scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

8 राज्यों में विधानसभा चुनाव, लोकसभा चुनाव और UCC; जानिए राम मंदिर उद्घाटन के अलावा 2024 में क्या-क्या होने वाला है?

यह वर्ष महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाओं और चुनावों से भरा हुआ है। आइए जानते हैं इस साल कौन-कौन से राजनीतिक इवेंट देखने को मिल सकते हैं।
Written by: एक्सप्लेन डेस्क | Edited By: Ankit Raj
नई दिल्ली | Updated: January 01, 2024 12:26 IST
8 राज्यों में विधानसभा चुनाव  लोकसभा चुनाव और ucc  जानिए राम मंदिर उद्घाटन के अलावा 2024 में क्या क्या होने वाला है
बाएं से- प्रधानमंत्री व भाजपा नेता नरेंद्र मोदी और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Express Photo)
Advertisement
विधात्री राव

अयोध्या के राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा समारोह, लोकसभा का मुकाबला, सात राज्यों में विधानसभा चुनाव, 370 निरस्त होने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहला चुनाव। 2024 की तैयारियों पर एक सरसरी नज़र डालने से यह स्पष्ट हो जाता है कि यह वर्ष भारतीय राजनीति के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहने वाला है।

Advertisement

कुछ बड़े प्रश्न भी उभर कर सामने आता है। जैसे- क्या भाजपा के जीत का रथ तीसरे कार्यकाल में भी जारी रहेगा या विपक्ष अपने विभिन्न मतभेदों के बावजूद एक साथ आएगी और एक ऐसा विकल्प सामने रखेगी जो भाजपा की विशाल चुनाव मशीनरी की ताकत को मात दे सके? आइए जानते हैं भारतीय राजनीति की दृष्टि से इस वर्ष कौन-कौन से महत्वपूर्ण इवेंट देखने को मिलेंगे:

Advertisement

राम मंदिर का उद्घाटन

कई लोगों का तर्क है कि 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद का विध्वंस वह क्षण था जिसने भारतीय राजनीति की दिशा बदल दी। अब, भाजपा अपने तीसरे कार्यकाल की तैयारी कर रही है। नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री पद का चेहरा हैं। पिछले चुनाव में भाजपा 303 सीट जीतने में कामयाब रही थी।

भाजपा 22 जनवरी को राम मंदिर में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम की तैयारी में लगी है। 30 दिसंबर को पीएम मोदी ने पुनर्विकसित अयोध्या रेलवे स्टेशन, एक नए हवाई अड्डे का उद्घाटन किया और एक रैली को संबोधित किया। संबोधन से पता चला कि 22 जनवरी को मंदिर खुलने पर क्या-क्या होने की संभावना है।

पीएम मोदी के संबोधन में छिपे संदेश का विश्लेषण करते हुए, इंडियन एक्सप्रेस के विकास पाठक ने लिखा कि "संदेश हिंदुत्व प्लस प्रतीत होता है”। उन्होंने लिखा, "जैसा कि अयोध्या में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण किया गया है, राम मंदिर शहर में परंपरा और आधुनिक विकास (विकास) का संगम दिखाई जैसा दिखाई देगा, यह सत्तारूढ़ भाजपा के दृष्टिकोण से देश की 'राष्ट्रीय महानता' के लिए जरूरी है।"

Advertisement

लोकसभा चुनाव

पिछले पांच वर्षों में भाजपा ने जो फैसले लिए, जो कल्याणकारी योजनाएं लेकर आई और कार्यक्रम किए, उन सब पर जनता इस वर्ष में फैसला सुनाएगी। साथ ही विपक्षी इंडिया गठबंधन द्वारा पेश विकल्प पर भी विचार करेगी। ये सब अप्रैल-मई में हो सकता है। हालांकि "जल्दी चुनाव" के बारे में भी थोड़ी चर्चा है।

Advertisement

पाठक ने अपने ईयरएंडर लेख में लिखा है कि इस वर्ष भाजपा से क्या उम्मीद की जाए, पार्टी अपनी संगठनात्मक शक्ति के दम पर और कमजोर विपक्ष का सामना करते हुए, तीसरे कार्यकाल के लिए तैयार दिख रही है।

भाजपा के एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक, अगर भाजपा जितती है तो कुछ पुराने चेहरों की छुट्टी की जा सकती है और नए लोगों को मंत्रालय दिया जा सकता है। अभी, विपक्षी इंडिया गठबंधन एक ऐसे मुद्दे के तलाश में है जिससे भाजपा का मुकाबला किया जा सके। साथ ही उसे सीट बंटवारे और आंतरिक विरोधाभाषों से भी जूझना है।

