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Pilibhit Lok Sabha: क्या पीलीभीत में फंस गए जितिन प्रसाद? मंगलवार को पीएम मांगेंगे वोट; एक दशक में किसी प्रधानमंत्री की पहली रैली

Pilibhit Lok Sabha Elections: बीजेपी के टिकट पर इस बार पीलीभीत से जितिन प्रसाद चुनाव लड़ रहे हैं। वो योगी सरकार में मंत्री हैं।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: April 07, 2024 16:17 IST
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पीलीभीत से जितिन प्रसाद बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं (Twitter/JitinPrasada)
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पीलीभीत लोकसभा सीट पर 19 अप्रैल को पहले चरण में वोट डाे जाएंगे। यह लोकसभा सीट पिछले तीन दशक से भी ज्यादा समय से मेनका गांधी और वरुण गांधी के गढ़ के रूप में जाना जाता है। बीजेपी ने इस बार पीलीभीत लोकसभा सीट से वरुण गांधी के बजाय योगी सरकार में मंत्री जितिन प्रसाद को उम्मीदवार बनाया है। मेनका गांधी सुलतानपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी की प्रत्याशी हैं। अब क्योंकि मेनका औऱ वरुण दोनों ही पीलीभीत लोकसभा सीट से दूर हैं, ऐसे में इस सीट को जीतने के लिए बीजेपी ने यहां पूरी ताकत झोंकी हुई है। इसी क्रम में पीएम नरेंद्र मोदी आने वाले मंगलवार को यहां एक चुनावी रैली करने वाले हैं।

जितिन पीलीभीत में बाहरी! क्या कहते हैं स्थानीय लोग

जितिन प्रसाद ने साल 2004 में शाहजहांपुर और 2009 में धौरहरा लोकसभा से कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव जीता था। वह 2021 में बीजेपी में शामिल हो गए। वह इस लोकसभा चुनाव में मैदान में उतरने वाले उत्तर प्रदेश के एकमात्र कैबिनेट मंत्री हैं। हालांकि उन्हें पीलीभीत में अपनी राजनीतिक जमीन बनाने के लिये जद्दोजहद करनी पड़ सकती है।

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पीलीभीत में एक कालेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य सुशील कुमार गंगवार ने कहा, "जितिन प्रसाद का यहां बहुत कम प्रभाव है। अभी तक उन्हें यहां चुनावों के लिए बीजेपी द्वारा मैदान में उतारे गए बाहरी व्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।"

स्थानीय ग्राम प्रधान बाबूराम लोधी ने कहा, "वरुण गांधी का पीलीभीत से बहुत पुराना और गहरा नाता है। यह नाता उस भावनात्मक पत्र में झलकता है जो उन्होंने सीट से टिकट नहीं मिलने के बाद लिखा था।"

वरुण गांधी ने पीलीभीत की जनता को लिखा था पत्र

सांसद के रूप में कई बार अपनी ही सरकार के खिलाफ मुखर हुए वरुण गांधी ने टिकट कटने के बाद अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को एक भावनात्मक पत्र लिखा था जिसमें उन्होंने कहा था कि उनके साथ उनका रिश्ता उनकी आखिरी सांस तक बरकरार रहेगा। मौजूदा सांसद ने कहा कि पीलीभीत के साथ उनका रिश्ता प्यार और विश्वास का है, जो किसी भी राजनीतिक नफे-नुकसान से कहीं ऊपर है।

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मेनका गांधी ने पहली बार वर्ष 1989 में जनता दल के टिकट पर पीलीभीत लोकसभा सीट जीती थी मगर 1991 में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा था लेकिन साल 1996 के चुनाव में उन्होंने फिर से जीत हासिल की। वह साल 1998 और 1999 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में फिर इसी सीट से सांसद चुनी गईं। ​​उन्होंने 2004 और 2014 में बीजेपी उम्मीदवार के रूप में सीट जीती।

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उनके बेटे वरुण गांधी 2009 और 2019 में बीजेपी उम्मीदवार के रूप में पीलीभीत से सांसद बने। मेनका गांधी इस बार सुल्तानपुर से एक बार फिर चुनाव लड़ रही है जहां उन्होंने 2019 में बीजेपी उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। हालांकि जितिन प्रसाद का दावा है कि उन्हें पार्टी संगठन का पूरा समर्थन प्राप्त है, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि वरुण के करीबी लोग भाजपा के फैसले से खुश नहीं हैं।

सभाओं में खुद को मोदी का दूत बताते हैं जितिन

जनसभाओं में जितिन प्रसाद खुद को मोदी का दूत बताते हैं और प्रधानमंत्री के नाम पर वोट मांगते हैं। प्रसाद के समर्थन में पीलीभीत लोकसभा क्षेत्र से बीजपेी विधायक संजय गंगवार, बाबूराम पासवान, विवेक वर्मा और स्वामी प्रकाशानंद उनके नामांकन पत्र में प्रस्तावक थे।