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किसान परेशान, मराठा आरक्षण की मांग… फिर भी सब चंगा सी! महाराष्ट्र में जमीन पर दिख रहा मोदी मैजिक

स्थिति ऐसी है कि यह पहली बार है कि मतदाता को पता ही नहीं है कि कौन और किसको वोट देना है। यदि उसने 2019 में शिव सेना को वोट दिया, तो अब उसे दो शिव सेनाओं में से किसी एक को चुनना होगा। यदि उसने एनसीपी को वोट दिया, तो उसे दो एनसीपी में से किसी एक को चुनना होगा।
Written by: संदीप सिंह , पी वैद्यनाथन अय्यर | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: May 12, 2024 12:32 IST
किसान परेशान  मराठा आरक्षण की मांग… फिर भी सब चंगा सी  महाराष्ट्र में जमीन पर दिख रहा मोदी मैजिक
महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के एक छोटे व्यवसायी मच्छिन्द्र दरकुंडे।
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मुंबई से 250 किमी पूर्व में अहमदनगर के बीच में खाने वाले तेल का उत्पादन करने वाले 42 वर्षीय व्यवसायी मच्छिन्द्र दरकुंडे का मानना है कि किसान दर्द में हैं और मराठा समुदाय आरक्षण से परेशान है। वह कहते हैं, ''मेरे लोग इस बात से नाराज हैं कि मोदीजी ने चार दिन पहले यहां अपनी रैली के दौरान आरक्षण का बिल्कुल भी नाम नहीं लिया।'' और फिर तुरंत समझाने के लिए खड़े हो जाते हैं। दरकुंडे, जो स्वयं एक मराठा हैं, कहते हैं, “लेकिन लोगों को यह समझना होगा कि अगर वह यहां वादा करते हैं, तो उन्हें अन्य राज्यों में भी वादा करना होगा। वह ऐसा कैसे कर सकता है?”

राज्य में राजनीति में रोजगार और कोटा मुद्दा का प्रभाव साफ नहीं

भारत का सबसे अधिक उद्योग धंधों वाला राज्य महाराष्ट्र है, जहां देश के कुल मतदाताओं का लगभग 10 प्रतिशत (9.23 करोड़) हिस्सा है। रोजगार और कोटा एक मुद्दा है लेकिन वोट देने में उसका प्रभाव साफ नहीं है। ऐसे राज्य में कोई आश्चर्य नहीं जहां राजनीतिक हालात धुंधली और तीक्ष्ण होती जा रही हैं और फिर धुंधली हो जाती हैं।

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हर तरफ असमंजस की स्थिति है, लोगों को किसी को तो वोट देना ही है

स्थिति ऐसी है कि यह पहली बार है कि मतदाता को पता ही नहीं है कि कौन और किसको वोट देना है। यदि उसने 2019 में शिव सेना को वोट दिया, तो अब उसे दो शिव सेनाओं में से किसी एक को चुनना होगा। यदि उसने एनसीपी को वोट दिया, तो उसे दो एनसीपी में से किसी एक को चुनना होगा।

यह कैसे होगा यह तो 4 जून ही बताएगा लेकिन इस असमंजस में एक बात थोड़ी और साफ है। बदलती राजनीतिक निष्ठाओं के इस चक्रव्यूह में बेरोजगारी, मराठा आरक्षण और किसानों के नुकसान के आरोप भी भुला दिए गये हैं। इसका असर बीजेपी-शिवसेना (शिंदे)-एनसीपी (अजित पवार) राज्य सरकार, पिछली राज्य सरकारों और दलों की राजनीति पर भी दिखता है, अकेले मोदी पर नहीं। मुंबई में ड्राइवर के रूप में काम करने वाले शोलापुर के 50 वर्षीय मराठा तानाजी कहते हैं, “मोदी लोगों के दिमाग में बस गए हैं, वह सत्ता में लौटेंगे।”

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उद्यमी दाराकुंडे से लेकर ड्राइवर तानाजी तक और एक उच्च जाति के युवा इंजीनियर से कारेगांव में अपनी पहली नौकरी करने वाले से लेकर अहमदनगर में 10 साल तक चाय की दुकान चलाने वाले तक; मावल में 30 साल के एक वेतनभोगी व्यक्ति से लेकर शिरूर में शरद पवार का समर्थन करने वाले एक किसान तक, इंडियन एक्सप्रेस ने कई मतदाताओं से बात की और उन सभी का कहना समान था। उन सभी के पास कई शिकायतें हैं, लेकिन कुछ ही हैं जिसके लिए वे मोदी को दोषी मानते हैं।

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