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चुनाव, रमजान और मुसलमान: कैसे प्रचार कर रहे मुस्लिम प्रत्याशी? ईद के बाद जोर पकड़ेगा कैंपेन

Lok Sabha Elections 2024: रमजान के महीने में मुस्लिम प्रत्याशी न सिर्फ रोजे रख रहे हैं बल्कि प्रचार भी कर रहे हैं। इस रिपोर्ट में जानिए कैसा रहता है उनका शेड्यूल।
Written by: लालमनी वर्मा | Edited By: Yashveer Singh
April 05, 2024 18:31 IST
चुनाव  रमजान और मुसलमान  कैसे प्रचार कर रहे मुस्लिम प्रत्याशी  ईद के बाद जोर पकड़ेगा कैंपेन
मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में ईद के बाद कैंपेन जोर पकड़ता दिखाई देगा (Express Image)
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लोकसभा चुनाव 2024 में पहले चरण का मतदान होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। पहले चरण के चुनाव में यूपी वेस्ट की कई मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भी वोट डाले जाएंगे। इन सीटों पर चुनाव इसलिए भी विशेष हो जाता है क्योंकि इस समय रमजान का पवित्र महीना चल रहा है और मुस्लिम समुदाय से संबंध रखने वाले ज्यादातर लोग रमजान के पवित्र महीने में रोजा रखते हैं।

यूपी वेस्ट में पहले फेज के चुनाव में बहुत सारे मुस्लिम प्रत्याशी भी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। ये मुस्लिम उम्मीदवार रमजान के महीने में अपना चुनावी कैंपेन एडजस्ट कर रहे हैं और इसी तरह अपनी डाइट पर काम कर रहे हैं।

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आमतौर पर दिनभर प्रचार करने के बजाय मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार तपती धूप में डोर - टू - डोर कैंपेन करने के बजाय इनडोर मीटिंग्स पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं। अगर दिन के समय में इन प्रत्याशियों को खुले में चुनाव प्रचार करना भी पड़ता है तो वो खाना खाने या पानी पीने से बचते हैं। मुस्लिम प्रत्याशी टेंट्स में छोटी नुक्कड़ सभाओं पर ज्यादा काम कर रहे हैं, इस दौरान वे अपने भाषण छोटे रखते हैं।

शाम के समय ये प्रत्याशी गलियों और बाजारों में निकलते हैं। यह वह समय होता है जब मुस्लिम समुदाय के लोग रोजा इफ्तार के बाद अपने घरों से बाहर आते हैं। रोजे के दौरान प्रत्याशी हल्का भोजना करना पसंद करते हैं, इसमें सेहरी के लिए खिचड़ी और दलिया जबकि इफ्तार के लिए खजूर, जूस और फल शामिल हैं।आपको बता दें कि रमजान का पवित्र महीना 12 मार्च को शुरू हुआ है और इसका समापन ईद के साथ 11 अप्रैल को होने की उम्मीद है। पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को होना है।

पहले फेज में यूपी वेस्ट की 8 लोकसभा सीटों पर मतदान

19 अप्रैल को यूपी वेस्ट की आठ लोकसभा सीटों पर वोटिंग होनी है। इनमें से सात पर मुस्लिम वोटर्स की तादाद काफी ज्यादा है। इन सीटों में रामपुर, सहारनपुर, कैराना, मुजफ्फरनगर, नगीना, मुरादाबाद औऱ बिजनौर शामिल हैं।

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रामपुर लोकसभा सीट पर मुस्लिम वोटर्स करीब 52 फीसदी हैं। यहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी मोहिब्बुल्लाह नदवी हैं। वह कहते हैं कि भले ही वे पहला चुनाव लड़ रहे हैं लेकिन इस बात की वह खास ख्याल रखते हैं कि पांचों वक्त की नमाज अता करें। उनके छोटे भाई मोहम्मद आसिफ बताते हैं कि मोहिब्बुल्लाह जब भी मस्जिद में जाते हैं, वह समुदाय के लोगों से बातचीत करते हैं।

