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टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में हमेशा रहा रियासत का दबदबा

गढ़वाल की जनता टिहरी रियासत के राजा को भगवान बद्री विशाल का प्रतिरूप मानती है और उनके परिवार के सदस्य को बद्री विशाल के प्रतिनिधि के रूप में देखती है।
Written by: सुनील दत्त पांडेय | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: March 09, 2024 06:51 IST
टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में हमेशा रहा रियासत का दबदबा
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -सोशल मीडिया)।
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उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में हमेशा से टिहरी राजघराने का दबदबा रहा है। उत्तराखंड में आजादी के बाद 1952 में देश के साथ आम चुनाव हुए थे। तब टिहरी रियासत की रानी पहली महिला उम्मीदवार कमलेंदुमति शाह चुनी गई थीं। तब से इस सीट पर ज्यादातर टिहरी राजघराने का ही कब्जा चला आ रहा है।

1952 के पहले लोकसभा चुनाव के 60 साल बाद 2012 टिहरी संसदीय क्षेत्र में उपचुनाव में भाजपा के टिकट पर टिहरी राजघराने की बहू रानी राज्यलक्ष्मी शाह लोकसभा में टिहरी गढ़वाल सीट से दूसरी महिला सांसद चुनी र्गइं और संसद में पहुंचीं। उसके बाद टिहरी रियासत की मौजूदा रानी राज्य लक्ष्मी शाह ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 2014 तथा 2019 में रानी राज्यलक्ष्मी शाह भाजपा की टिकट पर लगातार चुनाव जीतती रहीं।

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2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा उम्मीदवार रानी राज्य लक्ष्मी शाह ने कांग्रेस नेता विजय बहुगुणा के बेटे साकेत को फिर से चुनाव में पटकनी दी। भाजपा के टिकट पर 1991 से लेकर 2007 तक टिहरी के राजा मानवेंद्र शाह लगातार इस सीट पर चुनाव जीतते रहे हैं। वर्ष 2007 में राजा मानवेंद्र शाह के निधन के बाद कांग्रेस के टिकट पर विजय बहुगुणा टिहरी से उपचुनाव लड़े और उन्होंने राजा मानवेंद्र शाह के बेटे यजुवेंद्र शाह को चुनाव में पराजित किया।

मगर 2012 में जब बहुगुणा मुख्यमंत्री बन गए और कांग्रेस सरकार के मुखिया बने। तब उन्होंने इस सीट पर अपने बेटे साकेत बहुगुणा को लोकसभा का उपचुनाव लड़ाया। तब बहुगुणा मुख्यमंत्री रहते हुए अपने बेटे साकेत को टिहरी राजघराने की रानी और भाजपा उम्मीदवार रानी राजलक्ष्मी शाह के मुकाबले चुनाव जिताने में नाकाम रहे।

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राज्यलक्ष्मी शाह ने पहली बार संसद में अपनी दस्तक दी और फिर से इस सीट पर टिहरी राजघराने का कब्जा हो गया और जो अब तक चला आ रहा है। भाजपा हाई कमान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में रानी राज्य लक्ष्मी को चौथी बार भाजपा का टिकट देकर टिहरी रियासत पर भरोसा जताया है। दरअसल, टिहरी रियासत का गढ़वाल मंडल में विशेष महत्त्व है।

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गढ़वाल की जनता टिहरी रियासत के राजा को भगवान बद्री विशाल का प्रतिरूप मानती है और उनके परिवार के सदस्य को बद्री विशाल के प्रतिनिधि के रूप में देखती है। यही भावना जनता की टिहरी की रानी राज्यलक्ष्मी शाह के प्रति है। इसलिए टिहरी संसदीय क्षेत्र की जनता टिहरी राजघराने के उम्मीदवार को किसी दल के उम्मीदवार के रूप में नहीं बल्कि भगवान बद्री विशाल के प्रतिनिधि के रूप में अपना वोट डालती हैं।

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