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Nagina Lok Sabha: जहां से चुनाव लड़ रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर, वहां क्या सोच रहे दलित और मुसलमान

Nagina Lok Sabha Seat से भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर चुनाव लड़ रहे हैं। उनका यहां से चुनाव लड़ने से सपा और बसपा को नुकसान का अनुमान है।
Written by: लालमनी वर्मा | Edited By: Yashveer Singh
April 09, 2024 14:19 IST
nagina lok sabha  जहां से चुनाव लड़ रहे भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर  वहां क्या सोच रहे दलित और मुसलमान
क्या नगीना में जीत पाएंगे चंद्रशेखर आजाद? (Photo - Twitter/NaginaASP)
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Nagina Lok Sabha Seat: यूपी वेस्ट की नगीना लोकसभा सीट पर पूरे देश की नजर है... वजह आजाद समाज पार्टी और भीम आर्मी के चीफ चंद्रशेखर का यहां से चुनाव लड़ना। चंद्रशेखर नगीना में बीएसपी के वोट बैंक में कितनी सेंध लगा पाएंगे, इसको लेकर पूरे यूपी में कयास लगाए जा रहे हैं। नगीना में चंद्रशेखर के चुनावी रण में उतरने से विशेषकर दलित और मुस्लिम समुदाय में क्या माहौल है, ये जानने की कोशिश की द इंडियन एक्सप्रेस के संवाददाता लालमणि वर्मा ने...

नगीना लोकसभा सीट पर 16,38,000 हजार से ज्यादा मतदाता हैं। इनमें सबसे ज्यादा तादाद मुस्लिम मतदाताओं की है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब पांच लाख बताई जाती है। मुस्लिम के बाद संख्या में मामले में दलित वोटर सबसे ज्यादा बताए जाते हैं। यहां दलित वोटर्स की संख्या करीब तीन लाख है। नगीना में बसपा और असपा को जहां दलित और मुस्लिम वोटर्स से उम्मीद है तो वहीं सपा को उम्मीद है कि मुस्लिम वोटर्स उसके प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करेंगे।

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किसे वोट देंगे नगीना के दलित और मुसलमान

बात बीती 6 अप्रैल की है, नगीना लोकसभा के नेजोवाडी गावडी गांव में आजाद समाज पार्टी की एक छोटी मीटिंग होनी थी। इस मीटिंग के लिए गांव के रविदास मंदिर और अंबेडकर प्रतिमा के पास कुछ लोग असपा नेताओं का इंतजार कर रहे थे। ये सभी लोग भीम आर्मी चीफ और असपा प्रत्याशी चंद्रशेखर के सपोर्टर थे। मीटिंग के इंतजार करने वाली भीड़ में बच्चे भी थे, इनमें से ज्यादातर दलित समुदाय में आने वाली जाटव बिरादरी से संंबंध रखते हैं।

ये सभी बीएसपी चीफ मायावती के कट्टर समर्थक हैं लेकिन इस बार उन्हें चंद्रशेखर आजाद से उम्मीद हैं। चंद्रशेखर आजाद भी जाटव बिरादरी से आते हैं और बीएसपी चीफ मायावती भी। ये लोग चंद्रशेखर का समर्थन क्यों कर रहे हैं, इसके पीछे कई वजह हैं। उनमें से ही एक वजह जो वे बताते हैं, वो है 'मायावती को चेतावनी'। इन लोगों का कहना है कि मायावती बीजेपी को लेकर शांत बैठी हैं और बीएसपी ग्राउंड से गायब है।

नगीना रविदास मानव सेवा संघ के अध्यक्ष कमलजीत सिंह रवि कहते हैं कि कुछ हफ्ते पहले रामपुर में पुलिस फायरिंग में एक दलित युवा की मौत हो गई। चंद्रशेखर ने उस बच्चे के परिवार से मुलाकात की लेकिन मायावती ने उनकी कोई सुध नहीं ली और न ही उनके भतीजे और उत्तराधिकारी आकाश आनंद वहां गए। अब वो वीआईपी नेता बन गए हैं।

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कमलजीत सिंह रवि कहते हैं कि सिर्फ दलित ही नहीं मुस्लिम भी चंद्रशेखर का समर्थन करेंगे। 19 अप्रैल को नगीना में वोट डाले जाने हैं और यहां सबसे ज्यादा संख्या मुस्लिम वोटर्स की है। कमलजीत सिंह रवि कहते हैं कि चंद्रशेखर युवाओं, दलितों और मुस्लिमों के लिए बात करते हैं। वह प्रदर्शन के लिए सड़क पर उतरने को तैयार रहते हैं। वो यहां अपने विरोधियों को टफ फाइट दे रहे हैं। हो सकता है कि वो न जीतें लेकिन वो बीएसपी और सपा को सबक जरूर सिखा देंगे। वो कहते हैं कि नगीना में या तो बीजेपी जीतेगी या असपा।

