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अब तक प्रचार के लिए राजस्थान क्यों नहीं गए राहुल गांधी? जीत की कम संभावनाएं या और कोई है वजह

Rajasthan Assembly Elections: राजस्थान में इस बार मुकाबला बेहद रोचक नजर आ रहा है। अशोक गहलोत जहां राजस्थान चुनाव जीतकर इतिहास रचने का दावा कर रहे हैं तो बीजेपी को उम्मीद है को वो सत्ता में वापसी करेगी।
Written by: HAMZA KHAN | Edited By: Yashveer Singh
Updated: November 10, 2023 17:39 IST
अब तक प्रचार के लिए राजस्थान क्यों नहीं गए राहुल गांधी  जीत की कम संभावनाएं या और कोई है वजह
राजस्थान से अब तक दूर क्यों हैं राहुल गांधी?
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साल 2024 से पहले पांच राज्यों के चुनावों को 'सेमीफाइनल' के तौर पर देखा जा रहा है। मिजरोम में जहां वोटिंग हो चुकी है तो वहीं छत्तीसगढ़ में दूसरे चरण का मतदान बाकी है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान औऱ तेलंगाना में भी अभी वोट डाले जाने हैं। चुनावों का ऐलान हुए काफी समय हो चुका है लेकिन तब से अब तक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी राजस्थान से दूर हैं। राजस्थान में 25 दिसंबर को वोटिंग होनी है यानी मतदाताओं को रिझाने के लिए अब सभी दलों के पास एक पखवाड़े का समय है।

राजस्थान के लिए कांग्रेस पार्टी के स्टार कैंपेनर्स की लिस्ट में राहुल गांधी का नाम तीसरे नंबर पर है। इस लिस्ट में पहले नंबर पर मल्लिकार्जुन खड़गे और सोनिया गांधी हैं। राहुल गांधी की राजस्थान से अब तक दूरी कांग्रेस पार्टी में ही फुसफुसाहट का विषय बन चुकी है लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी चुनाव बाद राज्य में कई रैलियां करने के लिए आ रहे हैं।

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चुनावों के ऐलान के बाद कांग्रेस के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे राजस्थान में दो रैलियां कर चुके हैं। उन्होंने पहली रैली बारां में 16 अक्टूबर को और दूसरी रैली जोधपुर में 6 नवंबर को की थी। इसी दिन राज्य के सीएम अशोक गहलोत ने अपना नामांकन भी भरा था। प्रियंका गांधी भी राज्य में दो रैलियां कर चुकी हैं। उन्होंने 20 अक्टूबर को दौसा में और 25 अक्टूबर को झुंझुनू में रैली की थी। हालांकि राहुल गांधी आखिरी बार राजस्थान में आखिरी बार चुनावों के ऐलान से पहले दिखाई दिए थे। राहुल गांधी ने 23 सितंबर को जयपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित किया था। इससे पहले वो 9 अगस्त को मननगढ़ में एक रैली में शिरकत करने आए थे।

सुखजिंदर सिंह रंधावा क्या बोले?

राजस्थान कांग्रेस के इंचार्ज सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि अन्य राज्यों में वोटिंग पहले हैं इसलिए राहुल गांधी वहां कार्यक्रम कर रहे हैं। पार्टी के अंदरूनी जानकारी रखने वालों की मानें तो कांग्रेस के एमपी और छत्तीसगढ़ में जीतने के ज्यादा चांस हैं इसलिए हो सकता है कि वहां पार्टी का ज्यादा फोकस हो। राहुल गांधी ने दिल्ली में खुद सितंबर महीने में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान ऐसी बात कही थी। उन्होंने कहा था, "अभी, हम शायद तेलंगाना में जीत रहे हैं, हम निश्चित रूप से मध्य प्रदेश जीत रहे हैं, हम निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ जीत रहे हैं। राजस्थान, हम बहुत करीब हैं और हमें लगता है कि हम जीतने में सफल रहेंगे।"

राजस्थान में कांग्रेस नेता मानते हैं कि राजस्थान की जीत में कम विश्वास वाली यह बात नहीं करनी चाहिए थी। राजस्थान में पिछले 30 वर्षों से चुनाव में सत्ताधारी पार्टी को हार का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस ने बीजेपी की गुटबाजी को देखते हुए अपने प्रचार की शुरुआत इस उम्मीद के साथ की थी कि वो इस बार राज्य में उलटफेर कर देगी। हालांकि बीजेपी समय के साथ एकजुट होती दिखाई दे रही है।

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राजस्थान में पिछले कुछ हफ्तों में प्रियंका गांधी प्रचार करती दिखाई दी हैं। सचिन पायलट के नजदीक माने जाने वाली प्रियंका गांधी ने राज्य में हुई अपनी तीन रैलियों में से दो उन्हीं के प्रभाव वाले क्षेत्र में की है। साल 2020 में भी सचिन पायलट और उनके समर्थकों द्वारा शुरू हुए कथित विद्रोह के अंत की वजह भी प्रियंका गांधी के प्रयास बताए जाते हैं।

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सचिन vs गहलोत में कौन भारी?

