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Bhojpuri Adda: लांछन नहीं, स्वाभिमान की लड़ाई है आम्रपाली दुबे की भोजपुरी फिल्म 'दाग एगो लांछन', बहनोई ने घोला विक्रांत सिंह की जिंदगी में जहर

Bhojpuri Film Daag Ego Lanchan Amrapali Dubey: आम्रपाली दुबे और विक्रांत सिंह राजपूत की फिल्म 'दाग एगो लांछन' काफी चर्चा में रही। भोजपुरी फिल्म को यूट्यूब पर रिलीज कर दिया गया है। ऐसे में चलिए बताते है कि ये फिल्म कैसी है?
Written by: Rahul Yadav
नई दिल्ली | Updated: May 10, 2024 13:41 IST
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भोजपुरी फिल्म 'दाग एगो लांछन' मूवी रिव्यू। (Photo- Amrapali Dubey/Insa)
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अक्सर आपने देखा होगा कि जब महिला के चरित्र की चर्चा होती है तो लोग 'रामायण' की सीता का उदाहरण देते हैं। कहा जाता है कि जब सीता को अपने चरित्र का प्रमाण देने के लिए सब राज-पाट छोड़कर जंगल में रहना पड़ा था तो हम मनुष्यों की क्या औकात है। सीता अग्नि परीक्षा से गुजरी थीं। अक्सर देखा जाता है कि महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठ जाता है। इसी बीच भोजपुरी की ऐसी फिल्म रिलीज हुई है, जिसमें स्वाभिमान की लड़ाई को दिखाया गया है। इसमें भी महिला के चरित्र पर सवाल उठता लेकिन, इसमें वो महिला अग्नि परीक्षा तो देती है मगर बाद में स्वाभिमान की लड़ाई भी लड़ती है। इस भोजपुरी फिल्म का टाइटल 'दाग एग लांछन' है, जिसमें आम्रपाली दुबे और विक्रांत सिंह राजपूत ने लीड रोल प्ले किया है। चलिए बताते हैं फिल्म के बारे में…

क्या है फिल्म की कहानी?

विक्रांत सिंह राजपूत, आम्रपाली दुबे और रितेश पांडे स्टारर भोजपुरी फिल्म 'दाग एगो लांछन' की कहानी रिश्तों के मायाजाल में उलझी हुई है। इसमें दामिनी यानी कि आम्रपाली दुबे की कहानी को दिखाया गया है, जो कि अपने ससुराल में पति के साथ देवर और ससुराल के बाकी सदस्यों से बहुत प्यार करती है। मगर देवर भाभी के बीच एक अलग बॉन्ड होता है। जैसे एक मां और बेटे का। ऐसे में इनके रिश्ते पर सवाल उठाया जाता है, जिसके बाद आम्रपाली के पति बने विक्रांत सिंह एक्ट्रेस की अग्नि परीक्षा लेते हैं फिर यहीं से शुरू होती है स्वाभिमान की लड़ाई। इसमें दिखाया गया है कि कैसे बहनोई की बातों में आकर शक के बिनाह पर विक्रांत अपनी जिंदगी में भूचाल ले आते हैं। भोजपुरी फिल्म का कॉन्सेप्ट कमाल का है, जो कि अश्लीलता से कोसों दूर है।

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रितेश पांडे ने लूटी लाइमलाइट, कैसी रही आम्रपाली और विक्रांत की एक्टिंग?

भोजपुरी फिल्म 'दाग एगो लांछन' में स्टार्स की एक्टिंग की बात की जाए तो इसमें भले ही रितेश पांडे सपोर्टिंग कैरेक्टर में हैं लेकिन, उन्होंने सारी लाइमलाइट ही चुरा ली है। कुंवर सिंह के रोल में वो खूब जंचे और देवर-भाभी के रिश्ते को दिखाने में खरा उतरे हैं। वहीं, विक्रांत सिंह राजपूत हीरो हैं मगर काम विलेन जैसा ही कर बैठे हैं। वो आम्रपाली दुबे के पति के किरदार में खूब जंचे हैं। इसके साथ ही यूट्यूब क्वीन आम्रपाली ने दामिनी के रोल को बखूबी प्ले किया है। महिला के चरित्र पर सवाल उठाने के बाद उन्होंने स्वाभिमान की लड़ाई खूब लड़ी और इसे शानदार तरीके से पर्दे पर दिखाया गया है। बाकी स्टार्स की बात करें तो रक्षा गुप्ता ने रितेश की लेडी लव का रोल प्ले किया है और बाकी कलाकारों अमिता शुक्ला और रंभा साहनी ने भी अच्छा खासा काम किया है।

कैसा है डायरेक्शन?