कांग्रेस पर मनोज सीजी लिखते हैं: "इससे पहले कभी भी भारतीय राजनीति की सबसे पुरानी पार्टी (कांग्रेस) इतने लंबे समय तक राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष में नहीं रही थी। इसने अपने लंबे इतिहास में हिंदी क्षेत्र में इतनी चुनावी गिरावट कभी नहीं देखी थी।"

पार्टी शायद उम्मीद कर रही होगी कि उसकी पूर्व से पश्चिम भारत न्याय यात्रा से मदद मिलेगी। क्या यह पार्टी कैडर को सक्रिय करेगा, लोगों के बीच एक नैरेटिव सेट करेगा और सबसे जरूरी बात क्या उससे राजनीतिक लाभ मिल पाएगा? कांग्रेस नेता राहुल गांधी 14 जनवरी को यात्रा पर रवाना होने वाले हैं।

लोकसभा चुनाव के साथ विधानसभा चुनाव भी

देश के प्रत्येक राज्य अपनी अनूठी राजनीतिक स्थिति है। जिन चार राज्यों में लोकसभा चुनाव के साथ चुनाव होने हैं, वे अपनी-अपनी लड़ाई के लिए कमर कस रहे हैं।

आंध्र प्रदेश: यह राज्य वाईएस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस का गढ़ है। 2019 में पार्टी ने 175 सदस्यीय विधानसभा में 151 सीटें और 25 लोकसभा सीटों में से 22 सीटें जीतीं थी। जबकि एन चंद्रबाबू नायडू की तेलुगु देशम पार्टी (TDP) 23 सीटों और तीन लोकसभा सीटों पर सिमट गई थी।

इस बार, टीडीपी वाईएसआर कांग्रेस से मुकाबला करने के लिए एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा रही है। पार्टी का मानना है कि बीते सितंबर में कथित कौशल विकास घोटाले में नायडू की गिरफ्तारी से उनके लिए सहानुभूति पैदा हुई है। नायडू के बेटे एन लोकेश ने भी दिसंबर की शुरुआत में अपनी यात्रा "युवा गलाम (युवाओं की आवाज)" पूरा किया है। ऐसा कर के उन्होंने अपने आउटरीच प्रयासों को आगे बढ़ाया है।

ओडिशा: जैसे-जैसे सत्तारूढ़ बीजू जनता दल चुनाव में उतर रही है, पार्टी उड़िया गौरव या अस्मिता पर जोर दे रही है। लेकिन पार्टी के लिए यह आसान होने की संभावना नहीं है क्योंकि भाजपा ने यहां चुनावों के लिए "दो महीने की लंबी कार्ययोजना तैयार की है" और बीजद के साथ किसी भी गठबंधन से इनकार किया है। दोनों दलों के बीच राष्ट्रीय स्तर पर सौहार्दपूर्ण संबंध हैं और बीजद सभी प्रमुख मुद्दों पर केंद्र को समर्थन देता रहा है।

सिक्किम: 2019 में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम), जो उस समय विपक्ष में था, उसने 32 विधानसभा सीटों में से 17 पर जीत हासिल की थी। मौजूदा सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट ने 15 सीटें जीतीं। प्रेम सिंह तमांग सीएम बने। एसकेएम भाजपा के उत्तर पूर्व विकास गठबंधन (एनईडीए) का हिस्सा है। इस बार भी मुकाबला कांटे का होने की उम्मीद है।

अरुणाचल प्रदेश: पिछले चुनाव में भाजपा को 57 सीटों में से 41 सीटें मिलीं थी। जनता दल (यूनाइटेड) ने सात सीटें पाकर आश्चर्यचकित कर दिया था। दिसंबर 2020 में जदयू के छह विधायक भाजपा में शामिल हो गए। और अगस्त 2022 में बिहार में भाजपा और जदयू के बीच गठबंधन टूटने के बाद जदयू के एकमात्र विधायक टेसम पोंगटे भाजपा में शामिल हो गए। देखना होगा कि क्या बीजेपी का पूर्वोत्तर विस्तार जारी रहता है।

अन्य विधानसभा चुनाव

इस वर्ष के अंत में तीन अन्य महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव तय हैं।

