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सीट शेयरिंग से OUT, राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव, बीजेपी ने किया पशुपति पारस के साथ खेल?

बताया जा रहा है कि बीजेपी पशुपति पारस को खुश करने के लिए राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव दिया है। अब पशुपति इसे स्वीकार करते हैं या नहीं, सारा खेल इसी बात का है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | Updated: March 13, 2024 19:06 IST
सीट शेयरिंग से out  राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव   बीजेपी ने किया पशुपति पारस के साथ खेल
केंद्रीय मंत्री पशुपति कुमार पारस (PTI PHOTO)
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बिहार की सियासत में एक बड़ा खेल होता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक तरफ बीजेपी ने सीट शेयरिंग फाइनल कर ली है तो वहीं दूसरी तरफ पशुपति पारस को उससे बाहर रखा है। कुछ रिपोर्ट्स में जरूर दावा हुआ है कि एक सीट पशुपति पारस के लिए भी छोड़ी जा सकती है। अभी तक इस बात की पुष्टि तो नहीं हुई है, लेकिन माना जा रहा है कि चिरग को जगह देने के लिए चाचा पशुपति को किनारे कर दिया गया है। इसके ऊपर एक भी सीट ना देना भी कई तरह के संकेत दे रहा है।

बताया जा रहा है कि बीजेपी पशुपति पारस को खुश करने के लिए राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव दिया है। अब पशुपति इसे स्वीकार करते हैं या नहीं, सारा खेल इसी बात का है। वैसे सक्रिय राजनीति से अलग होकर राज्यपाल का पद वे संभावना चाहेंगे या नहीं, ये अपने आप में एक बड़ा सवाल है। वैसे समझने वाली बात ये है कि बीजेपी ने सीट शेयरिंग में इस बार चिराग पासवान को ज्यादा तवज्जो देने का काम किया है। उन्हें पांच सीटें देकर काफी कुछ स्पष्ट कर दिया गया है।

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ये नहीं भूलना चाहिए कि पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में चिराग की पार्टी ने ही नीतीश की जेडीयू को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया था। कई सीटों पर नीतीश की पार्टी का वोट काटा गया था और उसी वजह से सीटों के मामले में जेडीयू काफी पिछड़ गई थी। अब उन्हीं चिराग पासवान पर बीजेपी ने ज्यादा भरोसा जताया है, हाजीपुर सीट तक उन्हें देने की बात हो गई है। ये वही सीट है जिसे लेकर सबसे ज्यादा सियासी ड्रामा चल रहा था। अब वो सीट भी माना जा रहा है कि चिराग के खाते में गई है और उनकी पार्टी का कद भी एनडीए के अंदर बढ़ा दिया गया है।

असल में बिहार की राजनीति में पासवान वोटर की भी अपनी अहमियत है। कहने को सिर्फ 6 फीसदी हैं, लेकिन कई सीटों पर अपना प्रभाव रखते हैं। पशुपति पारस को लेकर कहा जाता है कि उन्होंने पार्टी पर जरूर अपना कब्जा जमाया, लेकिन रामविलास पासवान के कोर वोटर को बीजेपी के साथ नहीं जोड़ पाए। ऐसे में बीजेपी अब चिराग के जरिए ही उस वोटर तक अपनी पहुंच करने वाली है।

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वैसे जनसत्ता से बात करते हुए बिहार की सियासत पर मजबूत पकड़ रखने वाले कन्हैया भिलारी ने पिछले महीने ही इस सियासी खेल को समझ लिया था। कन्हैया भेलारी ने दो टूक कहा था कि राम विलास पासवान की विरासत पूरी तरह से चिराग पासवान को शिफ्ट कर गई है। पशुपति पारस दावे कितने भी कर लें, लेकिन उनका समर्थन घटता जा रहा है। जो 6 फीसदी के करीब पासवान वोटर है भी, वो अब चिराग के साथ दिखाई दे रहा है। वे ये भी मानते हैं कि पशुपति पारस वर्तमान में बीजेपी पर एक बोझ बन गए हैं। चुनाव है, ऐसे में वे अभी साथ दिख रहे हैं, लेकिन हो सकता है कि वे बाद में खुद अलग हो जाएं या फिर उन्हें बाहर कर दिया जाए।

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