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नगीना का यह गांव - नेजोवाडी गावडी दलित बहुल्य है। गांव में दलितों की संख्या करीब छह सौ है। इसी गांव में ओबीसी समुदाय से संबंध रखने वाले सैनी बिरादरी के 300 लोग भी रहते हैं। वह बीजेपी उम्मीदवार ओम कुमार के समर्थक के रूप में देखे जाते हैं। नगीना में सपा ने रिटायर्ड एडिशनल जज मनोज कुमार को टिकट दिया है जबकि बीएसपी से सुरेंद्र पाल सिंह चुनाव लड़ रहे हैं।

पिछले चुनाव में क्या हुआ था?

लोकसभा चुनाव 2019 में सपा और बसपा का गठबंधन था। तब इस सीट पर बसपा के गिरीश चंद्र ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने बीजेपी के यशवंत सिंह को 1.6 लाख से ज्यादा वोटों से मात दी थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में नगीना लोकसभा सीट में आने वाली पांच विधानसभा सीटों में से तीन (नगीना, नूरपुर औऱ नजीबाबाद) पर सपा को जबकि दो पर (धामपुर और नहटौर) बीजेपी को जीत मिली थी।

Nagina Lok Sabha Elections Result 2019

पार्टीप्रत्याशीवोट
बसपा (सपा से गठबंधन)गिरीश चंद्र - विजेता5,68,378
बीजेपीडॉ. यशवंत सिंह4,01,546
कांग्रेसओमवती देवी2,00,46

दलितों के हर वर्ग में चंद्रशेखर के समर्थक

ऐसा नहीं है नगीना में सिर्फ युवाओं में ही चंद्रशेखर के प्रति क्रेज दिखाई दे रहा है। यहां उम्रदराज लोगों को भी भीम आर्मी चीफ से उम्मीद है। नगीना के 60 वर्षीय वोटर तुलाराम मानते हैं कि पीएम आवास योजना और फ्री राशन से उन्हें फायदा हुआ है। वो कहते हैं कि बीजेपी सरकार अच्छी है, योगी के आने के बाद राज्य में लॉ एंड ऑर्डर बेहतर हुआ है। अब यहां मुस्लिम दलितों से गलत व्यवहार नहीं करते हैं।

हालांकि समानता के बारे में बारे में बात करते हुए वह कहते हैं कि छुआछूत खत्म होनी चाहिए, अपर कास्ट हिंदुओं अभी भी इसे मानते हैं। इसलिए हमें अपने समुदाय से एक नेता की जरूरत है जो नेशनल लेवल पर हमारी आवाज उठा सके। तुलाराम का मानना है कि अगर दलित और मुस्लिम एकजुट हो गए तो चंद्रशेखर बहुत आसानी से जीत जाएंगी। वो यह भी कहते हैं कि मायावती और उनकी पार्टी अब खात्मे की ओर है और लोग चाहते हैं कि दलितों को लीड करने के लिए नया खून आगे आए।

गांव के एक अन्य निवासी स्वरूप वाल्मिकी बताते हैं कि मायावती ने उन्हें किस तरह निराश किया है। वो कहते हैं कि अगर मायावती अब भी पब्लिक के बीच घूमना शुरू कर दें तो वो उन्हीं को सपोर्ट करेंगे। वाल्किमी आगे कहते हैं कि मायावती आज भी देश में दलितों की सबसे बड़ी नेता हैं। आपको बता दें कि जाटव बिरादरी से इतर वाल्मिकी जाति धीरे-धीरे बीजेपी की तरफ शिफ्ट होती दिखाई दे रही है। बीजेपी भी दलितों को आक्रामक तरीके से लुभाने की कोशिश कर रही है।

ग्राउंड पर बीएसपी के दिखाई न देने से होगा मायावती को नुकसान?

