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Lok Sabha Elections: 'खिचड़ी' बना महाराष्ट्र! विरोधियों से भिड़ने से पहले आपस में गुथे दोनों गठबंधनों में शामिल दल

एमवीए पिछले दो महीनों से अपने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर चर्चा कर रहा है, जिसके बावजूद लगभग आठ लोकसभा सीटों के मुद्दे अभी तक सुलझ नहीं पाए हैं। पढ़ें वल्लभ ओज़ारकर, आलोक देशपांडे के विचार।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: March 24, 2024 11:52 IST
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टकराव की स्थिति राज्य के लगभग सभी क्षेत्रों में है। हालांकि कुछ जगह यह कम है और कुछ जगह ज्यादा है। (Photo- Pavan Khengre)
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लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण के लिए नामांकन कार्य शुरू हो चुका है। इसके बाद भी कई क्षेत्रों में अभी तक राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी का नाम तक तय नहीं कर सके हैं। जबकि सभी दलों में प्रत्याशियों को लेकर दो-तीन महीने पहले से ही नाम मांगे जा रहे हैं। महाराष्ट्र में दोनों गठबंधन - सत्तारूढ़ महायुति और विपक्षी महा विकास अघाड़ी (MVA) - ने अभी तक अपने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले को अंतिम रूप नहीं दिया है और राज्य की सभी 48 सीटों पर अंदरूनी कलह के कारण कई सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की है।

सत्तारूढ़ गठबंधन में कम से कम आठ सीटों पर विवाद है

सत्तारूढ़ गठबंधन में कम से कम आठ सीटों पर विवाद है। यहां मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के स्थानीय नेताओं या उम्मीदवारों और भाजपा नेताओं के बीच मतभेद हैं। बारामती में भी यही स्थिति है, जहां उपमुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा के चुनाव लड़ने की संभावना है, जबकि पुरंदर से शिंदे सेना के विजय शिवतारे ने अजीत को उनके गढ़ में पवार के खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी है।

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कल्याण सीट पर शिवसेना और बीजेपी में टकराव

ऐसा ही झगड़ा एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे द्वारा प्रतिनिधित्व की जाने वाली हाई-प्रोफाइल कल्याण लोकसभा सीट पर चल रहा है। भले ही बीजेपी मंत्री रवींद्र चव्हाण ने श्रीकांत को सीट देकर गतिरोध को हल करने की कोशिश की, लेकिन स्थानीय बीजेपी नेता बार-बार अनुरोध कर रहे हैं कि कल्याण में उम्मीदवार ऐसा होना चाहिए जो पार्टी के 'कमल' चिन्ह पर चुनाव लड़े।

इसी तरह की खींचतान ठाणे और पालघर लोकसभा सीटों पर देखी जा रही है, जिन पर बीजेपी और शिंदे सेना दोनों ने दावा किया है। ठाणे में मौजूदा सांसद राजन विचारे, उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ हैं और पालघर के सांसद राजेंद्र गावित वर्तमान में शिंदे सेना के साथ हैं। फिर भी बीजेपी नेतृत्व को लगता है कि वह दोनों सीटों पर मजबूत है और अपनी जीत के फैक्टर का हवाला देते हुए सीटों पर चुनाव लड़ने की मांग कर रही है, जबकि शिंदे सेना ने बताया है कि दोनों निर्वाचन क्षेत्र पारंपरिक रूप से शिवसेना के पास रहे हैं और इसलिए दोनों सीटें शिवसेना को मिलनी चाहिए, बीजेपी को नहीं।

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सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में शिंदे सेना, बीजेपी और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी शामिल है। कोंकण क्षेत्र में रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग लोकसभा सीट पर कौन चुनाव लड़ेगा, इस पर एक और विवाद खड़ा हो गया है। केंद्रीय मंत्री और बीजेपी नेता नारायण राणे द्वारा अपने बेटे नीलेश के लिए सीट पर दावा करने के बाद यह मुद्दा पिछले कुछ महीनों से चल रहा है, जबकि राज्य के उद्योग मंत्री और शिंदे सेना नेता उदय सामंत के भाई किरण सामंत की नजर इस सीट पर है। अविभाजित शिव सेना पिछले कई कार्यकाल से रत्नागिरी सिंघुदुर्ग सीट से चुनाव लड़ रही है, क्योंकि कोंकण को शिव सेना का गढ़ माना जाता है।

एमवीए पिछले दो महीनों से अपने सीट-बंटवारे के फॉर्मूले पर चर्चा कर रहा है, जिसके बावजूद लगभग आठ लोकसभा सीटों के मुद्दे अभी तक सुलझ नहीं पाए हैं। पश्चिमी महाराष्ट्र की सांगली लोकसभा सीट पर कांग्रेस और शिवसेना (यूबीटी) के बीच खींचतान चल रही है और दोनों पक्षों ने पहले ही अपने-अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। कांग्रेस चाहती है कि पूर्व मुख्यमंत्री वसंतदादा पाटिल के पोते विशाल मैदान में उतरें, जबकि उद्धव सेना ने पहलवान चंद्रहार पाटिल को उम्मीदवार घोषित किया है।

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