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‘एनिमल’ के निर्देशक के जवाब से खुशी हुई: जावेद अख्तर

मेरे 53 साल के करिअर में उन्हें एक भी फिल्म, एक भी पटकथा, एक भी दृश्य, एक भी संवाद या एक भी गाना ऐसा नहीं मिला, जिसके लिए वे कह सकें कि ‘देखो, ये तुमने लिखा है और तुम मेरी फिल्म के बारे में बात कर रहे हो’।
Written by: एजंसी | Edited By: Bishwa Nath Jha
Updated: March 22, 2024 10:37 IST
‘एनिमल’ के निर्देशक के जवाब से खुशी हुई  जावेद अख्तर
जावेद अख्तर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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जावेद अख्तर ने समस्याग्रस्त दृश्यों वाली फिल्मों की व्यावसायिक सफलता को खतरनाक प्रवृत्ति करार देने वाले अपने पूर्व के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि जब ‘एनिमल’ फिल्म के निर्देशक संदीप रेड्डी वांगा उनके 53 साल के काम में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं खोज पाए तो उन्हें यह देखकर बहुत खुशी हुई। अख्तर ने इस साल की शुरुआत में एक कार्यक्रम के दौरान वांगा की फिल्म पर स्पष्ट रूप से कटाक्ष करते हुए सिनेमा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की थी, लेकिन उन्होंने फिल्म का नाम नहीं लिया था।

फिल्म निर्देशक को यह बात पसंद नहीं आई थी और उन्होंने अख्तर की कला को ‘झूठा’करार दिया था। इस फिल्म में रणबीर कपूर ने ऐसे हिंसक व्यक्ति का किरदार निभाया था जो अपने पिता की स्वीकृति के लिए बेताब है। इस फिल्म को हिंसात्मक और स्त्री द्वेष सामग्री वाले दृश्यों के लिए आलोचना झेलनी पड़ी। यह फिल्म बाक्स आफिस पर 900 करोड़ रुपए कमाकर 2023 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों में से एक रही।

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अख्तर (79) ने एक साक्षात्कार के दौरान कहा कि जब उन्होंने या उनकी टीम ने जवाब दिया तो मुझे बहुत खुशी हुई। मैंने सम्मानित महसूस किया। मेरे 53 साल के करिअर में उन्हें एक भी फिल्म, एक भी पटकथा, एक भी दृश्य, एक भी संवाद या एक भी गाना ऐसा नहीं मिला, जिसके लिए वे कह सकें कि ‘देखो, ये तुमने लिखा है और तुम मेरी फिल्म के बारे में बात कर रहे हो’।

उन्होंने कहा कि जब ‘एनिमल’ के निर्देशक को उनके काम में कोई गंदगी नहीं दिखी, तो उन्होंने ‘मिर्जापुर’ के लिए उनके बेटे फरहान अख्तर को निशाना बनाने का फैसला किया। अख्तर ने कहा कि उन्हें मेरे बेटे के कार्यालय जाना पड़ा और उन्हें एक ऐसा टीवी धारावाहिक मिला, जिसमें फरहान ने न तो अभिनय किया, न ही उसका निर्देशन किया और न ही उन्होंने उसे लिखा।

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उनकी कंपनी ने इसका निर्माण किया है। आजकल, एक्सेल जैसी बड़ी कंपनियां बहुत सी चीजों का निर्माण कर रही हैं। तो उनमें से एक यह (मिर्जापुर) था। उन्होंने इसका जिक्र किया। इससे मुझे बहुत खुशी हुई। आप मेरे करिअर के 53 साल में कुछ भी नहीं ढूंढ़ पाए। कितनी शर्म की बात है।

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उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने बयान में फिल्मकार की निंदा नहीं की थी। लोकतांत्रिक समाज में उन्हें (वांगा को) एक और ‘एनिमल’ जैसी कई फिल्म बनाने का अधिकार है। मैं दर्शकों को लेकर चिंतित था, फिल्म निर्माता को लेकर नहीं। उन्हें किसी भी तरह की फिल्म बनाने का अधिकार है। वास्तव में लोगों को पोर्न बनाने का अधिकार होना चाहिए और इसे ‘केवल वयस्कों के लिए’ प्रदर्शित किया जाना चाहिए।

अख्तर ने कहा कि कोई फिल्म निर्माता ‘एनिमल’ में कपूर द्वारा निभाए रणविजय जैसे समस्याग्रस्त चरित्रों को सम्मानित रूप में दिखा सकता है लेकिन करोड़ों लोगों द्वारा इसकी सराहना किया जाना उनकी ‘चिंता का विषय’है। उन्होंने समान नागरिक संहिता पर भी बात की और कहा कि मैं कल से नहीं, बल्कि कई वर्षों से समान नागरिक संहिता का समर्थक हूं लेकिन समान नागरिक संहिता के नाम पर जो हो रहा है वह बेतुका है। समान नागरिक संहिता के बैनर तले इसे मुस्लिम या अल्पसंख्यकों पर हमला करने के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। यह निष्पक्ष और तार्किक होना चाहिए और केंद्र की ओर से होना चाहिए। इस पर गहन चर्चा होनी चाहिए।

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