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CineGram: 'बंगला भुतहा था…', नेम और फेम के बाद भी सारी जिंदगी एक चीज के लिए तरसते रह गए गुरु दत्त, 2 बार की थी आत्महत्या की कोशिश

Guru Dutt Bhutiya Bungalow: गुरु दत्त अपने जमाने के जाने-माने एक्टर रहे। उन्होंने स्क्रीन पर खूब राज किया। उनके पास नेम और फेम दोनों ही खूब रहा फिर भी एक चीज के लिए वो ताउम्र तरसते रहे।
Written by: एंटरटेनमेंट डेस्‍क | Edited By: Rahul Yadav
नई दिल्ली | Updated: June 28, 2024 14:24 IST
cinegram   बंगला भुतहा था…   नेम और फेम के बाद भी सारी जिंदगी एक चीज के लिए तरसते रह गए गुरु दत्त  2 बार की थी आत्महत्या की कोशिश
गुरु दत्त की अधूरी ख्वाहिश...(Photo-Jansatta)
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60-70 के दशक में गुरु दत्त के नाम का सिक्का चलता था। वो जिस भी फिल्म में होते थे तो वो समझो हिट होती थी। उनके साथ काम करने के लिए मेकर्स की लाइनें लगी होती थीं। उन्हें ना केवल फीमेल फैंस ही बल्कि एक्ट्रेस भी पसंद करती थीं। गुरु दत्त के पास उनकी जिंदगी में सबकुछ था। लेकिन, नेम और फेम के बाद भी वो सारी जिंदगी एक चीज के लिए तरसते रह गए। यहां तक कि एक्टर ने दो बार आत्महत्या तक करने की कोशिश की थी। चलिए बताते हैं उनके बारे में…

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गुरु दत्त और वहीदा रहमान की नजदीकियों के किस्से खूब रहे हैं। शादीशुदा होकर भी एक्टर उनके प्यार में थे। हालांकि, बाद में दोनों का रिश्ता टूट गया था। उनकी आखिरी मुलाकात बर्लिन में हुई थी। वहीदा से दूर होना गुरुदत्त के लिए काफी मुश्किल भरा रहा था। गुरु को लगा था कि उनका सब कुछ खत्म हो गया था। एक्टर ने खुद निर्माता बीआर चोपड़ा से कहा था कि उन्हें लगता था कि वो पागल हो जाएंगे। वहीं, सिंगर गीता से शादी की थी। वहीदा के साथ नजदीकियों की खबरों की वजह से दोनों के रिश्ते में अनबन रहने लगी थी। ऐसे में कुछ चीजों को लेकर गीता पाली हील में स्थित बंगले को जिम्मेदार मानने लगी थीं।

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यासीर उस्मान की लिखी किताब के अनुसार, गुरु-गीता की शुरुआती मुलाकातों को लेकर अंत तक रिश्ते की गवाह रहीं ललिता लाजमी ने बताया था कि उनका मानना था कि बंगला भुतहा था। घर में एक खास तरह का पेड़ था और वो (गीता) कहती थीं कि उसमें एक भूत रहता था। इसकी वजह से उनकी शादी बर्बाद हो रही है। इसकी वजह से गीता ने ही इस बंगले को छोड़ देने का सुझाव दिया था। वैसे ये ख्याल गुरु दत्त के लिए दिल तोड़ने वाला था। ये उनके सपनों का घर था। लेकिन, अफसोस की ये उनके सपनों का घर नहीं बन पाया जिसकी चाहत थी। गुरु दत्त की स्थिति इस हद तक खराब हो गई थी कि उन्होंने दो बार इस घर में खुद को मारने की कोशिश भी की थी। वो बाल-बाल बचे थे।

जिंदगी भर खली एक चीज की कमी

यासीर उस्मान की किताब की मानें तो एक बार आत्महत्या की कोशिशों को लेकर उनके एक करीबी दोस्त ने गुरु दत्त से पूछा था कि उन्होंने ऐसा क्यों किया था? उनके पास नाम है, और दौलत है। उनके पास जनता का प्यार है। वो सब है, जिसके लिए ज्यादातर लोग तरसते हैं। ऐसे में वो अपनी जिंदगी से क्यों इतने असंतुष्ट थे? इस पर गुरु दत्त ने जवाब दिया था कि वो अपनी जिंदगी से असंतुष्ट नहीं हैं। बस वो अपने आप से असंतुष्ट हैं। उन्होंने कहा था कि ये सच है कि उनके पास वो सब है, जिसके लिए लोग तरसते हैं फिर भी उनके पास वो नहीं है जो ज्यादातक लोगों के पास है। एक्टर ने बताया था कि वो हमेशा से चाहते थे कि उनके पास एक कोना हो जहां पूरे दिन काम के बाद इंसान सब कुछ भुलाकर शांति के साथ बैठ सके। अगर उन्हें वो मिल जाता तो उनका मानना था कि उनकी जिंदगी जीने लायक होती।

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