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Rajasthan Elections: बानसूर सीट पर मुकाबला त्रिकोणीय, कांग्रेस-बीजेपी का अपना दावा, जानिए क्या कहता है इस सीट का इतिहास; BJP ने देवी सिंह शेखावत को क्यों बनाया प्रत्याशी

Devi Singh Shekhawat Biography: भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे देवी सिंह शेखावत पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। उन्होंने कहा कि बानसूर से उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। यह निश्चित है कि यह जीत एक तरफा जीत होगी।
Written by: vivek awasthi
Updated: November 18, 2023 20:53 IST
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Rajasthan Elections: बानसूर विधानसभा से बीजेपी प्रत्याशी देवी सिंह शेखावत प्रचार अभियान के दौरान। (फोटो सोर्स: @DeviSinghBJP)
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Bansur Seat: राजस्थान में विधानसभा चुनाव के लिए 25 नवंबर को मतदान होना है। यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं हर बार के चुनाव में यहां पर सरकार भी बदल जाने की परंपरा सी बन गई है, लेकिन इस बार के चुनाव कांग्रेस और बीजेपी के अपने-अपने दावे हैं। अगर हम अलवर लोकसभा क्षेत्र के बानसूर विधानसभा सीट की बात करें तो यहां मामला त्रिकोणीय बनता नजर आ रहा है।

बानसूर सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला-

बानसूर सीट से भाजपा के पूर्व मंत्री रहे डॉक्टर रोहतास शर्मा के आजाद समाज पार्टी से चुनाव लड़ने के बाद यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है। यहां पर कांग्रेस ने वर्तमान विधायक और राजस्थान सरकार में मंत्री शकुंतला रावत को टिकट दिया है। वहीं भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़े और नगर विकास न्यास अलवर के पूर्व अध्यक्ष देवी सिंह शेखावत को टिकट दिया है। कांग्रेस पार्टी यहां राजस्थान सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं और बानसूर विधानसभा क्षेत्र में कराए गए विकास कार्यों को लेकर चुनाव मैदान में है।

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कांग्रेस विधायक का विकास कार्यों का दावा-

वहीं भारतीय जनता पार्टी सहित अन्य प्रत्याशी बानसूर इलाके में बढ़ते अत्याचार ,लूटपाट, फायरिंग जैसी घटनाओं सहित कई मुद्दों को लेकर चुनाव मैदान में उतरी हैं। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही राजस्थान सरकार की मंत्री रहीं शकुंतला रावत ने कहा कि टिकट मांगने का सबको अधिकार है और सब को चुनाव लड़ना चाहिए, लेकिन विकास कार्यों को देखते हुए कांग्रेस का साथ देना चाहिए।

बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ देवी सिंह शेखावत का दावा-

भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे देवी सिंह शेखावत पिछली बार निर्दलीय चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। उन्होंने कहा कि बानसूर से उन्हें अच्छा रिस्पांस मिल रहा है। यह निश्चित है कि यह जीत एक तरफा जीत होगी। बानसूर का जिक्र करते उन्होंने कहा कि बानसूर इलाका इस वक्त आतंक की इलाके की तरह जाना जाता है। जहां गोलियां चलना आम बात है। यहां आतंक का माहौल है।

देवी सिंह शेखावत ने कहा कि मेरे जीतने के बाद यहां पर बदमाशों का इलाज किया जाएगा। हम लोगों को अमन चैन से रहने की वह गारंटी देते हैं। उन्होंने कहा कि 36 कौम की सुरक्षा, गरीबों का, व्यापारियों का भविष्य संवारना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

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2018 के विधानसभा चुनाव में किस प्रत्याशी को कितने वोट मिले-

2018 के चुनाव में बानसूर विधानसभा सीट के चुनावी परिणाम को देखें तो यहां पर 12 उम्मीदवारों के बीच खासकर तीन प्रत्याशियों के बीच कांटे की टक्कर रही। कांग्रेस की शकुंतला रावत को 65,656 वोट मिले तो निर्दलीय प्रत्याशी देवी सिंह शेखावत के खाते में 47,736 वोट आए। चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के महेंद्र सिंह यादव तीसरे नंबर पर रहे। उन्हें 44,226 वोट मिले। शकुंतला रावत ने 17,920 (10.8%) मतों के अंतर से जीत हासिल की।

बानसूर सीट पर कुल कितने मतदाता-

2018 के चुनाव में बानसूर विधानसभा सीट पर कुल 2,16,308 मतदाता थे, जिसमें पुरुष मतदाता की संख्या 1,15,601 थी तो महिला मतदाता की संख्या 1,00,707 थी, इसमें से कुल 1,66,485 (77.9%) मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। 1,966 (0.9%) मतदाताओं ने नोटा (NOTA) का बटन दबाया था।

बानसूर सीट का राजनीतिक इतिहास-

बानसूर विधानसभा सीट के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो इस सीट पर अभी कांग्रेस का कब्जा है। कांग्रेस की शंकुतला रावत 2013 से यहां विधायक हैं। 2013 के चुनाव में शकुंतला रावत ने बीजेपी के रोहिताश कुमार को हराया था, जबकि 2018 के चुनाव में शकुंतला रावत ने निर्दलीय उम्मीदवार देवी सिंह शेखावत को मात दी, लेकिन 2013 की तुलना में 2018 में हार-जीत का अंतर कम हो गया था। 2008 में हुए चुनाव में कांग्रेस की शकुंतला रावत को हार का मुंह देखना पड़ा था। तब भाजपा के रोहिताश कुमार ने शकुंतला रावत को शिकस्त दी थी। 2003 में यह सीट कांग्रेस के पास ही थी, जबकि 1998 में बसपा के जगत सिंह दयामा जीत हासिल की थी।

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