंदे भारत ट्रेनें देश के हर कोने को आपस में जोड़ेंगी। लेक‍िन 24 सितंबर, 2023 तक 34 वंदे भारत ट्रेनें ही चलाई जा सकी हैं।

यात्र‍ियों की संख्या बढ़ने की रफ्तार पर भी डालते हैं नजर

रेल मंत्री का कहना है कि अगले चार-पांच साल में जनसंख्‍या में बढ़ोतरी के मद्देनजर रेलवे को सालाना 800 करोड़ के बजाय 1000 करोड़ यात्र‍ियों को सफर कराने की क्षमता बनानी होगी। लेक‍िन, आंकड़ों पर नजर डालें तो मुसाफ‍िरों की संख्‍या की बढ़ोतरी की रफ्तार प‍िछले पांच सालों से लगभग स्‍थ‍िर है। यह संख्‍या 2015-2016 में 810 करोड़ थी और 2019-20 में इससे थोड़ा कम (808 करोड़) ही रही। 2020-21 और 2021-22 के दो सालों में यह संख्‍या कुल 500 करोड़ से भी कम रही। हालांक‍ि, इस कम संख्‍या के पीछे एक बड़ी वजह कोव‍िड महामारी थी।

वर्षशहरी
इलाके से
शहर के बाहरी इलाके
(Suburban) से
कुल
(म‍िल‍ियन)
1980-81200016133613
1990-91225915993858
2000-01286119724833
2010-11406135907651
2015-16445936488107
2016-17456635508116
2019-20459734898086
2020-219173331250
2021-22216913503519
रेलवे ईयर बुक के मुताब‍िक यात्रियों की संख्‍या में बढ़ोतरी कुछ इस तरह हुई (संख्या मिलियन में, एक मिलियन = दस लाख)

ऐसे चली थी वेट‍िंंग ल‍िस्‍ट खत्‍म होने की 'खबर'

दरसअल रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने संवाददाताओं के सामने अपनी दो प्राथम‍िकताएं ग‍िनाई थीं। इनमें से एक था चार-पांच साल में यात्र‍ियों की बढ़ती संख्‍या के मद्देनजर 3000 नई ट्रेनें चलाने पर व‍िचार। और, दूसरा था रेलगाड़‍ियों की यात्रा पूरी करने में लगने वाला समय कम करना।

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताब‍िक- रेल मंत्री अश्‍व‍िनी वैष्‍णव ने 16 नवंबर को रेल भवन में संवाददाताओं से कहा क‍ि अभी रेलवे सालाना 800 करोड़ यात्र‍ियों को सफर करा रहा है। चार-पांच साल में हमें 1000 करोड़ यात्र‍ियों को सफर कराने की क्षमता व‍िकस‍ित करनी होगी, क्‍योंक‍ि जनसंख्‍या बढ़ रही है। इसके ल‍िए हमें 3000 अत‍िर‍िक्‍त ट्रेनों की जरूरत पड़ेगी।

वैष्‍णव ने यह भी कहा क‍ि एक टारगेट यात्रा का समय कम करना है। उन्‍होंने बताया क‍ि ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और कम करने (accelerate and decelerate) में लगने वाला समय कम करके ऐसा क‍िया जा सकता है। इसके ल‍िए उन्‍होंने एक तकनीक ('पुश-पुल कॉन्‍फ‍िगरेशन मोड') को मददगार बताया और कहा क‍ि रेलवे की कोश‍िश है क‍ि अब जो कोच बनें, वे इस तकनीक से लैस हों।

…लेक‍िन मीड‍िया में क‍िस रूप में आई खबर

मीड‍िया में लगभग सभी जगह इस खबर को इसी रूप में पेश क‍िया गया क‍ि 2027-28 तक वेट‍िंंग ल‍िस्‍ट की समस्‍या खत्‍म हो जाएगी। हालांक‍ि, सरकार की ओर से ऐसा कहीं नहीं कहा गया है। प्रेस इन्‍फॉर्मेशन ब्‍यूरो (पीआईबी)/ रेल मंत्रालय/रेल मंत्री के सोशल मीड‍िया (एक्‍स) अकाउंट, कहीं भी ऐसा कोई ज‍िक्र नहीं है।

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