पिछले चुनावों की तरह बीएसपी इस बार ग्राउंड पर उतना एक्टिव नजर नहीं आ रही है। हसनअलीपुर गांव के कमलेश कुमार कहते हैं कि उनका समुदाय चंद्रशेखर को एक मौका देने के पक्ष में है। उन्होंने नेतृत्व की बागडोर अब मायावती से चंद्रशेखर को सौंपने के बारे में मन बना लिया है, जैसे बीजेपी समर्थक ने नेतृत्व वाजपेयी और आडवाणी से नरेंद्र मोदी और अमित शाह को सौंपा।

जाटव और सैनी बिरादरी बहुल्य इस गांव में रहने वाले महर सिंह मायावती द्वारा बीजेपी विरोधी एंटी इंडिया से दूर रहने के फैसले पर सवाल करते हैं और कहता है कि इसका मतलब यह है कि वो बीजेपी के साथ हैं।

बातचीत चंद्रशेखर और सपा-कांग्रेस के बीच भी हुई थी लेकिन रास्ते तब अलग हो गए जब सपा ने उन्हें नगीना के स्थान पर आगरा और बुलंदशहर सीटें ऑफर कीं। इससे पहले चंद्रशेखर आजाद द्वारा मायावती की बसपा से गठबंधन के प्रयास भी हुए, उन्होंने मायावती की तारीफ भी की, हालांकि बीएसपी ने उन्हें कभी भाव नहीं दिया।

दिसंबर 2019 में मायावती ने ट्वीट किया था कि दलित मानते हैं कि भीम आर्मी वाले चंद्रशेखर बीएसपी के वोट शेयर के प्रभावित करने की साजिश रच रहा है। वह प्रदर्शन करता है और जान-बूझकर जेल जाता है।

मायावती को हो गया चंद्रशेखर के बढ़ते कद का आभास?

बात अगर मौजूदा हालातों की करें तो लगता है कि बीएसपी को चंद्रशेखर के बढ़ते दबदबे का आभास हो गया है, शायद इसी वजह से मायावती के भतीजे आकाश आनंद ने लोकसभा चुनाव में अपनी पार्टी के प्रचार के लिए नगीना को चुनाव। उन्होंने अपने भाषण में बीजेपी पर हमला बोला और युवाओं और मुसलमानों से चंद्रशेखर के बहकावे में न आने को कहा।

नगीना से बीएसपी के प्रत्याशी सुरेंद्र पाल सिंह कहते हैं कि एएसपी बीजेपी की मदद कर रही है। बीजेपी द्वारा चंद्रशेखर को इसलिए बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि वो बीएसपी के वोट में सेंध लगा सके। वो कहते हैं कि चंद्रेशखर यहां का नहीं है, वो बाहरी है, सहारनपुर का रहने वाला है।

बीजेपी भी कर रही दलितों को रिझाने का प्रयास

जिस दिन नेजोवाडी गावडी गांव में आजाद समाज पार्टी द्वारा रैली आयोजित की गई, उसी दिन यूपी के सीएम औऱ बीजेपी के स्टॉर कैंपेनर योगी आदित्यनाथ ने भी नगीना में रैली की। उन्होंने दलितों से बीजेपी के पक्ष में मतदान करने की अपील करते हुए वाराणसी में गुरु रविदास के जन्मस्थान को दिए गए "नए गौरव" और अयोध्या में इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नामकरण महर्षि वाल्मिकी - दोनों दलित प्रतीकों के नाम पर करने की बात की।

नगीना में चंद्रेशखर आजाद जीतने के लिए नॉन जाटव दलितों पर फोकस कर रहे हैं। उन्होंने रविवार को नजीबाबाद में वाल्मीकि समाज के 'सामाजित भाईचारा महासम्मेलन' को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में मुस्लिम भी मौजूद थे। इस दौरान उन्होंने बीजेपी को टारगेट तो किया लेकिन सपा और बसपा का जिक्र नहीं किया।

मुस्लिमों का क्या है रुख?

नगीना में मुस्लिम समुदाय भी इस बार चंद्रेशखर के पक्ष में जाता नजर आ रहा है। लोगों का मानना है कि नगीना में चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में एक वही हैं जो बीजेपी का सामना कर सकते हैं। यहां मुस्लिम समुदाय के कई लोगों का मानना है कि सपा ने उनकी सपोर्ट को हल्के में लेना शुरू कर दिया है।

धामपुर के सुभाष चौक पर एक कार मकैनिक मोहम्मद उस्मान अखिलेश यादव और सपा द्वारा पार्टी के सीनियर लीडर आजम खान और उनके परिवार को मुसीबत के समय में अकेले छोड़ देने को लेकर सवाल किया।