महाराष्ट्र: 2019 के नतीजों के बाद से राज्य में अप्रत्याशित परिवर्तन देखने को मिले हैं। तब भाजपा और शिवसेना (संयुक्त) सहयोगी थीं। वे अलग गए हैं। महाविकास अघाड़ी बनी। सेना में बगावत के साथ अलग महाविकास अघाड़ी की सरकार गिर गई। अब, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना भाजपा के साथ सत्ता में है। उनके साथ एक नए सहयोगी भी है: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का अजीत पवार गुट।

राज्य का विधानसभा कार्यकाल नवंबर 2024 में समाप्त हो रहा है। महाराष्ट्र में एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार जैसे दिग्गज और वर्तमान डिप्टी सीएम देवेंद्र फड़नवीस जैसे प्रभावशाली नेता सक्रिय हैं। इन उतार-चढ़ाव और समीकरणों के बीच, राज्य में चुनाव रोमांचक होने की उम्मीद है। चुनाव के बाद का परिदृश्य भी उतना ही दिलचस्प हो सकता है।

झारखंड: 15 नवंबर, 2000 को बिहार से अलग होने के बाद से झारखंड ने छह मुख्यमंत्रियों और तीन बार राष्ट्रपति शासन देखा है। केवल एक सीएम, रघुबर दास, अपना पूरा कार्यकाल (2014 से 2019) पूरा करने में कामयाब रहे हैं। झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख और राज्य के सीएम हेमंत सोरेन भी अपना कार्यकाल पूरा करना चाह रहे हैं। हालांकि, वह वर्तमान में ईडी की कार्रवाई का सामना कर रहे हैं। बीजेपी भी राज्य में पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय है। बाबूलाल मरांडी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से बीजेपी ने आक्रामक तरीके से जेएमएम को निशाने पर ले लिया है। विधानसभा का कार्यकाल जनवरी 2025 में समाप्त हो रहा है।

हरियाणा: पिछली बार बीजेपी को हरियाणा की 90 विधानसभा सीटों में से 40 सीटें मिली थीं और वह बहुमत से पीछे रह गई थी। दुष्यन्त चौटाला के नेतृत्व वाली जननायक जनता पार्टी के सहयोग से भाजपा सत्ता में आयी। जेजेपी को 20 सीटें मिली थीं। मनोहर लाल खटटर सीएम बने थे। इन पांच वर्षों में गठबंधन ने कई मुद्दों को निपटाया। कई बार गठबंधन टूटने की भी अटकलें लगीं। चुनाव तक गठबंधन रहती ये तो देखना होगा। विधानसभा का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।

जम्मू-कश्मीर चुनाव

11 दिसंबर, 2023 को सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करके तत्कालीन राज्य जम्मू और कश्मीर की विशेष स्थिति को समाप्त करने के मोदी सरकार के अगस्त 2019 के फैसले पर सर्वसम्मति से अपनी मुहर लगा दी। इसने "जल्द से जल्द" राज्य का दर्जा बहाल करने का भी आदेश दिया और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव कराने के लिए 30 सितंबर, 2024 की समय सीमा तय की है।

यह महत्वपूर्ण है क्योंकि इसे निरस्त किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर के लोगों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला है - यह मुद्दा राज्य में पार्टियों द्वारा लगातार उठाया जाता है। न्यायालय ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की है, लेकिन केंद्र द्वारा इस मुद्दे पर कैसे विचार किया जाएगा, यह बातचीत का मुख्य विषय बनने की उम्मीद है।

UCC को लेकर क्या हो सकता है?

समान नागरिक संहिता (UCC) के प्रस्ताव को तब से बल मिला है जब पीएम मोदी ने चुनावी राज्य मध्य प्रदेश में एक रैली में इसके पक्ष में बात की थी। जुलाई में, यूसीसी के कार्यान्वयन पर चर्चा के लिए एक संसदीय स्थायी समिति की बैठक हुई।

2022 में अपने चुनावी वादे पर अमल करते हुए, भाजपा ने उत्तराखंड के लिए यूसीसी मसौदा तैयार करने के लिए मई में विशेषज्ञों की एक समिति का गठन किया। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट भी दे दी है और कानून का मसौदा तैयार है। उम्मीद है कि पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार आने वाले महीनों में यूसीसी के कार्यान्वयन पर चर्चा और अनुमोदन के लिए एक विशेष सत्र बुलाएगी।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
×
tlbr_img1 Shorts tlbr_img2 खेल tlbr_img3 LIVE TV tlbr_img4 फ़ोटो tlbr_img5 वीडियो