इसके साथ ही भोजपुरी फिल्म 'दाग एगो लांछन' के डायरेक्शन की बात की जाए तो इसका निर्देशन प्रेमांशु सिंह ने किया है। कहानी को थोड़े वक्त में ही खत्म किया जा सकता था। फिल्म के कुछ-कुछ सीन्स देखकर लगेंगे कि इसे खींचा गया है। फिल्म का फर्स्ट हाफ थोड़ा ऊबाऊ लगता है लेकिन, जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है तो इसमें रोमांच आने लगता है और सेकंड हाफ में आप पूरी तरह से कनेक्ट हो जाते हैं। विक्रांत फिल्म में लीड एक्टर हैं मगर रितेश पांडे के साथ आम्रपाली को ज्यादा स्क्रीन स्पेस दिया गया है। मानो कि जैसे फिल्म रितेश पांडे और रक्षा गुप्ता के लिए ही बनाई गई हो। कुल मिलाकर भोजपुरी फिल्म के निर्देशन को ठीक-ठाक कहा जा सकता है।

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आम्रपाली दुबे ने किया है फाइट सीक्वेंस

भोजपुरी फिल्मों में अमूमन कम ही देखा जाता है कि एक्ट्रेस ने फाइट सीक्वेंस दिया हो। अक्सर फाइट करते हुए रानी चटर्जी को देखा गया है। लेकिन, इस फिल्म के जरिए आम्रपाली दुबे को भी पहली बार फाइट करते हुए देखा गया। जब वो फाइट करती हैं तो कुछ सीन्स देखकर उस पर निगाहें थम सी जाती हैं। भोजपुरी मूवीज में थोड़ा ये अलग तरह का बदलाव धीरे-धीरे देखने के लिए मिल रहा है। इसके पहले काजल राघवानी ने फाइट सीक्वेंस फिल्म 'संघर्ष' में दिया था। अभी इंडस्ट्री में गिनी चुनी एक्ट्रेसेस हैं, जिन्होंने फाइट सीक्वेंस दिया है। ऐसे में आम्रपाली को पहली बार फाइट करते हुए देखना दिलचस्प है।

फिल्म के गाने और म्यूजिक

भोजपुरी फिल्मों में आपने भर-भर के गाने देखे होंगे। लेकिन, इस मूवी में थोड़े से कम गाने हैं। फिल्म का म्यूजिक भी अच्छा है, जो कहीं ना कहीं फिल्म की स्टोरी से आपको कनेक्ट करता है। इसमें गानों की बात की जाए तो 'सिगरेट जइसन होला जवानी', 'ओठवा ह नइया', 'प्यार इ गजब के खेल' और 'करम परीक्षा, धरम परीक्षा' जैसे कुछ गाने हैं, जो फिल्म के सीन्स से आपको कनेक्ट करते हैं और रोमांच पैदा करते हैं।

देखनी चाहिए या नहीं?

वहीं, बात की जाए कि इस भोजपुरी फिल्म को देखना चाहिए या नहीं तो इसके जरिए पहली बार आम्रपाली दुबे और विक्रांत सिंह राजपूत की जोड़ी पर्दे पर नजर आई है। ये एकदम फ्रेश जोड़ी और इनकी केमिस्ट्री भी कमाल की है। वहीं, दोनों स्टार्स ने भी रितेश पांडे के साथ कमाल का काम किया है। इनकी तिकड़ी देखते ही बनती है। वहीं, फिल्म का कॉन्सेप्ट भी अच्छा है कि कैसे एक शक की वजह से जिंदगी बर्बाद हो जाती है। इसके साथ ही देवर-भाभी के पवित्र रिश्ते को दिखाया गया है। वहीं, सबसे बड़ी बात है कि जहां भोजपुरी पर अश्लीलता का धब्बा लगता रहा है वहीं, ये फिल्म इस धब्बे को धोती है। इसे आप परिवार के साथ देख सकते हैं। कह सकते हैं कि भोजपुरी फिल्म में कुछ तो नया है।

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