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पुणे कांग्रेस अध्यक्ष का वोट डाल कौन डाल गया? मतदान केंद्र पर पहुंचे तो रह गए दंग, ऑब्जेक्शन के बाद डाला 'टेंडर वोट'

पुणे कांग्रेस अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका वोट किसी और ने दे दिया, तब उन्होंने आपत्ति जताई।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: May 13, 2024 16:08 IST
पुणे कांग्रेस अध्यक्ष का वोट डाल कौन डाल गया  मतदान केंद्र पर पहुंचे तो रह गए दंग  ऑब्जेक्शन के बाद डाला  टेंडर वोट
पुणे कांग्रेस अध्यक्ष ने टेंडर वोट डाला है।
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देश की 96 लोकसभा सीटों पर चौथे चरण के लिए वोटिंग जारी है। महाराष्ट्र की 11 लोकसभा सीटों पर भी वोटिंग हो रही है। इस बीच एक हैरान कर देने वाला वाक्या सामने आया है। महाराष्ट्र की पुणे लोकसभा सीट पर भी वोटिंग हो रही है और यहां पर कांग्रेस के शहर अध्यक्ष का वोट किसी और ने दे दिया।

मतदान केंद्र पर पहुंचने पर पता चला कि मेरा वोट किसी ने डाल दिया- कांग्रेस नेता

जब पुणे शहर कांग्रेस प्रमुख अरविंद शिंदे सोमवार को रास्ता पेठ के सेंट मीरा इंग्लिश मीडियम स्कूल में मतदान केंद्र पर पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि उनका नाम मतदाता सूची में था, लेकिन किसी ने पहले ही वोट डाल दिया था। अरविंद शिंदे ने कहा कि इसका पता चलने के बाद उन्होंने इस पर आपत्ति जताई और बाद में उन्हें 'टेंडर वोट' प्रक्रिया का उपयोग करके मतदान करने की अनुमति दी गई।

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अरविंद शिंदे ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "मैं उस मतदान केंद्र पर अपना वोट डालने गया था जहां मेरा नाम रजिस्टर्ड है। यह रास्ता पेठ में सेंट मीरा इंग्लिश मीडियम सेकेंडरी स्कूल में था। हालांकि मैंने इस पर आपत्ति जताई और मुझे टेंडर वोट डालने की अनुमति दी गई।"

क्या होता है टेंडर वोट?

चुनाव संचालन नियम, 1961 की धारा 49P के अनुसार टेंडर वोट वह वोट है जिसे मतपत्र पर डालने की अनुमति तब दी जाती है जब एक मतदाता को पता चलता है कि किसी ने पहले ही उसके नाम पर वोट दिया है। इसके लिए मतदाता को मतदान केंद्र पर पीठासीन अधिकारी से संपर्क करना होगा और मुद्दे को उठाना होगा। अपनी पहचान के बारे में पीठासीन अधिकारी के प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर देने पर मतदाता को टेंडर वोट डालने की अनुमति दी जाती है।

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इस स्थिति में नहीं होती टेंडर वोटों की गिनती

ये वोट मतपत्रों पर डाले जाते हैं और सील करके बंद कर दिए जाते हैं। ये वोट तब उपयोगी होते हैं जब जीतने वाले उम्मीदवार और उपविजेता के बीच अंतर कम होता है। हालांकि यदि अंतर बड़ा है, तो टेंडर वोटों की गिनती नहीं की जाती है।

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