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कौन हैं Annie Raja? वायनाड से होंगी CPI की प्रत्याशी, राहुल गांधी हैं मौजूदा सांसद

CPI ने वायनाड लोकसभा सीट से राहुल गांधी के खिलाफ अपने प्रत्याशी का ऐलान कर दिया है।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: February 26, 2024 17:46 IST
कौन हैं annie raja  वायनाड से होंगी cpi की प्रत्याशी  राहुल गांधी हैं मौजूदा सांसद
राहुल गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी सीपीआई की एन्नी राजा सोर्स (ANI)
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कांग्रेस पार्टी इंडिया गठबंधन को लेकर लगातार उत्तर भारत में कवायद कर रही है लेकिन दक्षिण भारत में वह गठबंधन में गठबंधन के साथियों को ज्यादा महत्व नहीं दे रही है। इसी के चलते सीपीआई के साथ केरल में भी उसका गठबंधन नहीं हुआ है और आज सीपीआई ने अपने प्रत्याशियों का ऐलान कर दिया है। इसमें वायनाड से प्रत्याशी एनी राजा को उतारा गया है। बता दें कि इस सीट पर राहुल गांधी सांसद हैं, और उन्होंने पिछले चुनाव में यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी।

सीपीआई ने तिरुवनंतपुरम से पन्नियन रवींद्रन, वायनाड से एनी राजा, त्रिशूर से वीएस सुनील कुमार और मवेलिकारा से अरुण कुमार को टिकट दिया है। सीपीआई महासचिव डी राजा भी इसके संकेत दे चुके थे। खास बात यह है कि एनी राजा डी राजा की पत्नी हैं और यह कयास भी लगाए जा रहे थे कि पार्टी उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट दे सकती है लेकिन अब इन कयासों पर पार्टी की आधिकारिक मुहर भी लग गई है।

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डी राजा की पत्नी पहली बार चुनावी मैदान में उतरने वाली है। ऐसे में खासियत ये है कि उन्हें सीपीआई ने राहुल गांधी की सीट से प्रत्याशी बनाया है। राहुल ने 2019 के चुनावों में वायनाड में 4.31 लाख वोटों के साथ राज्य में सबसे अधिक अंतर से शानदार जीत हासिल की थी। गौरतलब है कि टिकटों की यह घोषणा पार्टी के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए की है। उन्होंने कहा कि पूर्व कृषि मंत्री वी एस सुनील कुमार त्रिशुर और पार्टी की युवा शाखा AIYF के नेता सी ए अरुणकुमार को मवेलिककारा सीट से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा।

डी राजा की तरह ही सीपीएम में एनी राजा का सियासी कद काफी बड़ा है। वह सीपीएम की राष्ट्रीय महिला समाख्या महासचिव भी हैं। एनी ने पहले कहा भी था कि वो वायनाड से पार्टी की उम्मीदवार हो सकती हैं। एनी ने कहा था कि अगर राहुल गांधी कहीं और जाने का विकल्प चुनते हैं तो वे ऐसा कर सकते हैं। बता दें कि सीपीएम के साथ गठबंधन को लेकर बातचीत तो हुई थी लेकिन फिर सीट बंटवारें को लेकर फंसे पेंच के चलते अंत में गठबंधन की सारी संभावनाएं खत्म हो गई हैं।

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वहीं इंडिया गठबंधन में कांग्रेस की सहयोगी एलडीएफ ने कांग्रेस पार्टी की काफी आलोचना की थी और दावा किया था कि पार्टी उत्तर भारत की अन्य क्षेत्रीय पार्टियों को कोई खास महत्व नहीं दे रही है। इसके चलते ही यहां सीपीआई और कांग्रेस के बीच कोई समझौता नहीं हो सका है।

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