scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

'मुझे यह आपत्तिजनक लगता है', रत्ना पाठक ने गुरु दत्त की फिल्मों पर उठाए सवाल, बोलीं- उनकी मूवीज में महिलाएं बिल्कुल पुरुषों के चरणों में…

रत्ना पाठक ने हाल ही में दिए इंटरव्यू में गुरु दत्त की फिल्मों को 'आपत्तिजनक' बताया है। उन्होंने कहा कि उनकी फिल्मों में महिलाएं हमेशा पुरुषों के कदमों में ही दिखती थीं।
Written by: एंटरटेनमेंट डेस्‍क | Edited By: Sneha Patsariya
नई दिल्ली | May 12, 2024 14:31 IST
 मुझे यह आपत्तिजनक लगता है   रत्ना पाठक ने गुरु दत्त की फिल्मों पर उठाए सवाल  बोलीं  उनकी मूवीज में महिलाएं बिल्कुल पुरुषों के चरणों में…
रत्ना पाठक (Image Credits:@m4ndni/Twitter)
Advertisement

बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस रत्ना पाठक किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक्ट्रेस को उनकी दमदार एक्टिंग के लिए जाना जाता है। एक्टिंग के अलावा वह अपने बेबाक अंदाज के लिए भी जाना जाता है। वह लगभग हर मुद्दे पर अपनी राय रखती नजर आती हैं।

एक बार फिर वह बयान को लेकर चर्चा में आ गई हैं। अब हाल ही में दिए इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने गुजरे जमाने के एक्टर गुरु दत्त की फिल्मों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि गुरु दत्त की फिल्मों में महिलाओं को ढंग के रोल नहीं दिए जाते थे। उनकी फिल्मों में महिलाएं हमेशा पुरुषों के कदमों में ही दिखीं।

Advertisement

गुरु दत्त की फिल्मों पर कही यह बात

रत्ना पाठक ने Hauterrfly को दिए इंटरव्यू में कहा कि फिल्मकार बिमल रॉय और गुरु दत्त की फिल्मों में महिलाओं के किरदार को पुरुषों के इर्द-गिर्द ही दिखाया जाता था और महिलाएं हमेशा पूरी तरह हीरो के कदमों में झुकी नजर आते हैं। एक्ट्रेस ने कहा कि "अच्छे लोग केवल अच्छे हो सकते थे, बुरे लोग केवल बुरे हो सकते थे। सब कुछ बड़े पैमाने पर था। इंडस्ट्री के कुछ बहुत सेंसिटिव फिल्म मेकर्स की खूबसूरत फिल्मों में भी महिलाओं को झुका दिया गया। चाहे इसमें गुरुदत्त की फिल्में हों या बिमल रॉय की फिल्में। इनमें भी महिलाएं हमेशा पुरुषों के कदमों में दिखाई पड़ती थीं। उनकी फिल्मों का मूड 'आपकी नज़रों ने समझा प्यार के काबिल मुझे' होता था। मुझे यह कभी समझ नहीं आया। लेकिन अब मुझे यह सब आपत्तिजनक लगता है। कुछ समय के लिए तो मैंने भी इसे अपना लिया था।"

हम भी पुरुषों की ही तरह स्ट्रॉग हैं

एक्ट्रेस ने आगे कहा कि "हिंदी सिनेमा में महिलाओं को सेक्शुअलाइज़ेशन या यौन उपभोग की वस्तु दिखाने पर ज़ोर रहा है। लेकिन ये कुछ साल में और ज़्यादा खराब हो गया। अब यह देवी से सीधा टार्ट बन गया है। इनमें से दोनों ही स्थिति ठीक नहीं है। मुझे यह भी लगता है कि हम भी पुरुषों की ही तरह स्ट्रॉग हैं। लेकिन अफसोस है कि हमारी कहानी कहने वालों ने कभी इंसानों और इंसानों की दिलचस्प क्षेत्रों का पता लगाने की कोशिश नहीं की।"

Advertisement

बता दें कि रत्ना पाठक को आखिरी बार फिल्म 'धक धक' में देखा गया था। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का नॉमिनेशन भी मिला था। फिल्म में रत्ना पाठक के अलावा दिया मिर्ज़ा, फातिमा सना शेख़ और संजना सांघी नजर आई थीं।

Advertisement
Tags :
Advertisement
Jansatta.com पर पढ़े ताज़ा एजुकेशन समाचार (Education News), लेटेस्ट हिंदी समाचार (Hindi News), बॉलीवुड, खेल, क्रिकेट, राजनीति, धर्म और शिक्षा से जुड़ी हर ख़बर। समय पर अपडेट और हिंदी ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए जनसत्ता की हिंदी समाचार ऐप डाउनलोड करके अपने समाचार अनुभव को बेहतर बनाएं ।
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो