scorecardresearch
For the best experience, open
https://m.jansatta.com
on your mobile browser.

Rajasthan Elections: गुर्जर बेल्ट में कांग्रेस को होगा नुकसान! गहलोत-पायलट विवाद बना मुसीबत की वजह, फायदा उठाने के लिए BJP ने बनाई रणनीति

Sachin Pilot Dispute Ashok Gehlot: कांग्रेस हाईकमान के साथ अशोक गहलोत और सचिन पायलट भले कह रहे हैं कि राजस्थान कांग्रेस में सब कुछ ठीक है, लेकिन पायलट समर्थक और गुर्जर समाज अभी कांग्रेस पार्टी से नाराज बताया जा रहा है।
Written by: HAMZA KHAN
Updated: November 22, 2023 17:49 IST
rajasthan elections  गुर्जर बेल्ट में कांग्रेस को होगा नुकसान  गहलोत पायलट विवाद बना मुसीबत की वजह  फायदा उठाने के लिए bjp ने बनाई रणनीति
Rajasthan Polls: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, वरिष्ठ कांग्रेस नेता पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट और बीजेपी की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया। (फोटो सोर्स: FILE/PTI)
Advertisement

Sachin Pilot Dispute Ashok Gehlot: राजस्थान विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार अभियान गुरुवार शाम को 6 बजे थम जाएगा। राज्य में 25 नवंबर को मतदान होगा, और 3 दिसंबर को नतीजे आएंगे, लेकिन उससे पहले कांग्रेस को लेकर तमाम ऐसे सवाल हैं, जो उसका पीछा नहीं छोड़ते। उन्हीं में से एक मुद्दा है अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच की रस्साकशी का, जो काफी दिनों तक चला। यहां तक की दोनों नेताओं को समझाने के लिए कांग्रेस हाईकमान को कई बैठकें करनी पड़ीं। एक वक्त ऐसा भी लगा कि सचिन पायलट पार्टी से इस्तीफा दे देंगे, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब अशोक गहलोत और सचिन पायलट राज्य में एक बार फिर से सत्ता वापसी के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सचिन पायलट और गहलोत के बीच पैदा हुई खाई को अब बीजेपी भुनाना चाहती है।

बीजेपी ने 10 तो कांग्रेस ने 11 गुर्जर प्रत्याशी मैदान में उतारे

2018 में गुज्जर समुदाय ने पायलट के पीछे रैली की थी, जिसमें कांग्रेस के 8 गुर्जर विधायक चुने गए थे और भाजपा का कोई भी विधायक नहीं था। इस बार भाजपा और कांग्रेस के बीच गुज्जर उम्मीदवारों को टिकट देने के मामले में बराबरी की स्थिति है। जहां बीजेपी ने 10 तो वहीं कांग्रेस ने 11 गुर्जर प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। भाजपा अपने पक्ष में इस समुदाय पर खासकर पूर्वी राजस्थान में भरोसा कर रही है, जहां पायलट का प्रभाव गुज्जर समुदाय से कहीं आगे तक जाता है।

Advertisement

इस योजना पर बीजेपी लंबे वक्त से काम कर रही है। इसी साल जनवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भीलवाड़ा में गुर्जर देवता देवनारायण के 1,111वें 'अवतरण महोत्सव' के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम को संबोधित किया। उस कार्यक्रम में बीजेपी की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे मौजूद नहीं थीं। जिसकी सबसे बड़ी यह थी कि राजस्थान में गुर्जरों का हिंसक आरक्षण हुआ था। जिसमें 70 से ज्यादा गुर्जर मारे गए थे।

गुर्जर समुदाय तक पहुंचने की कोशिश कर ही बीजेपी

इन सब मुद्दों के बीच एक बीजेपी नेता का कहना है, ''पार्टी साफ-सुथरी छवि के साथ गुर्जर समुदाय तक पहुंचने की कोशिश कर रही है और यह नतीजों में दिखेगा।''

भाजपा का आत्मविश्वास जमीन पर दिख रहा है। दौसा जिले के मित्रपुरा में पायलट इस गुर्जर बहुल सीट से सांसद हुआ करते थे। सचिन के माता-पिता राजेश और राम भी यहां से प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। यहां एक गुर्जर परिवार के तीन लोगों ने कांग्रेस द्वारा पायलट के अपमान की आलोचना की।
52 वर्षीय उमर सिंह गुर्जर कहते हैं, 'हमने तन, मन, धन से कांग्रेस पार्टी की मदद की, वोट भी दिया, लेकिन पार्टी ने पायलट के साथ धोखा किया।'

Advertisement

पायलट के समर्थन ने 2018 में कांग्रेस के कई अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों को जीत के निशान से आगे बढ़ाया था, इसके बावजूद कि मीना (जो एसटी हैं) और गुज्जरों को पारंपरिक जाति प्रतिद्वंद्वी माना जाता है।

Advertisement

सुमेर का कहना है कि समुदाय अब भी गजराज खटाना और मुरारी लाल मीना का समर्थन कर रहा है, लेकिन कांग्रेस के मौजूदा मंत्रियों परसादी लाल मीना, ममता भूपेश (एससी) और विधायक ओपी हुड़ला (एसटी) सहित अन्य को गुर्जर समर्थन पर संदेह है।

वो कहते हैं कि हाल ही में परसादी लाल की टिप्पणी से गुर्जर-मीणा का रिश्ता जो कुछ बचा है, वह और तनावपूर्ण हो गया। सचिन पायलट, राजेश पायलट को हमने अपनाया। 1984 से पहले उन्हें कोई नहीं जानता था। मैं अकेला मीना नेता था जो उनके साथ था और पार्टी ने जिसे भी कहा, उसका समर्थन किया - चाहे वह सचिन हों, राजेश हों या रमा पायलट हों।'

गहलोत गुट के नेताओं से गुर्जर समाज नाराज

सितंबर में सवाई माधोपुर के कांग्रेस विधायक और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के सलाहकार दानिश अबरार को अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में पायलट मुद्दे पर गुस्से का खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने पायलट के 2020 के विद्रोह के दौरान गहलोत का पक्ष लिया था, जब तत्कालीन डिप्टी सीएम सचिन पायलट और 18 अन्य विधायक बीजेपी शासित हरियाणा के होटलों में ठहरे हुए थे। हालांकि, पायलट के पास अलग होकर पर्याप्त संख्या बल नहीं था।

गुर्जर देवता देवनारायण के सम्मान में एक कार्यक्रम के लिए सवाई माधोपुर का दौरा करने के दौरान अबरार को पायलट समर्थकों के गुस्से का सामना करना पड़ा। सचिन पायलट के समर्थकों ने अबरार के खिलाफ नारे लगाते हुए कहा- पायलट के गद्दारों को गोली मारो…? अबरार को अशोक गहलोत के गुट का माना जाता है। वहीं निवाई विधायक प्रशांत बैरवा को भी सचिन पायलट के समर्थकों के विरोध का सामना करना पड़ा।

दौसा के खेरली गांव में 26 वर्षीय पिता-पुत्र निहाल सिंह गुर्जर और अजय सिंह का कहना है कि अगर कांग्रेस ने गहलोत और पायलट को सीएम के रूप में 2.5-2.5 साल का फॉर्मूला लागू किया होता तो कांग्रेस को फायदा होता, लेकिन इस संबंध में आलाकमान की कोशिशों को गहलोत ने लगातार विफल किया। पिछले साल, गहलोत के वफादार सीएलपी बैठक से भी बाहर रहे थे, जिसके बारे में समझा जाता है कि पायलट को सीएम पद के लिए चुनने के लिए दिल्ली ने बैठक बुलाई थी।

गर्जर समाज की गहलोत से नाराजगी का बीजेपी उठाएगी फायदा

निहाल का कहना है कि वे इस बार भूपेश को वोट नहीं देंगे, भले ही पायलट खुद मंत्री के लिए प्रचार करें। सिकराय से विधायक मंत्री भूपेश से नाराजगी है। निहाल कांग्रेस को पायलट को खुले तौर पर "नाकारा निकम्मा" कहे जाने के लिए "सबक" सिखाना चाहते हैं, जैसा कि गहलोत ने एक से अधिक बार कहा है।

गुर्जर बेल्ट में बदलाव की बयार के पीछे एक और कारण भी है। गुर्जर आरक्षण आंदोलन के सूत्रधार किरोड़ी सिंह बैंसला के बेटे विजय बैंसला दौसा से सटे टोंक जिले के देवली उनियारा विधानसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं।

टोंक पायलट का अपना विधानसभा क्षेत्र। जहां ढाई लाख के करीब मतदाता हैं। जिसमें पुरुष वोटर एक लाख 29 हजार हैं. वहीं महिलाओं की संख्या एक लाख 22 हजार 871 है। जातिगत समीकरण की बात करें तो गुर्जर मतदाताओं की संख्या 45 हजार, मुस्लिम 70 हजार और दलित वोटरों की संख्या 80 हजार है। यह गठजोड़ किसी भी सियासी रणनीति को ध्वस्त कर सकता है। यहां मुस्लिम भी कांग्रेस से नाराज हैं। मुस्लिम समुदाय की निराशा कांग्रेस की चुप्पी से पैदा हो रही है। हालांकि, वे पायलट को काफी हद तक माफ कर रहे हैं।

इसी साल अगस्त में टोंक की यात्रा के दौरान, पायलट को कांग्रेस अल्पसंख्यक सेल के राजस्थान समन्वयक मोहसिन रशीद ने घेर लिया था। जिन्होंने उनसे पूछा था कि उन्होंने दो मुस्लिम युवाओं की हत्या का जिक्र करते हुए नासिर-जुनैद मामले पर क्यों नहीं बोला था। उन्होंने जयपुर बम विस्फोट के आरोपियों को हाई कोर्ट द्वारा बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ कांग्रेस द्वारा सुप्रीम कोर्ट जाने को लेकर पायलट से सवाल किया।

चुनाव नजदीक आते ही 42 साल के रशीद ने भी अपनी दावेदारी पेश की, जिनके सोशल मीडिया पर काफी फॉलोअर्स हैं। उनका कहना है कि बाद में "समुदाय के बुजुर्गों" की सलाह पर और पायलट खेमे के भरोसे के बाद वो चुनाव लड़ने से पीछे हट गए।

रशीद अभी भी समुदाय को प्रभावित करने वाले मुद्दों पर पायलट की मौन प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं, जिसमें भाजपा टोंक जिला प्रभारी और विवादास्पद नेता रमेश बिधूड़ी का हालिया बयान भी शामिल है, जिसमें उन्होंने टोंक विधानसभा को लेकर पाकिस्तान (लाहौर) तक का जिक्र किया।
हालांकि, टोंक की सड़कों पर जो सामान्य बात है, वो यह है कि पायलट मुस्लिम रूख अपनाने और हिंदुओं को दूर करने का जोखिम नहीं उठा सकते। जैसे कि मुस्लिम समाज चाहता है।

'मुसलमानों के पास कांग्रेस के अलावा कोई विकल्प नहीं'

टोंक के काफिला बाजार में दुकान चलाने वाले 32 वर्षीय अनवर कहते हैं, ''बिधूड़ी को तनाव भड़काने के लिए भेजा गया है और अगर पायलट बोलते हैं, तो वह उनके (हिंदू) वोट खो सकते हैं।'' उन्होंने यह भी कहा कि पायलट को वोट देना उनकी 'मजबूरी' है। पास में एक चाय की दुकान पर एक समूह के बीच, 45 वर्षीय आरिफ कहते हैं कि मुसलमानों के पास कांग्रेस के अलावा कोई विकल्प नहीं है। "हम और कहां जाएंगे?"

टोंक सीट कब, किसके पाले में रही?

टोंक में मतदाताओं की बात करें तो इस सीट पर सबसे बड़ा हिस्सा एससी, उसके बाद गुर्जर और फिर जाट, एसटी और ऊंची जातियां हैं। जबकि पायलट की उम्मीदवारी इसे अब कांग्रेस के लिए एक सुरक्षित सीट बनाती है। 1980 में भाजपा के गठन के बाद से इसने कांग्रेस और भाजपा को लगभग समान रूप से वोट दिया है- 1980, 1990, 1993, 2003 और 2013 यह सीट बीजेपी के कब्जे में रही, जबकि 1985, 1998, 2008 और 2018 में यहां कांग्रेस ने कब्जा जमाया।

पिछले चुनाव में पायलट ने बीजेपी यूनुस खान को दी थी मात

पिछली बार के विधानसभा चुनाव में पायलट ने भाजपा के यूनुस खान के खिलाफ 54,000 से अधिक वोटों से जीत हासिल की थी। हालांकि पायलट के दोबारा जीतने की उम्मीद है। भले ही इतनी आसानी से नहीं, लेकिन कट्टर गुर्जर समर्थकों का भी मानना है कि जयपुर में सरकार बदल सकती है। उनमें से एक राम गुर्जर का कहना है कि कांग्रेस को संशोधन करना चाहिए और अगर भाजपा जीतती है तो पायलट को कम से कम विपक्ष के नेता या पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नामित करना चाहिए।

2013 में टोंक से जीतने वाले भाजपा उम्मीदवार अजीत सिंह मेहता पायलट को "बाहरी व्यक्ति" कहते हैं। वो कहते हैं कि पायलट ने मेरे कार्यकाल के दौरान किए गए सभी कार्यों को बर्बाद कर दिया। पायलट को यह नहीं पता कि किस गांव में पानी या बिजली की समस्या है। या फिर पीएचसी और सीएचसी के बारे में।

वो 2019 में गांधी परिवार के गढ़ में राहुल गांधी को हराकर वरिष्ठ भाजपा नेता स्मृति ईरानी की तरह अमेठी में उलटफेर करने की बात करते हैं। मेहता कहते हैं, ''आज, राजा गर्भ से पैदा नहीं होते… लोग फैसला करते हैं।'' वो कहते हैं कि पायलट 2018 में सीएम का चेहरा थे, लेकिन इस बार गहलोत ने कहा है कि कुर्सी उन्हें नहीं छोड़ेगी। इसलिए पायलट विधायक का चुनाव लड़ रहे हैं और मैं भी। इसके बाद वो कहते हैं कि पायलट एक ऐसे वेता हैं, जिन्होंने अपनी ही पार्टी के खिलाफ विद्रोह किया था।

चाय की दुकान चलाने वाले 63 साल के अब्दुल रईस कहते हैं कि कोई भी पार्टी वास्तव में हमारी मदद नहीं करती है, लेकिन हम चाहते हैं कि कांग्रेस सत्ता में आए… हम सिर्फ शांति से रहना चाहते हैं, टोंक में हमारे लिए यही एकमात्र मुद्दा है।

Advertisement
Tags :
Advertisement
tlbr_img1 राष्ट्रीय tlbr_img2 ऑडियो tlbr_img3 गैलरी tlbr_img4 वीडियो