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Rajasthan Assembly Elections: ये हैं राजस्थान में बीजेपी के 5 बड़े 'लड़ाके', कुछ अभी भी रणभूमि से दूर

Rajasthan Assembly Elections: राजस्थान बीजेपी के 5 ऐसे नेताओं से जो बीजेपी के चुनाव जीतने पर राजस्थान के सीएम फेस हो सकते हैं।
Written by: दीप मुखर्जी | Edited By: Yashveer Singh
October 31, 2023 16:41 IST
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ये हैं राजस्थान बीजेपी के 5 बड़े नेता (Express Image)
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राजस्थान में 25 नवंबर को वोटिंग होनी है। राज्य में इस बार बीजेपी और कांग्रेस के बीच जबरदस्त मुकाबला होने की उम्मीद है। कांग्रेस दावा कर रही है कि वो राज्य की सत्ता में लगातार दूसरी बार काबिज होकर इतिहास रच देगी जबकि बीजेपी का दावा है कि जनता अशोक गहलोत सरकार को उखाड़ फेंकेगी। बीजेपी राजस्थान के इस चुनाव को 2024 लोकसभा चुनाव से पहले गंभीरता से ले रही है। राजस्थान बीजेपी की गुटबाजी को देखते हुए पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इस बार अपना सीएम फेस भी घोषित नहीं किया है। आइए आपको रूबरू करवाते हैं राजस्थान बीजेपी के 5 ऐसे नेताओं से जो बीजेपी के चुनाव जीतने पर राजस्थान के सीएम फेस हो सकते हैं। इन चेहरों में से कुछ को अभी तक बीजेपी ने राजस्थान के चुनावी रण में नहीं उतारा है।

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वसुंधरा राजे (70), झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र

वसुंधरा राजे दो बार राजस्थान की सीएम रह चुकी हैं। वो राजस्थान में बीते 20 सालों बीजेपी का फेस हैं लेकिन इस बार पार्टी ने उन्हें अपना सीएम उम्मीदवार घोषित नहीं किया है। वसुंधरा राजे साल 2003 में पहली बार सीएम चुनी गई थीं। मध्य प्रदेश के सिंधिया परिवार से संबंध रखने वाली वसुंधरा राजे की शादी धौलपुर के राजपरिवार में हुई थी। वह पूर्व में धौलपुर से भी विधायक रह चुकी हैं लेकिन साल 2003 से वह लगातार झालरापाटन विधानसभा क्षेत्र से राजस्थान विधानसभा पहुंची हैं। सीएम बनने से पहले वसुंधरा केंद्र सरकार में मंत्री रह चुकी हैं। हालांकि साल 2018 में वसुंधरा राजे को मिली हार के बाद वह पार्टी के कार्यक्रमों में कम ही नजर आईं। यह बात सतीश पूनिया के बीजेपी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल के दौरान अकसर गौर की गई। पूनिया 2019 से 2023 तक राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष रहे।

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राजेंद्र राठौर (68), तारानगर

राजेंद्र राठौर 7 बार विधायक रह चुके हैं। वह साल 1990 से अब तक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं। इस समय वह राजस्थान विधानसभा में नेता विपक्ष हैं। छात्र जीवन से सियासत में आए राजेंद्र राठौर पहली बार साल 1970 में तक सुर्खियों में आए जब वे RUSU के अध्यक्ष चुने गए। इसके बाद उन्होंने जनता दल का दामन थाम लिया और भी 90 के दशक में बीजेपी में आ गए। राजस्थान के दिग्गज नेता भैरों सिंह शेखावत के शिष्य माने जाने वाले राजेंद्र राठौर राज्य की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के करीबी माने जाते हैं। हालांकि कुछ ही समय पहले उन्होंने कहा कि वे सीएम पद की दौड़ में नहीं हैं। इस बार वह अपनी वर्तमान चुरू सीट के बजाय तारानगर से चुनाव लड़ रहे हैं।

सतीश पूनिया (59), आमेर

2018 चुनाव में बीजेपी को शिकस्त मिलने के बाद सतीश पूनिया ने पार्टी की कमान संभाली। वो करीब तीन साल तक बीजेपी के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने कांग्रेस पर जमकर हमले किए। 2023 में सीपी जोशी को बीजेपी ने अध्यक्ष पद दिया। सतीश पूनिया इस समय राजस्थान विधानसभा में विपक्ष के डिप्टी लीडर हैं। वह एबीवीपी, युवा मोर्चा और बीजेपी की सियासत करने के बाद 2018 में पहली बार विधायक चुने गए। जब तक वह राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष रहे, उनके और वसुंधरा राजे के बीच में खटपट की खबरें आती रहीं। सतीश पूनिया प्रभावशाली जाट बिरादरी से संबंध रखते हैं। वह इस बार फिर आमेर से चुनाव लड़ रहे हैं।

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सीपी जोशी (47)

चितौड़गढ़ से दो बार के सांसद सीपी जोशी इस समय राजस्थान बीजेपी के अध्यक्ष हैं। उन्हें विधानसभा चुनाव से कुछ समय पहले ही यह दायित्व सौंपा गया। अध्यक्ष पद मिलने के बाद से सीपी जोशी लगातार राजस्थान के दौरे कर रहे हैं। वह जेपी नड्डा और अन्य सीनियर नेताओं के साथ यात्राएं कर रहे हैं। बीजेपी ने राजस्थान के रण में 7 सांसदों को उतारा है लेकिन सीपी जोशी का नाम उनमे नही हैं। सीपी जोशी सिर्फ अच्छी वजहों से ही चर्चा में नहीं हैं, चितौड़ढ़ से बीजेपी विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने उनपर टिकट कटवाने का आरोप लगाया है। आक्या की जगह नरपत सिंह राजवी को चितौड़गढ़ से टिकट दिया गया है। वो भैरों सिंह शेखावत के दामाद हैं। सीपी जोशी छात्र राजनीति के समय से कांग्रेस की स्टूडेंट विंग एनएसयूआई के सदस्य रहे हैं।

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गजेंद्र सिंह शेखावत (56)

राजस्थान में चुनावों के ऐलान के पहले से ही बार-बार गजेंद्र सिंह शेखावत को सीएम पद का उम्मीदवार बताया जा रहा है। वह इस समय केंद्र सरकार में मंत्री हैं। वह राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत के गढ़ जोधपुर से दो बार एमपी चुने जा चुके हैं। साल 2019 में उन्होंने अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को चुनाव में माद दी। साल 2018 में बीजेपी को मिली हार के बाद शेखावत राज्य में अध्यक्ष पद के लिए शीर्ष नेतृत्व की पहली पसंद थे लेकिन कहा जाता है कि वसुंधरा के ऐतराज की वजह से उन्हें पार्टी की कमान नहीं दी गई। दोनों के बीच रिश्ते खराब बताए जाते हैं। गजेंद्र सिंह शेखावत को अभी तक बीजेपी ने चुनाव मैदान में नहीं उतारा है, वह चुनाव लड़ेंगे भी या नहीं यह क्लीयर नहीं है।

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