हालांकि इतने सब के बावजूद सचिन पायलट इस चुनाव में परदे के पीछे ही नजर आते हैं। राज्य में चल रहा कांग्रेस पार्टी के कैंपेन में पूरी तरह से अशोक गहलोत छाये हुए नजर आते हैं। राजधानी नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी उन्होंने संकेत दिया कि अगर कांग्रेस जीतती है तो उन्हें सीएम बनने की कोई जल्दी नहीं है।

गौर करने वाली बात यह है कि सचिन पायलट बारां में मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पार्टी के ERCP कैंपने के शुभारंभ से गायब थे। यहां एक फैक्ट यह भी है कि ERCP गुर्जर बेल्ट के बड़े हिस्से को कवर करता है। सचिन पायलट गुर्जर समुदाय से संबंध रखते हैं। हालांकि कार्यक्रम में सचिन पायलट के शामिल न होने की आधिकारिक वजह उनका टेरिटोरियल आर्मी एग्जाम बताया जाता है।

क्या गहलोत से नाराज हैं राहुल गांधी?

कुछ सूत्रों के अनुसार, राहुल के अब तक राजस्थान पहुंचने की वजह गहलोत - पायलट विवाद नहीं बल्कि पिछले साल गहलोत समर्थकों द्वारा शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ खुलकर किया गया विद्रोह है। राहुल गांधी कैंप अभी भी इस बात से नाराज है कि पिछले साल सीएम पद पर बने रहने और पायलट को बाहर रखने के लिए गहलोत गुट ने खुले तौर पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को कैसे चुनौती दी थी। तब कांग्रेस पार्टी ने गहलोत के तीन समर्थकों को नोटिस जारी किया था, इनमें से अब सिर्फ एक शांति धारीवाल को टिकट दिया गया है।

टिकट बंटवारे में गहलोत की चली?

हालांकि दूसरी तरफ कांग्रेस की लिस्ट पर नजर मारें तो यह पता चलता है कि गहलोत अपने समर्थकों को टिकट दिलवाने में सफल रहे हैं। एंटी इनकंबेंसी के बावजूद पार्टी ने 89 मौजूदा विधायकों को टिकट दिया है।

क्या पटरी से उतर गया कांग्रेस का कैंपन?

इतना ही नहीं, राजस्थान में कांग्रेस का कैंपेन बिल्कुल भी प्लान के मुताबिक नहीं चलता नहीं दिखाई दे रहा है। ERCP यात्रा कोई खास रिस्पांस देने में कामयाब नहीं हुआ है। पार्टी ने लॉन्च के एक दिन बाद ही 'कांग्रेस गारंटी यात्रा' निलंबित कर दी। पार्टी नेताओं का आधिकारिक तौर पर कहना है कि यात्रा दिवाली के बाद फिर से शुरू होगी लेकिन एक हकीकत यह भी है कि इसे भी कोई खास रिस्पांस नहीं मिल रहा था।

कब प्रचार करेंगे राहुल गांधी?

सुखजिंदर सिंह रंधावा के अनुसार, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी और राहुल गांधी दीपावली के बाद 14 नवंबर से 23 नवंबर के बीच राज्य में प्रचार करेंगे। हालांकि पार्टी के नेता को चिंता जताते हैं कि यह धारणा मजबूत हो रही है कि कांग्रेस राजस्थान को हारी हुई चीज मानती है। वो कहते हैं, "यह राहुल की ओर से उत्साह की कमी को समझा सकता है।"

BJP ने क्या कहा?

बीजेपी के प्रवक्ता लक्ष्मीकांत भारद्वाज ने कहा, "राहुल गांधी कैसे राजस्थान के लोगों का सामना करेंगे? उन्होंने पिछले चुनाव से पहले राजस्थान में कृषि ऋण माफ करने, बिजली बिल नहीं बढ़ाने, नई बसें खरीदने आदि के वादे किए थे… उनमें से एक भी वादा पूरा नहीं किया गया है। इसलिए शायद कांग्रेस खुद नहीं चाहती कि वह राजस्थान आएं क्योंकि तब वह पार्टी का चेहरा थे।" उन्होंने आगे कहा कि इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि राहुल गांधी राजस्थान आते हैं या नहीं क्योंकि यहां कांग्रेस के लिए कुछ भी नहीं बचा है। उन्हें विपक्ष का नेता भी चुनने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं मिलेंगी।

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