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कान्स फिल्म समारोह में मिली सफलता से भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह

इस बार कई राज्यों ने कान्स फिल्म बाजार में भारत का प्रतिनिधित्व किया जैसे जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र आदि अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए वह अपने उत्कृष्ट स्थान को प्रस्तुत कर सकें।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 31, 2024 14:15 IST
कान्स फिल्म समारोह में मिली सफलता से भारतीय सिनेमा जगत में उत्साह
पायल कपाड़िया। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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आरती सक्सेना

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कान्स फिल्म महोत्सव हमेशा से ही कला के कद्रदान प्रेमियों के लिए खास रहा है। इस वर्ष भी 2024 में कांस फिल्मोत्सव को लेकर कला प्रेमियों में उत्साह देखने को मिला। 14 मई 2024 से कांस फिल्म महोत्सव के 77 वें संस्करण का आगाज हुआ जो दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म उत्सव में से एक है। कांस फिल्म उत्सव में हर साल की तरह इस साल भी फिल्म-टीवी के निर्माता निर्देशक व कलाकार अपनी फिल्म और फैशन का प्रदर्शन करने वहां पहुंचे।

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कान्स फिल्मोत्सव में सबसे अच्छी फिल्म को डिओर सम्मान से सम्मानित किया जाता है जो 18 कैरेट गोल्ड और एमराल्ड कट डायमंड से तैयार किया जाता है। इस फिल्म उत्सव में लगभग 90 देश की मशहूर हस्तियां शामिल होती हैं। इसमें 100 देश के 4000 से अधिक पत्रकार और 2000 आउटलेट्स शामिल होते हैं। यहां पर सभी फिल्मों का प्रदर्शन होता है और फिल्म के हिसाब से टिकट का दाम होता है।

कान्स महोत्सव में फिल्मी हस्तियों की तादाद इतनी ज्यादा होती है कि वहां पर रेड कारपेट तीन बार बदलना पड़ता है। यहां सभी देशों की तरह भारत से भी कई फिल्मों का प्रदर्शन किया जाता है। इस बार कान्स फिलोत्सव में भारत का महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। इस बार कान्स में भारत की सात फिल्मों का चयन किया गया। इसका वैश्विक मंच पर प्रदर्शन किया जाएगा।

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तीस साल में पहली बार कान्स फिल्म उत्सव में पोलमे डी के लिए निर्माता निर्देशक पायल कपाड़िया की फिल्म आल वी इमेजिन ईज लाइट को नामांकित किया गया। पायल कपाड़िया की फिल्म न केवल इतने बड़े मंच पर पहुंची बल्कि इस फिल्म ने सम्मानित पुरस्कार ग्रांड प्रिक्स सम्मान जीत कर भारत का मान बढ़ाया। इस बार भारत कान्स महोत्सव में दो कारणों से चर्चा में रहा।

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पहले तो तीस साल में पहली बार किसी भारतीय फिल्म को आल वी इमेजिन इज लाइट को न सिर्फ पुरस्कार मिला बल्कि कान्स महोत्सव के दौरान आठ मिनट का स्टैंडिंग आडिशन भी मिला। इस के अलावा संतोष और सिस्टर मिडनाइट जैसी फिल्में भी कांस के रोस्टर का हिस्सा बनी।दूसरी वजह खास यह है कि इस बार कांस महोत्सव में विष्णु कौशल, आयुष मेहरा, नैंसी त्यागी और आस्था शाह जैसे कंटेंट क्रिएटर भी हिस्सा लेते नजर आए।

इनके अलावा ऐश्वर्या राय, जैकलीन फर्नांडिस, अदिति राव हैदरी और शोभिता धुली वाला भी रेड कार्पेट में फैशन का जलवा बिखेरती नजर आई। इस बार कांस फिल्मोत्सव में कियारा आडवाणी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। रेड सी फाउंडेशन में वूमेन इन सिनेमा गाला का वह हिस्सा बनी। इसी दौरान जब कियारा आडवाणी वूमेन इन सिनेमा गाला डिनर पार्टी में लगभग 30 करोड़ का हार पहनकर पहुंची तो सबकी आंखें उन्ही पर थी। किआरा को इसी दौरान रेड सी फाउंडेशन द्वारा सम्मानित किया गया।

पत्रकार और फिल्म आलोचक भावना शर्मा ने कहा कि कान्स महोत्सव पिछले 70 सालों से देश विदेश की फिल्मों को अपने जरिए दर्शकों तक पहुंचा रहा है। इस महोत्सव के जरिए दुनिया के काबिल और मेधावी लोग एक जगह जमा होते हैं और यहां पर आपसी संबंध बढ़ाते हैं। अपने विचार साझा करते हैं ताकि वह एक दूसरे से कुछ सीख सके।

महोत्सव में प्रदर्शित भारतीय फिल्मों को न सिर्फ आगे बढ़ने का योगदान मिलता है बल्कि इस महोत्सव में अलग-अलग तरह की फिल्में देखने के बाद फिल्मी लोगों को बहुत कुछ सीखने के लिए भी मिलता है। कान्स महोत्सव में हमारे भारत की अभिनेत्रियां रेड कार्पेट पर प्रदर्शन करके पूरी दुनिया में कला का प्रदर्शन करती है।

भावना शर्मा की तरह पत्रकार और फिल्म समीक्षक जोइता मित्रा सुवर्णा भी कान महोत्सव को भारत के फिल्म उद्योग के लिए एक अच्छा संकेत मानती हैं। जोइता के अनुसार 77वें कांस फिल्म महोत्सव में भारत मंडप भारती सिनेमा की नेटवर्किंग और प्रचार केंद्र के रूप में कार्यरत रहा है। इनका उद्देश्य भारतीय आडियो विजुअल उद्योग और उनके अंतरराष्ट्रीय समकक्षों के बीच अधिक संयोग को बढ़ावा देना है जिससे दुनिया भर में भारतीय सिनेमा की ख्याति और पहुंच बढ़ सके।

इस बार कई राज्यों ने कान्स फिल्म बाजार में भारत का प्रतिनिधित्व किया जैसे जम्मू और कश्मीर, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र आदि अंतर्राष्ट्रीय फिल्मों की शूटिंग के लिए वह अपने उत्कृष्ट स्थान को प्रस्तुत कर सकें। भारत अपने दार्शनिक योगदान, चिंतन और विचारों के कारण दुनिया भर का ध्यान आकर्षित कर रहा है।

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