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'इस उम्मीद में वोट दिया कि भविष्य…', श्रीनगर में दो दशक बाद सबसे अधिक मतदान होने पर बोले स्थानीय नागरिक

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने चुनाव प्रचार को सुविधाजनक बनाने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।
Written by: Naveed Iqbal , बशारत मसूद | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: May 13, 2024 22:24 IST
 इस उम्मीद में वोट दिया कि भविष्य…   श्रीनगर में दो दशक बाद सबसे अधिक मतदान होने पर बोले स्थानीय नागरिक
श्रीनगर में दो दशक बाद सबसे अधिक वोटिंग हुई।
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चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की मेहनत रंग लाई है। शाम 5 बजे तक श्रीनगर लोकसभा क्षेत्र में 36.1% मतदान हुआ। ये आंकड़ा पिछले पांच चुनावों में सबसे अधिक है। चुनाव आयोग के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने चुनाव प्रचार को सुविधाजनक बनाने और राजनीतिक गतिविधि के लिए सुरक्षित माहौल प्रदान करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।

चुनाव आयोग की कोशिश लाई रंग

एक सूत्र ने बताया कि जब मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार ने मार्च में तैयारियों की समीक्षा करने के लिए कश्मीर का दौरा किया था, तो सभी जिला मजिस्ट्रेटों को उम्मीदवारों को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने और कार्यक्रमों के आयोजन के लिए जल्दी से मंजूरी प्रदान करने का निर्देश दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि उम्मीदवारों के लिए विश्वास और मतदाताओं तक पहुंच बनाने के कार्यक्रमों के कारण भी इस बार मतदान में वृद्धि हुई है।

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श्रीनगर लोकसभा सीट पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार आगा रुहुल्ला मेहदी का मुकाबला पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के वहीद उर रहमान पारा और जेएंडके अपनी पार्टी के अशरफ मीर से है। यहां कुल 24 उम्मीदवार मैदान में हैं।

उम्मीद के लिए वोट- स्थानीय नागरिक

दारा में अपना वोट डालने के बाद 62 वर्षीय गुलाम कादिर वानी ने कहा, "यह हमारे अतीत के विरोध में वोट नहीं है, यह उम्मीद का वोट है, बेहतर भविष्य की उम्मीद का वोट है। पिछले दस सालों से लोग जम्मू-कश्मीर के बदलते राजनीतिक परिदृश्य को तमाशबीन की तरह देखते रहे हैं और वोट डालने से उन्हें नियंत्रण की भावना वापस मिलती है। अगर मैं और मेरा परिवार आज वोट नहीं करते, तो हम अपनी परिस्थितियों से हार जाते।"

2022 में चुनाव आयोग द्वारा परिसीमन अभ्यास के बाद श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र की सीमाओं को फिर से परिभाषित किया गया। 2019 में श्रीनगर में 14.43% मतदान हुआ था। वहीं 2014, 2009, 2004 और 1999 के आंकड़े क्रमशः 25.86%, 25.55%, 18.57% और 11.93% हैं।

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370 भी चुनाव में है मुद्दा

25 वर्षीय मुनीब मुश्ताक ने नैरा में मतदान केंद्र के बाहर कतार में खड़े होकर कहा, "अगस्त 2019 में (अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने) के बाद से हम खुद को शक्तिहीन महसूस कर रहे हैं। मैं यहां अपना प्रतिनिधि चुनने आया हूं क्योंकि यही एक ऐसी चीज है जिसे मुझसे नहीं छीना जा सकता। राष्ट्रीय दलों के नेताओं के भाषणों को उत्सुकता से देख रहे हैं और संविधान को बचाना एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।"

पुलवामा के लस्सीपोरा में 70 वर्षीय अब्दुल रशीद मीर ने कहा कि 543 सीटों वाली संसद में कश्मीर से तीन सांसद भेजने से भले ही कोई बड़ा अंतर न आए, लेकिन जम्मू-कश्मीर का प्रतिनिधित्व करने के लिए क्षेत्रीय दलों को मजबूत करना अभी भी मायने रखता है। उन्होंने कहा, "हमारे क्षेत्रीय दल हमें जो सुरक्षा दे सकते हैं, जिस तरह से वे युवाओं की रक्षा कर सकते हैं, जिन्हें हर बार उठाया जाता है, उन्हें मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है।" 26 वर्षीय वकील अब्दुल मनन पहली बार गंदेरबल में एक मतदान केंद्र पर गए। उन्होंने कहा, "अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद, मेरे और मेरी पीढ़ी के बहुत से लोगों के बीच अनिश्चितता की भावना पैदा हो गई थी। आज, मैंने पहली बार अपना वोट डाला है क्योंकि मैं देश के बाकी हिस्सों पर हावी हो चुकी कट्टरपंथी राजनीति से चिंतित हूं और मैं इससे अछूता नहीं हूं। इसलिए मैं अपनी व्यक्तिगत जिम्मेदारी निभा रहा हूं।"

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