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Rajasthan Assembly Result: वो दो निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी जो बीजेपी-कांग्रेस से भी चल रहे आगे, जानिए कौन हैं?

Rajasthan Assembly Result: राजस्थान में दो मुस्लिम निर्दलीय प्रत्याशी बीजेपी और कांग्रेस से आगे चल रहे हैं।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: December 03, 2023 13:49 IST
rajasthan assembly result  वो दो निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी जो बीजेपी कांग्रेस से भी चल रहे आगे  जानिए कौन हैं
Rajasthan Assembly Result: निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी यूनुस खान। (फोटो सोर्स: @Yoonus_khan62)
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Rajasthan Assembly Result: राजस्थान विधानसभा चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिल गया है। खबर लिखे जाने तक बीजेपी 114 और कांग्रेस 70 सीटों पर आग चल रही है। अगर यही रुझान नतीजों में तब्दील होते हैं तो गहलोत सरकार का सत्ता से बेदखल होना तय है।

राजस्थान में 15 निर्दलीय प्रत्याशी भी आगे चल रहे हैं। उनमें दो निर्दलीय मुस्लिम प्रत्याशी भी शामिल हैं। इन दोनों प्रत्याशियों के नाम हैं मुख्तार अहमद और युनूस खान। मुख्तार अहमद भरतपुर जिले की कामां विधानसभा सीट से 17748 सीट से आगे चल रहे हैं, जबकि युनूस खान डीडवाना विधानसभा क्षेत्र से 20 हजार से ज्यादा मतों से आगे चल रहे हैं।

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भरतपुर जिले की कामां विधानसभा सीट मुस्लिम बाहुल्य हैं। भाजपा के नौक्षम चौधरी और कांग्रेस की जाहिदा खान यहां से मैदान में हैं। त्रिकोणीय मुकाबले में मुख्तार अहमद आगे चल रहे हैं। साल 2018 में जाहिदा खान ने लगभग 40 हजार से अधिक मतों से चुनाव जीता था, लेकिन इस बार वह पीछे चल रही हैं। भाजपा ने हरियाणा के मेवात की रहने वाली नौक्षम चौधरी को पार्टी प्रत्याशी के तौर पर चुनावी मैदान में उतारा था।

वसुंधरा के करीबी हैं यूनूस खान

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के काफी करीबी माने जाने वाले और बीजेपी के इकलौते मुस्लिम चेहरा रहे यूनूस खान ने पार्टी से टिकट न मिलने पर निर्दलीय पर्चा भरा था। पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने यूनुस खान को सचिन पायलट के सामने टोंक सीट से मुकाबला करने के लिए चुनावी मैदान में उतारा था। हालांकि खान पायलट से चुनाव हार गए थे। युनूस खान पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार में परिवहन मंत्री रह चुके हैं।

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राजस्थान में हुए विधानसभा चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने पार्टी प्रत्याशियों को चिंता में डाल रखा था। दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और बीजेपी ने बागियों को मनाने का खूब प्रयास किया। कुछ विधानसभा सीटों पर बागियों को मनाने में कामयाब रहे, लेकिन अधिकतर जगहों पर बागी चुनाव मैदान में डटे रहे। इनमें से कई सीटों पर बागी पार्टी प्रत्याशियों की जीत का गणित बिगाड़ दिया है।

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