आपको बता दें कि अखिलेश यादव आजम खान से जेल में सिर्फ एक बार मुलाकात के लिए गए, वो भी लोकसभा चुनाव से पहले। इसके बाद मुरादाबाद लोकसभा सीट और रामपुर लोकसभा सीट पर क्या हुआ, यह सभी ने देखा। उस्मान कहते हैं कि यहां सपा भी ग्राउंड से गायब है। उनके प्रत्याशी के चेहरे को कोई नहीं पहचानता, दूसरी तरफ चंद्रशेखर शोषितों और वंचितों के लिए लड़ता है। ऐसे में वो ही बीजेपी के खिलाफ टिकता दिखाए दे रहा है, इसलिए मैं उसे ही वोट दूंगा।

उस्मान के पास में रहने वाले अकील अहमद कहते हैं कि उनके हिसाब से नगीना में बीजेपी की जीत होगी क्योंकि चंद्रशेखर आजाद सपा के मुस्लिम वोट और बसपा का दलित आधार प्रभावित करेंगे। वो बताते हैं कि क्योंकि उन्हें केंद्र सरकार की कई योजनाओं का फायदा मिला है, इसलिए वो बीजेपी की जीत को लेकर चिंतित नहीं है।

अहमद कहते हैं कि "बीजेपी सबका साथ, सबका विकास'' के हिसाब से काम कर रही है। वेलफेयर स्कीम्स में कोई भेदभाव नहीं किया जा रहा है। हालांकि अहमद ये भी मानते हैं कि मुस्लिम अभी भी किनारे पिछड़े हुए हैं। वो कहते हैं, ''पर्सनल लेवल पर भेदभाव होता है। अगर कोई साम्प्रदायिक विवाद होता है तो एक्शन सिर्फ मुस्लिम पक्ष के खिलाफ लिया जाता है।"

धामपुर टाउन में रहने वाले मकसूद आलम मानते हैं कि मुस्लिम वोट सपा, बसपा और असपा में बंट जाएगा लेकिन बावजूद इसके वो सपा के ही समर्थक रहेंगे। वहीं उनके पोते आफताब ने चंद्रशेखर आजाद को वोट देने का मन बना लिया है। आफताब इसकी वजह भी बताते हैं, वो कहते हैं कि अखिलेश की सरकार में विकास हुआ। वो PDA के बारे में बात भी कर रहे हैं लेकिन वो खुलकर मुस्लिमों के मुद्दे पर नहीं बोलते।

सपा - बसपा को पता है नुकसान करेंगे चंद्रशेखर

शनिवार को हिंदू इंटर कॉलेज के ग्राउंड में हुई रैली में बसपा नेता सगीर अंसारी ने मुस्लिम वोटरों को साधने का प्रयास करते हुए कहा कि उन्होंने 2019 में चुनाव जीतने वाले अपने प्रत्याशी को इसलिए रिपीट नहीं किया क्योंकि मुस्लिम उससे खुश नहीं थे। यह मानते हुए कि नगीना सीट पर हालात अच्छे नहीं हैं, उन्होंने मुस्लिम वोटरों से फिर भी बसपा के लिए वोट करने की अपील की।

वहीं दूसरी तरफ सपा की SC सेल के अध्यक्ष राहुल भारती चंद्रशेखर की तरफ से आ रहे चैलेंज को बड़ा न मानते हुए कहते हैं कि नगीना में फाइट बीजेपी और कांग्रेस-सपा के बीच। है। वो मानते हैं कि असपा उनके वोटों में सेंध लगा सकती है लेकिन सपा को इस बार बीजेपी विरोध दलित वोट मिलने जा रहा है। वो कहते हैं कि बीएसपी चंद्रशेखर आजाद से ज्यादा मजबूत है। मायावती के भतीजे आकाश की रैली के बाद चंद्रशेखर की हालत और भी खराब हो गई है।

नगीना ने हर बार दिया नई पार्टी से नया सांसद

नगीना लोकसभा सीट 2009 में हुए लोकसभा चुनाव से पहले अस्तित्व में आई। इस सीट पर तब से अब तक तीन बार लोकसभा चुनाव हो चुका है और तीनों चुनाव में हर बार नगीना की जनता ने अलग पार्टी और नए चेहरे को चुनाव है। साल 2009 के लोकसभा चुनाव में नगीना से सपा के यशवीर सिंह चुनाव जीते थे। साल 2014 में यहां बीजेपी के यशवंत सिंह को जीत मिली। इसके बाद पिछले लोकसभा चुनाव में बसपा के गिरीश चंद्र नगीना के सांसद बने।

लोकसभा चुनावपार्टीनगीना का सासंद
2009सपायशवीर सिंह
2014बीजेपीयशवंत सिंह
2019बसपागिरीश चंद्र
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