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उत्तर प्रदेश: उन्नव में सपा की अन्नू टंडन दे रही हैं भाजपा के साक्षी महाराज को चुनौती

बहत्तर साल के सियासी सफर में उन्नाव क़े मतदाताओं ने हर दल को दिया मौका। यहां कांग्रेस को नौ बार, भाजपा पांच बार तथा जनता पार्टी, जनता दल, समाज़वादी पार्टी और बसपा के उम्मीदवारों को मिला है एक-एक बार मौका।
Written by: उमाकांत मिश्र | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 03, 2024 11:12 IST
उत्तर प्रदेश  उन्नव में सपा की अन्नू टंडन दे रही हैं भाजपा के साक्षी महाराज को चुनौती
साक्षी महाराज।अन्नू टंडन । फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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आजादी के बाद शुरू हुई चुनावी प्रक्रिया के बाद से वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पहली बार उन्नाव में कांग्रेस का उम्मीदवार चुनाव नहीं लड़ रहा है बल्कि यहां कांग्रेस छोड़कर सपा में शामिल हुई अन्नू टंडन को इंडिया के प्रमुख दल समाजवादी पार्टी से प्रत्याशी बनाया गया है। वर्ष 2009 में कांग्रेस के टिकट से जीतकर अन्नू टंडन संसद में उन्नाव की पहली महिला सांसद बनकर पहुंची थी। इस बार सपा के टिकट पर वे भाजपा के साक्षी महाराज को चुनौती दे रही हैं।

यह बात अलग है कि वर्ष 1952 से लेकर 2024 तक बहत्तर साल के सियासी कालखंड में उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से नौ बार चुनाव जीती कांग्रेस पार्टी के चार जनप्रतिनिधियों में पं विशम्भर दयालु त्रिपाठी (दो बार), लीलाधर आस्थाना (उपचुनाव), कृष्णदेव त्रिपाठी (दो बार), पूर्व केंद्रीय मंत्री जेड आर अंसारी (तीन बार) और अन्नू टंडन एक बार संसद पहुंच चुकी हैं।

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महज 1977 में जनता पार्टी के उम्मीदवार के रूप में स्व चौ राघवेंद्र सिंह, 1989 में जनता दल से स्व अनवार अहमद एवं 1999 में समाजवादी पार्टी से स्व दीपक कुमार को यहां के मतदाताओं ने सांसद बनाया था। वर्ष 2004 में बहुजन समाज पार्टी से पहली बार (उत्तर प्रदेश के मौजूदा उपमुख्यमंत्री) ब्रजेश पाठक उन्नाव के सांसद रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त वर्तमान समय में केंद्र और प्रदेश की सत्ता पर आरुढ़ भाजपा से यहां तीन बार देवी बक्स सिंह और दो बार साक्षी महाराज (कुल पांच बार) भाजपा के प्रत्याशी सांसद बन चुके हैं।

कुल मिलाकर उन्नाव के बहत्तर साल की प्रजातंत्रात्मक व्यवस्था के तहत लोकसभा चुनाव की सीढ़ी चढ़कर यहां वर्ष 1999 से 2024 तक (बीते चौबीस सालों) से बाहरी सांसदों का साम्राज्य चल रहा है। उन्नाव के लोगों का मानना है कि यदि इस बार भी भाजपा प्रत्याशी ने यहां विजयश्री का वरण किया तो हैट्रिक का तमगा भी बाहरियों के सुपुर्द हो जाएगा। इसके पहले जेड आर अंसारी और पूर्व सांसद देवी बक्स सिंह उन्नाव से हैट्रिक लगा चुके हैं। याद दिला दें एटा जिले के मूल निवासी साक्षी महाराज सूबे क़े पश्चिमी बेल्ट के मथुरा और फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के बाद वर्ष 2014 क़े लोकसभा चुनाव में उन्नाव से प्रत्याशी बनाए गए थे।

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इसके पहले समाज़वादी पार्टी ने कानपुर निवासी पूर्व मंत्री व सांसद स्व मनोहर लाल क़े पुत्र दीपक कुमार को वर्ष 1999 में चुनाव लड़ाकर सांसद बनवाया था। इसक़े बाद कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 2009 में अन्नू टंडन सांसद बनीं। कुछ लोग उन्हें भी बाहरी ही मानते हैं। यह बात अलग है कि नगर क्षेत्र क़े धवन रोड पर उनका मायका है। साल 2014 से साक्षी महाराज कलम, कमंडल और तलवार की धरती पर अपना अधिपत्य जमाए हैं। विरोधी दल इस बार इस मुद्दे को जनता क़े बीच प्रमुखता से उछाल रहे हैं।

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उन्नाव में लोकसभा चुनाव के संभावित उम्मीदवारों द्वारा नामजदगी का एलान किए जाने क़े साथ ही अर्से से अनुमानों का गहराया चुनावी धुंधलका अब यहां छंटने लगा है। अब तक उन्नाव लोकसभा क्षेत्र से इंडिया और एनडीए क़े अलावा बहुजन समाज पार्टी द्वारा अपने प्रत्याशियों के द्वारा नामांकन पत्र खरीद लिए गए हैं।

एनडीए क़े प्रमुख घटक भाजपा ने निवर्तमान सांसद साक्षी महाराज को तीसरी बार प्रत्याशी बनाया है जबकि इंडिया क़े प्रमुख दल समाज़वादी पार्टी ने पूर्व सांसद अन्नू टंडन को इस बार मौका दिया है। कांग्रेस छोड़कर आई टंडन को सपा पूर्व में ही पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव घोषित कर चुकी है जबकि लोकसभा चुनाव में एकला चलो का उद्घोष कर चुकी बसपा प्रमुख ने यहां अशोक पांडेय को पार्टी प्रत्याशी बनाकर भले ही लड़ाई त्रिकोणात्मक बनाने की मंशा संजोई हो लेकिन राजनीतिक परिदृश्य को ध्यान में रखकर यहां हर कोई चुनावी जंग सपा और भाजपा क़े बीच ही मान रहा है।

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