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बीजेपी से ज्यादा तो प्रशांत किशोर कर रहे राहुल पर हमले, क्या मायने निकाले जाएं

एक तरफ प्रशांत किशोर इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी पर सवालों की बौछार छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी को लेकर उनका पक्ष कुछ नरम दिखाई देता है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | Updated: April 09, 2024 15:18 IST
बीजेपी से ज्यादा तो प्रशांत किशोर कर रहे राहुल पर हमले  क्या मायने निकाले जाएं
प्रशांत किशोर के हमलों के मायने
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लोकसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हो चुका है। एक तरफ अगर प्रधानमंत्री मोदी तीसरी बार सत्ता में लौटने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ एकजुट विपक्ष भी कड़ी टक्कर देने की कोशिश में है। इस बार बीजेपी का विजय रथ रोकने के लिए विपक्ष ने इंडिया गठबंधन बना डाला है, कई छोटे और बड़े दल साथ आए हैं, लेकिन अभी तक चेहरे को लेकर कोई फैसला नहीं हुआ है।

कांग्रेस जरूर राहुल गांधी को अभी भी आगे कर रही है, लेकिन किसी भी नाम पर आम सहमति इंडिया गठबंधन में बनती नहीं दिख रही। इस बीच रणनीतिकार प्रशांत किशोर का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। कहने को समय-समय पर उनकी तरफ से विपक्ष को सुझाव दिए जाते हैं, लेकिन इस बार जिस अंदाज में उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को घेरा है, उसके अलग ही मायने निकाले जा रहे हैं।

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असल में प्रशांत किशोर ने राहुल गांधी की रणनीति पर सवाल उठा दिए हैं। उनका मानना है कि जिस तरह से भारत जोड़ने यात्रा के लिए मेघालय और मणिपुर जैसे राज्य को चुना गया, इसे प्रशांत किशोर गलत रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण मानते हैं। पीटीआई से बात करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि कांग्रेस ये कैसे भूल सकती है कि उसकी लड़ाई उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में है, लेकिन वो मणिपुर और मेघालय का दौरा कर रहे हैं। इस तरह से सफलता कैसे मिल सकती है, अगर यूपी और बिहार में नहीं जीते तो वायनाड में जीतने का भी कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। पीके ने तो यहां तक कह दिया है कि अगर राहुल गांधी ने अमेठी से चुनाव नहीं लड़ा, इसका काफी गलत संदेश देश की जनता के सामने जाने वाला है।

राहुल गांधी पर अपने हमले को बरकरार रखते हुए पीके ने कहा कि पिछले 10 साल में आपसे रिजल्ट लाने की उम्मीद की गई थी, लेकिन वैसा नहीं हुआ। इसके बावजूद भी ना आप खुद हटे और ना ही आपने दूसरों को आगे आने दिया। प्रशांत की तरफ से राहुल गांधी को सलाह दी गई है कि उन्हें कुछ समय के लिए ब्रेक ले लेना चाहिए और किसी दूसरे शख्स को फैसला लेने देना चाहिए।

पीके का हमला राहुल गांधी पर तो रहा है, उनकी तरफ से इंडिया गठबंधन की रणनीति पर भी सवाल उठाए गए। उनकी तरफ से अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव का जिक्र करते हुए कहा गया कि कहने को अपनी पार्टी में ये दोनों चेहरे सबसे बड़े हैं, लेकिन आज भी जनता ने उन्हें नेता के रूप में स्वीकार नहीं किया है। अब एक नजर में प्रशांत किशोर के ये तमाम बयान सलाह लगा सकते हैं, लेकिन गौर करने वाली बात ये है कि पिछले कुछ समय से लगातार तल्ख अंदाज में प्रशांत के सारे हमले इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी पर चल रहे हैं।

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ये बात सच है कि प्रशांत किशोर ने जन स्वराज के नाम से अपनी खुद की पार्टी अब शुरू कर ली है, लेकिन क्योंकि अभी भी वे चुनावी राजनीति में सक्रिय नहीं हुए हैं, ज्यादातर लोग अभी भी उन्हें एक रणनीतिकार के रूप में देखते हैं। इसी वजह से जब भी वे लगातार इंडिया गठबंधन और सिर्फ राहुल गांधी पर हमले करते हैं, इसके सियासी मायने अलग निकल जाते हैं। पिछले महीने जब जातिगत जनगणना का मुद्दा उठा था तो राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए पीके ने कहा था कि कांग्रेस नेता बिहार जैसे गरीब राज्य को जातियों में बांटने के लिए शोर मचा रहे हैं, लेकिन दूसरे राज्य में जाकर चुप हो जाते हैं। अब एक तरफ प्रशांत किशोर इंडिया गठबंधन और राहुल गांधी पर सवालों की बौछार छोड़ रहे हैं तो दूसरी तरफ बीजेपी को लेकर उनका पक्ष कुछ नरम दिखाई देता है। अगर उनके पिछले कुछ बयानों पर नजर डालें तो उन्होंने हर वो बात कही है जिससे भाजपा और एनडीए खेमा उत्साहित हो सकता है। हाल के बयान में ही पीके ने बोला है कि इस बार दक्षिण में भी बीजेपी की सीटें बढ़ने वाली है।

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प्रशांत किशोर तो यहां तक मानते हैं कि इस बार पश्चिम बंगाल और ओडिशा में भी बीजेपी नंबर एक पार्टी रहने वाली है, यानी कि एक तरफ विपक्ष के खिलाफ पीके के तल्ख तेवर हैं तो वहीं एनडीए और बीजेपी के पक्ष में उनकी तरफ से कई बयान देखने को मिल रहे हैं।

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