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मुरादाबाद में वोटिंग हो चुकी और प्रत्याशी का निधन, फिर से होगा चुनाव?

अब यहां पर समझने वाली बात यह है कि अभी तुरंत इस समय ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है। जो नियम है, उनके मुताबिक अभी चुनावी प्रक्रिया जैसी चल रही है, वैसे ही आगे बढ़ती रहेगी।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
Updated: April 20, 2024 22:58 IST
मुरादाबाद में वोटिंग हो चुकी और प्रत्याशी का निधन  फिर से होगा चुनाव
कुंवर सर्वेश सिंह का निधन
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मुरादाबाद से भाजपा प्रत्याशी कुंवर सर्वेश सिंह का निधन हो गया है, 71 साल की उम्र में कैंसर की वजह से उनकी मौत हो गई। बड़ी बात यह है कि पहले चरण में जो वोटिंग हुई उसमें मुरादाबाद सीट पर भी वोट डाला गया था। ऐसे में यहां पर भाजपा के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है। इस समय सभी के मन में ये सवाल आ रहा है कि क्या मुरादाबाद सीट पर एक बार फिर वोटिंग होगी? सबसे बड़ा कंफ्यूजन इस बात को लेकर है कि अगर भाजपा प्रत्याशी का निधन हो चुका है तो क्या इसका मतलब ये निकाला जाए कि पूरी चुनावी प्रक्रिया एक बार फिर दोहराई जाएगी?

अब यहां पर समझने वाली बात यह है कि अभी तुरंत इस समय ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला है। जो नियम है, उनके मुताबिक अभी चुनावी प्रक्रिया जैसी चल रही है, वैसे ही आगे बढ़ती रहेगी। 4 जून को जब नतीजे आएंगे, उसके बाद ही फैसला लिया जाएगा कि सीट पर दोबारा वोटिंग करने की आवश्यकता है या नहीं। असल में अगर मुरादाबाद सीट से इस बार बीजेपी की जीत होती है, तब जरूर चुनाव आयोग को उस सीट को रिक्त घोषित करना पड़ेगा और तब दोबारा वहां पर वोटिंग करवाई जाएगी। ऐसा इसलिए क्योंकि बीजेपी के सर्वेश सिंह अब दुनिया में नहीं रहे। लेकिन अगर दूसरी तरफ इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी की यहां से जीत होती है तो उन्हें विनिंग सर्टिफिकेट दिया जाएगा। उस स्थिति में वो सीट उनके नाम हो जाएगी और वहां फिर से वोटिंग नहीं होगी।

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वैसे इस बार अगर पहले चरण की वोटिंग की बात करें तो जनता में ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला है। कई इलाकों में, कई राज्यों में इस बार 2019 लोकसभा चुनाव की तुलना में कम वोटिंग देखी गई है। इस बार कम वोटिंग के कई कारण माने जा रहे हैं- भीषण गर्मी से लेकर शादी के सीजन तक, कई ऐसे फैक्टर है जिस वजह से लोगों का उत्साह कुछ कम दिखाई दिया। समझने वाली बात ये है कि कम वोटिंग का भी राजनीति में मायने होते हैं। दोनों ज्यादा और कम वोटिंग सत्ता बदलने की ताकत रखती है। 12 लोकसभा चुनाव में से पांच बार तो ऐसा देखने को मिला है कि जब-जब वोटिंग प्रतिशत घटा है, तब सत्ताधारी दल की विदाई हुई है।

अब इस प्रकार का वोटिंग पैटर्न बीजेपी के लिए ज्यादा चिंता का सबब इसलिए है क्योंकि उसने खुद के लिए 400 प्लस का टारगेट सेट कर रखा है। दावा किया गया है कि इस चुनाव में सारे रिकॉर्ड टूट जाएंगे, एक तरफ अगर बीजेपी ने खुद के लिए 370 सीट जीतने का दावा किया है तो दूसरी तरफ एनडीए के खाते में 400 से ज्यादा सीटें आने का आश्वासन है।

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