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रमजान में मोहिब्बुल्लाह के भोजन से जुड़े सवाल के जवाब में वो कहते हैं कि सहरी में भोजन वह क्या खा रहे हैं, इससे उन्हें बहुत फर्क नहीं पड़ता लेकिन अगर वो भारी भोजन करते हैं तो उन्हें प्रचार में परेशानी हो सकती है। आसिफ बताते हैं कि उनका कैंपेन सुबह आठ बजे शुरू होता है और देर शाम तक चलता है। लोग अकसर नमाज के बाद मिलते हैं। वह गांवों में भी जा रहे हैं। वह शाम के इफ्तार के बाद बड़ा एरिया कवर करते हैं। हम शाम को ही पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ चुनाव मैनेजमेंट से जुड़ी मीटिंग्स करते हैं।

रामपुर में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे जीशान खान सहरी में खिचड़ी या दलिया खाना पसंद करते हैं। वह बताते हैं कि उनका प्रचार सुबह दस बजे शुरू होता है और वो दिन के समय में पंद्रह से बीस मीटिंग करते हैं। जीशान खान बताते हैं कि वो अपने भाषण छोटे रखने की कोशिश करते हैं।पार्टी के जो नेता रोजा नहीं रख रहे हैं वो मोर्चा संभालते हैं, जिससे उनकी एनर्जी बचती है।

आपको बता दें कि रामपुर में लोकसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे छह में से चार प्रत्याशी मुसलमान हैं।

कैसे प्रचार कर रहे हैं इमरान मसूद?

बात अगर सहारनपुर की करें तो यहां दस प्रत्याशी हैं। इनमें से आठ मुसलमान हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी इमरान मसूद कहते हैं कि वो सहरी के बाद नींद लेते हैं और रात में नॉर्मल डिनर करते हैं। वह बताते हैं, "मेरा अभियान व्यस्त नहीं है और मैं इसे लो प्रोफ़ाइल में रख रहा हूं। दिन के समय और शाम को इफ्तार के बाद मेरी ज्यादातर मीटिंग्स होती हैं। ये सभी छोटी सभाएं होती है।"

इमरान मसूद बताते हैं वह नमाज के समय घर में रहना पसंद करते हैं। वह कहते हैं, " मैं मस्जिदों में प्रचार नहीं करता है। मैं सियासत के लिए मस्जिद का इस्तेमाल नहीं करता। बहुत सारे लोग मुझे आकर पब्लिक मीटिंग के लिए इन्वाइट करते हैं लेकिन मैं सिर्फ पांच से छह छोटी बैठकें करता हूं और मेरे भाषण छोटे होते हैं। मैं भीड़ से बचता हूं और कोशिश करता हूं कि वोटर्स के साथ आराम से बैठकर बातचीत करता हूं।"

शाम को डोर-टू-डोर मीटिंग्स के अलावा इमरान मसूद देर रात तक फोन पर लोगों से बातचीत करना पसंद करते हैं। वह कहते हैं कि चुनाव प्रचार अभियान ईद के बाद जोर पकड़ेगा।

नमाज के लिए बड़ी मस्जिदों का रुख कर रहे इरफान सैफी

मुरादाबाद में बसपा के प्रत्याशी मोहम्मद इरफान सैफी उन उम्मीदवारों में से हैं जो नमाज के लिए बड़ी मस्जिदों में जाते हैं। वह कहते हैं कि रमजान के दौरान मस्जिदों में लोगों से मिलना आसान होता है। वो मुझे जानते हैं। वह बताते हैं कि इसके अलावा वो शाम के समय कैंपेन करते हैं। सहरी में इरफान सैफी खजूर और केले खाना पसंद करते हैं और फिर रेस्ट करते हैं।

अब क्योंकि रमजान का महीना खत्म होने वाला है, ऐसे में ईद के बाद सभी मुस्लिम प्रत्याशी ईद के बाद अपने कैंपेन को गति देने के लिए तैयार हैं। ईद के बाद ही इन जिलों में विभिन्न पार्टियों के टॉप नेता ताबड़तोड़ रैलियां करते नजर आएंगे। रामपुर में सपा प्रमुख अखिलेश यादव की रैली प्रस्तावित है जबकि मायावती उत्तराखंड से अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। वह हरिद्वार में अपने प्रत्याशी जमील अहमद के पक्ष में प्रचार करेंगे। वह 14 अप्रैल को सहारनपुर और मुजफ्फरनगर में रैली करेंगी।

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