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Rajasthan: गहलोत ने बनाया 'महाराणा' वाला प्लान! बीजेपी को हो सकता है बड़ा नुकसान

राजस्थान का मेवाड़ रीजन RSS के चितौड़ प्रांत में आता है। यह दशकों से बीजेपी का गढ़ बना हुआ है।
Written by: दीप मुखर्जी | Edited By: Yashveer Singh
Updated: May 24, 2023 09:26 IST
rajasthan  गहलोत ने बनाया  महाराणा  वाला प्लान  बीजेपी को हो सकता है बड़ा नुकसान
राजस्थान में गहलोत सरकार महाराणा बोर्ड का गठन करने जा रही है (File Phtoto- Express)
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राजस्थान में इस साल के अंत में विधानसभा चुनाव होना है। विधानसभा चुनाव से पहले राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (CM Ashok Gehlot) अपने विरोधियों को हाशिए पर पहुंचाने के लिए लगातार 'शतरंज की चालें' चल रहे हैं। अब अशोक गहलोत ने राजस्थान में बेहद प्रभावशाली माने जाने वाली राजपूत जाति के वोटों को आकर्षित करने के लिए 'महाराणा कार्ड' खेला है।

महाराणा प्रताप भले ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हों लेकिन 16वीं सदी का यह योद्धा राजस्थान में आज भी प्रासंगिक है और एक सियासी विषय है। अब राजस्थान में कांग्रेस पार्टी पारंपरिक रूप से बीजेपी का गढ़ रहे मेवाड़ में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाह रही है। गुलाब चंद कटारिया को असम का राज्यपाल नियुक्त करने के बाद राजस्थान की राजनीति में उनके स्थान को भरना बीजेपी के लिए बड़ा चैलेंज होगा। बस कांग्रेस इसी का फायदा उठाना चाहती है।

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पिछले कुछ सालों में महाराणा प्रताप की विरासत को लेकर बीजेपी और कांग्रेस में संघर्ष देखने को मिला है। महाराणा और अकबर के बीच हल्दी घाटी का युद्ध पूरी दुनिया में विख्यात है। सोमवार को अशोक गहलोत ने घोषणा की कि उनकी सरकार राज्य के युवाओं को महाराणा की बहादुरी से अवगत कराने के लिए वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप बोर्ड का गठन करेगी।

गहलोत को बीजेपी ने बताया मुगल प्रेमी

राजस्थान सीएमओ द्वारा जारी किए गए स्टेटमेंट में कहा गया कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप बोर्ड युवा पीढ़ी को महाराणा प्रताप की वीरता से रूबरू कराएगा। यह बोर्ड कोर्स कंटेंट, विरासत संरक्षण, नए निर्माण, विभिन्न भाषाओं पर रिसर्च, प्रकाशनों का प्रचार, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, व्याख्यान, कवि सम्मेलन आदि के लिए एक प्लान तैयार करेगा।

राजपूतों की एक संस्था मेवाड़ क्षत्रिय महासभा द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को विरासत के रूप में वीरता की इस गौरवशाली गाथा को सौंपना वर्तमान पीढ़ी का कर्तव्य है। अशोक गहलोत जिस समय इस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे, उस समय राज्य भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सीपी जोशी भी ऐसे ही मिलते-जुलते कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे थे।

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इस दौरान उन्होंने अशोक गहलोत पर जमकर हमला किया। उन्होंने गहलोत सरकार पर निशाना साधते हुए उन्हें "मुगल प्रेमी" सरकार करार दिया और कहा कि कांग्रेस अकबर का "महिमामंडन" करती है। बीजेपी ने कांग्रेस पर इतिहास की किताबों से महाराणा प्रताप को मिटाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।

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बीजेपी का गढ़ है मेवाड़

राजस्थान का मेवाड़ रीजन RSS के चितौड़ प्रांत में आता है। यह दशकों से बीजेपी का गढ़ बना हुआ है। बीजेपी से पहले यहां जन संघ की मौजूदगी थी। साल 2018 में भले ही कांग्रेस को यहां विधानसभा चुनाव में जीत मिली हो लेकिन कांग्रेस को उदयपुर जिले की 8 में से सिर्फ 2 सीटों पर जीत नसीब हुई। बीजेपी यहां बाकी सीटों को जीतने में सफल रही।

राजपूत राज्य की जनसंख्या में 11 से 12 फीसदी होने का दावा करते हैं। मेवाड़ क्षेत्र और राज्य के कई अन्य इलाकों में उनकी चुनावी ताकत महसूस की जा सकती है। साल 2018 में कांग्रेस को मेवाड़ छोड़ हर जगह लाभ हुआ था। तब क्षत्रिय समुदाय वसुंधरा के खिलाफ बेहद नाराज था। राज्य में गैंगस्टर आनंदपाल की पुलिस शूट ऑउट में मौत, जसवंत सिंह को साइड लाइन किए जाना और विरोध प्रदर्शनों के बा राजपूत नेताओं पर पुलिस केस इसकी बड़ी वजहों में शामिल थीं।

पिछले एक दशक में राजस्थान में पाठ्यपुस्तकों में संशोधन देखा गया है। यहां कांग्रेस से पहले बीजेपी की सरकार में स्कूल की किताबों में यह बदलाव किया गया कि महाराणा ने हल्दी घाटी के युद्ध में अकबर को हराया। इतना ही नहीं, अकबर के नाम के आगे से किताबों में मौजूद 'महान' शब्द हटा दिया गया। इसके बाद साल 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने पर एक कमेटी बनाई गई, जिसमें किताबों में किए गए बदलाव की समीक्षा की गई।

इस समीक्षा के बाद किए गए बदलावों के बाद एकबार फिर से विवाद पैदा हुआ। इसमें एक बड़ी वजह हल्दी घाटी के युद्ध को लेकर किया गया बदलाव था। कक्षा 10 सोशल साइंस की नई किताबों में कहा गया है कि महाराणा प्रताप ने युद्ध के मैदान को छोड़ दिया और उनके घोड़े चेतक की मृत्यु हो गई।

किताबों में यह भी कहा कि महाराणा और अकबर के बीच का संघर्ष धार्मिक युद्ध नहीं था बल्कि दो सियासी ताकतों के बीच श्रेष्ठता के लिए संघर्ष था। नई किताबों में युद्ध के परिणाम का जिक्र नहीं किया गया बल्कि यह जरूर बताया गया कि बाद के वर्षों तक अकबर के खिलाफ महाराणा गुरिल्ला युद्ध करते रहे। इन बदलाों के बाद बीजेपी ने कांग्रेस पर महाराणा की बेइज्जती करने का आरोप लगाया जबकि कांग्रेस ने बीजेपी पर महाराणा के नाम पर सियासत करने का आरोप लगाया।

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