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रास्ते में मरने पर लाश भी नहीं आती वापस, रेप और डकैती भी आम, जानिए Shahrukh की Dunki वाले 'डंकी रूट्स' की असल कहानी

Dunki Movie Inspiration: कोलंबिया से प्रवासी पनामा में प्रवेश करते हैं। दोनों देशों के बीच एक खतरनाक जंगल (डेरियन गैप) पड़ता है, जिसे प्रवासियों को पार करना होता है।
Written by: कमलदीप बरार | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: December 22, 2023 15:13 IST
रास्ते में मरने पर लाश भी नहीं आती वापस  रेप और डकैती भी आम  जानिए shahrukh की dunki वाले  डंकी रूट्स  की असल कहानी
बाएं से- फिल्म डंकी का पोस्टर (PC- Red Chillies) | डंकी रूट से यात्रा करते प्रवासियों की असल तस्वीर (AP Photos/Ivan Valencia, File)
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Donkey Route Real Story: सोशल मीडिया पनामा के जंगलों के वीडियो से भरा पड़ा है। भारत और पाकिस्तान के पंजाबियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए इन वीडियो में एक सीधा सा संदेश छिपा होता है- कभी भी यह रास्ता न अपनाएं, इसके बजाय अपने देश में काम खोजें।

हालांकि ऐसी अपीलों का बहुत प्रभाव नहीं पड़ा है। ना ही रास्ते में प्रवासियों को प्रताड़ित किए जाने या मरने की भयानक वीडियो से लोग जागरूक हुए हैं। लोग अब भी अमेरिका जाने के अपने सपने के लिए सब कुछ जोखिम में डालते हैं। पहले पंजाब और हरियाणा में लोकप्रिय "डंकी रूट" को अब गुजराती खरीदार भी मिलने लगे हैं।

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21 दिसंबर को रिलीज हुई शाहरुख खान की फिल्म 'डंकी' (Shah Rukh Khan's Dunki) ऐसे ही प्रवासियों पर आधारित है। हाल ही में दुबई में एक कार्यक्रम में अभिनेता ने फिल्म के नाम का मतलब समझाया। उन्होंने कहा, "अपने देश से बाहर निकलने के लिए बहुत से लोग अवैध रूप से यात्रा करते हैं। जिस रास्ते से लोग इस अवैध यात्रा को करते हैं, उसे 'डंकी रूट' कहा जाता है।"

पहला पड़ाव: लैटिन अमेरिका

भारत से सबसे लोकप्रिय डंकी रूट का पहला पड़ाव लैटिन अमेरिकी देश तक पहुंचना है। इक्वाडोर, बोलीविया और गुयाना जैसे देशों में भारतीय नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल है। ब्राजील और वेनेजुएला समेत कुछ अन्य देश भारतीयों को आसानी से पर्यटक वीजा दे देते हैं। एक प्रवासी का रूट इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसके एजेंट के किन देशों में 'लिंक' हैं। यहां लिंक से मतलब मानव तस्करी के नेटवर्क से है। इस प्रकार लैटिन अमेरिकी देशों तक पहुंचना कठिन नहीं है। हालांकि, इसमें महीनों लग सकते हैं।

पंजाब का एक व्यक्ति जो पिछले साल आठ महीने में अमेरिका पहुंचा था, उसका कहना है, "मेरे एजेंट ने हमें डेढ़ महीने तक मुंबई में रखा। उन्होंने कहा कि वह ब्राजील में अपने संपर्कों से कुछ सिग्नल का इंतजार कर रहे हैं। अगर हम ब्राजील में ठहरते तो अधिक खर्च करना होता।

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कुछ एजेंट दुबई से मेक्सिको के लिए सीधे वीज़ा की व्यवस्था करते हैं। हालांकि, इसमें लोकल अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किए जाने का खतरा अधिक होता है, इसलिए सीधे मेक्सिको में उतरना सुरक्षित नहीं माना जाता है।

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यही वजह है कि अधिकांश एजेंट अपने ग्राहकों को लैटिन अमेरिकी देश में ले जाते हैं। फिर वहां से कोलंबिया ले जाते हैं। जो देश अमेरिकी से जितना करीब होता है, उसके लिए भारत से वीजा प्राप्त करना उतना ही मुश्किल होता है।

रास्ते में पड़ता है एक खतरनाक जंगल

कोलंबिया से प्रवासी पनामा में प्रवेश करते हैं। दोनों देशों के बीच एक खतरनाक जंगल (डेरियन गैप) पड़ता है, जिसे प्रवासियों को पार करना होता है। उस जंगल में कई तरह के जोखिमों सामना करना पड़ता है, जैसे- साफ पानी की कमी, जंगली जानवर और कई क्रिमिनल गैंग, आदि।

