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Lok Sabha Elections: तीसरे चरण में बिहार की पांच सीट पर कांटे का मुकाबला, वोटरों की चुप्पी से नेताओं में बेचैनी

मौजूदा समय में पांचों सीट पर राजग का कब्जा है। इसे बरकरार रखना उसके ल‍िए चुनौती है।
Written by: गिरधारी लाल जोशी
नई दिल्ली | Updated: May 06, 2024 13:28 IST
lok sabha elections  तीसरे चरण में बिहार की पांच सीट पर कांटे का मुकाबला  वोटरों की चुप्पी से नेताओं में बेचैनी
कोसी-सीमांचल की पांच लोकसभा सीट ने सभी सियासी हलचल तेज हो गई है
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तीसरे चरण में बिहार की पांच संसदीय सीट के लिए सात मई को चुनाव है। ये सीट अररिया, मधेपुरा, सुपौल, खगड़िया और झंझारपुर है। इन पांच सीट पर चुनाव प्रचार का शोर रविवार की शाम थम गया। इसके साथ ही कोसी-सीमांचल की पांच लोकसभा सीट ने सभी सियासी हलचल तेज हो गई है। मतदाताओं की चुप्पी ने सभी राजनीतिक दलों की धड़कन बढ़ा दी है।

झंझारपुर : जद (एकी) के रामप्रीत मंडल ने पिछले लोकसभा चुनाव में यहां राजद के गुलाब यादव को तीन लाख 22 हजार ज्यादा मतों के अंतर से हराया था। इस बार जद (एकी) ने फिर रामप्रीत मंडल पर ही भरोसा जताया है। लेकिन इंडिया गठबंधन ने यह सीट मुकेश सहनी की वीआइपी को दी है। सुमन कुमार महासेठ इसके प्रत्याशी हैं। गुलाब यादव पहले राजद के विधायक रह चुके हैं। उनकी पत्नी एमएलसी हैं और बेटी जिला परिषद की अध्यक्ष हैं। ऐसे में गुलाब के मैदान में आने से इंडिया गठबंधन के सुमन कुमार महासेठ की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

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मधेपुरा : जद (एकी) के दिनेशचंद्र यादव ने ही 2019 चुनाव में शरद यादव को तीन लाख से अधिक मतों से हराया था। इस बार उनका मुकाबला राजद के कुमार चंद्रदीप से है। यह समाजवादियों का गढ़ रहा है। रोम पोप का और मधेपुरा गोप का नारा हमेशा बुलंद है। ऐसे में यहां जद (एकी) को सीट बचाने और लालू यादव को अपने यादव मतदाताओं पर पकड़ मजबूत करने की चुनौती है।

अररिया : परंपरागत मतदाताओं के सहारे इस सीट पर राजद के शाहनवाज आलम जीत का सपना देख रहे हैं। वहीं भाजपा के उम्मीदवार व निवर्तमान सांसद प्रदीप सिंह को अपनी सीट बचाने की चुनौती है। 2019 चुनाव में भाजपा ने जीत हासिल की थी।

सुपौल : सुपौल में इस बार 15 प्रत्याशी हैं। यहां जद (एकी) के निवर्तमान सांसद दिलेश्वर कामत को अपनी सीट बचानी है। वहीं राजद के चंद्रहास चौपाल से इनको कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इन सबके बीच बैद्यनाथ मेहता ने निर्दलीय उतरकर दोनों की चिंता बढ़ा दी है। कई प्रकार की जमीनी चुनौतियों को झेलते सुपौल में सियासी लड़ाई भी जातियों समीकरणों के आसपास ही घूम रही हैं।

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खगड़िया : चिराग पासवान के लोजपा (रामविलास) से मैदान में उतरे राजेश वर्मा को राजग का गढ़ बचाए रखने की चुनौती है। उनकी माकपा के संजय कुशवाहा से टक्कर है। यहां बाहरी और स्थानीय की हवा है।

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राजेश को लोग बाहरी और संजय को स्थानीय बता रहे हैं। बीते चुनाव में लोजपा के महबूब अली कैसर ने दो लाख 48 हजार मतों से जीत हासिल की थी। इस बार यहां सियासी समीकरण बदला है। दोनों ओर से नए प्रत्याशी हैं। लोजपा (र) का टिकट नहीं मिलने से चौधरी महबूब अली कैसर ने राजद की लालटेन थाम ली है। जद (एकी) की पूर्व सांसद रेणु कुशवाहा ने भी राजद की सदस्यता ले ली है। ऐसे में अब देखना है जनता इस बार किस पर विश्वास करती है।

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