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'अगर हम पैसों के लिए फिल्में बनाना बंद कर दें तो…', नसीरुद्दीन शाह ने हिंदी सिनेमा पर साधा निशाना

नसीरुद्दीन शाह ने हाल ही में हिंदी सिनेमा के प्रति अपनी निराशा व्यक्त की और कहा कि इसके बेहतर होने की उम्मीद तभी है।
Written by: एंटरटेनमेंट डेस्‍क | Edited By: Sneha Patsariya
नई दिल्ली | February 18, 2024 20:07 IST
 अगर हम पैसों के लिए फिल्में बनाना बंद कर दें तो…   नसीरुद्दीन शाह ने हिंदी सिनेमा पर साधा निशाना
नसीरुद्दीन शाह (image: twitter)
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नसीरुद्दीन शाह (Naseeruddin Shah) का नाम बॉलीवुड के उन सितारों में शामिल है जिनकी एक्टिंग का पूरा देश कायल है। हिंदी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह अकसर अपने किसी न किसी बयान को लेकर चर्चा में बने रहते हैं। अकसर वह फिल्मों के बारे में अपने विचार साझा करते हैं।

वह लगभग हर मुद्दे पर पर अपनी राय रखते नजर आते हैं। वह बॉलीवुड सेलेब्स और हिंदी सिनेमा पर भी निशाना साधते रहते हैं। अब हाल ही में एक्टर ने एक बार फिर बॉलीवुड फिल्मों पर निशाना साधा है। एक्टर ने कहा कि हिंदी सिनेमा में कुछ बेहतर तभी होगा जब पैसे कमाने के लिए फिल्में बनाना बंद कर दिया जाए।

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नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा

दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने नई दिल्ली में 'मीर की दिल्ली, शाहजहांनाबाद: द इवॉल्विंग सिटी' में कहा कि "हिंदी फिल्म निर्माता पिछले 100 वर्षों से एक ही तरह की फिल्में बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि कि यह वास्तव में मुझे निराश करता है कि हम यह कहने में गर्व महसूस करते हैं कि हिंदी सिनेमा 100 साल पुराना है लेकिन हम एक ही तरह की फिल्में बना रहे हैं।'

एक्टर ने आगे कहा कि 'मैंने हिंदी फिल्में देखना बंद कर दिया है, मुझे वे बिल्कुल पसंद नहीं हैं। हिंदुस्तानी खाना हर जगह पसंद किया जाता है क्योंकि इसमें दम है। हिंदी फिल्मों में क्या दम है? दुनिया भर में भारतीय हिंदी फिल्में देखी जाती हैं क्योंकि यह उनको अपने घर से जोड़ती है, लेकिन जल्द ही हर कोई इससे ऊब जाएगा।'

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अब बहुत देर हो चुकी है

शाह ने आगे कहा कि "हिंदी सिनेमा के लिए उम्मीद तभी है जब हम उन्हें पैसा कमाने के साधन के रूप में देखना बंद कर दें। लेकिन मुझे लगता है कि अब बहुत देर हो चुकी है। अब कोई समाधान नहीं है क्योंकि जिन फिल्मों को हजारों लोग देखते हैं वे बनती रहेंगी और लोग बनाते रहेंगे। इसलिए जो लोग गंभीर मुद्दों पर फिल्में बनाना चाहते हैं, उनकी जिम्मेदारी है कि वे आज की वास्तविकता दिखाएं और इस तरह से दिखाएं कि उन्हें करोड़ों ना मिलें, या ईडी उनके दरवाजे पर दस्तक न दे।" उन्होंने कहा कि कई ईरानी फिल्म निर्माताओं ने अधिकारियों के जुल्म के बाद भी फिल्में बनाईं। साथ ही, उन्होंने भारतीय कार्टूनिस्ट आरके लक्ष्मण का उदाहरण देते हुए कहा कि वे आपातकाल के दिनों में भी कार्टून बनाते रहे हैं।

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