जंगल में प्रवासियों को डकैती और यहां तक कि बलात्कार का भी सामना करना पड़ सकता है। यहां होने वाले अपराध दर्ज नहीं किए जाते हैं, इसलिए कभी किसी सजा भी नहीं मिलती। यदि सब कुछ ठीक रहा तो यात्रा में आठ से दस दिन लग जाते हैं। इस बीच यदि किसी प्रवासी की मृत्यु हो जाती है, तो उसके शव को अंतिम संस्कार के लिए घर भेजने का कोई तरीका नहीं है।

ग्वाटेमाला इस रूट पर एक बड़ा कोऑर्डिनेशन सेंटर। मेक्सिको में प्रवेश करने और अमेरिकी सीमा की ओर यात्रा जारी रखने के लिए ग्वाटेमाला में प्रवासियों को नए एजेंट्स (तस्कर भी कह सकते हैं) को सौंप दिया जाता है।

यहां शुरू होता है सरकारी एजेंसियों के साथ लुकाछिपी का खेल। गुरदासपुर के 26 वर्षीय गुरपाल सिंह की इस साल एक ऐसी ही अवैध यात्रा के दौरान मैक्सिको में बस दुर्घटना में मौत हो गई। पंजाब में अपनी बहन को आखिरी कॉल में उन्होंने बताया कि उन्हें मैक्सिकन पुलिस ने रोक लिया है और वे भागने के लिए जल्दबाजी में बस ले रहे हैं। जब बस दुर्घटनाग्रस्त हुई तब भी बहन कॉल पर थी। परिवार को उनकी मौत की सूचना मिलने में एक सप्ताह लग गया। गुरदासपुर के सांसद सनी देयोल ने गुरपाल का शव वापस लाने में मदद की थी।

जंगल से बचना संभव है लेकिन जोखिम से नहीं

पनामा के जंगल से बचने के लिए कोलंबिया से एक और मार्ग है जो सैन एन्ड्रेस से शुरू होता है। लेकिन यह ज्यादा सुरक्षित नहीं है। सैन एन्ड्रेस से प्रवासी मध्य अमेरिका के देश निकारागुआ के लिए नाव लेते हैं। अवैध प्रवासियों के साथ मछली पकड़ने वाली नावें सैन एन्ड्रेस से लगभग 150 किलोमीटर दूर Fisherman’s Cay तक जाती हैं। वहां से प्रवासियों को मैक्सिको की ओर आगे बढ़ने के लिए दूसरी नाव पर शिफ्ट किया जाता है।

अमेरिकी सीमा पर

संयुक्त राज्य अमेरिका और मेक्सिको को अलग करने वाली 3,140 किलोमीटर लंबी सीमा पर बाड़ लगी हुई है, जिसे प्रवासियों को कूदकर पार करना पड़ता है। कई लोग खतरनाक रियो ग्रांडे नदी को पार करना चुनते हैं। हालांकि, अक्सर सीमा पार करते समय अमेरिकी अधिकारी प्रवासियों को हिरासत में ले लेते हैं। फिर उन्हें शिविरों में रखा जाता है। अब, उनका भाग्य इस बात पर निर्भर करता है कि अमेरिकी अधिकारी उन्हें शरण के लिए उपयुक्त पाते हैं या नहीं।

एक नया और सुरक्षित मार्ग

आजकल, अमेरिका के लिए एक और आसान डंकी मार्ग खोज लिया गया है। कई प्रवासी पहले यूरोप जाते हैं और वहां से सीधे मैक्सिको जाते हैं। डंकी मार्ग से अमेरिका पहुंचने वाला एक प्रवासी ने बताता है, "यह सब एजेंट्स की पहुंच पर निर्भर करता है। यूरोप से होकर जाना आसान है। हालांकि, जिस दिन यूरोप-मेक्सिको मार्ग नज़र में आएगा, लोग पारंपरिक मार्ग पर वापस लौट जाएंगे।"

एक खतरनाक और महंगी यात्रा

एक औसत डंकी रूट का खर्च 15 लाख रुपये से 40 लाख रुपये के बीच हो सकता है। लेकिन कई बार इसकी कीमत 70 लाख रुपये तक भी हो जाती है। कुछ एजेंट अधिक पैसे के बदले में कम परेशानी वाली यात्रा का वादा करते हैं। भारत में एजेंट्स के संबंध अमेरिका तक के तस्करों से हैं। यदि किसी कारण से, भारतीय एजेंट भुगतान करने में विफल रहते हैं, तो इसका मतलब प्रवासी की जान भी जा सकती है।

परिवार अक्सर किश्तों में भुगतान करते हैं। अमेरिका में शरण पाने के लिए अपनी फाइल क्लियर होने का इंतजार कर रहा एक ट्रक ड्राइवर बताता है, "मैंने तीन किस्तों में भुगतान किया था। पहली किस्त यात्रा शुरू करने से पहले दी। फिर कोलंबिया पहुंचने के बाद। आखिरी किस्त अमेरिकी सीमा के पास पहुंचने पर दिया। अगर मेरे माता-पिता भुगतान करने में विफल रहे होते, तो मेक्सिको में तस्करों ने मुझे गोली मार दी होती।"

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