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Lok Sabha Elections: RSS के गढ़ में कांग्रेस को क्यों है जीत की उम्मीद? नागपुर में आसान नहीं नितिन गडकरी की राह

नितिन गडकरी को मोदी सरकार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले केंद्रीय मंत्रियों में से एक के रूप में जाना जाता है।
Written by: ईएनएस | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: April 13, 2024 08:47 IST
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नागपुर से नितिन गडकरी चुनाव लड़ रहे हैं। (फोटो सोर्स: @NitinGadkari)
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Vallabh Ozarkar

नागपुर लोकसभा सीट चर्चा में हैं। यहां से बीजेपी के दिग्गज नेता नितिन गडकरी चुनाव लड़ रहे हैं। यह सीट कांग्रेस गढ़ रही है लेकिन पिछले दो चुनावों से यहां बीजेपी जीत रही है। इस बार यहां कांग्रेस को उम्मीद है। 2019 चुनाव में बीजेपी का वोट शेयर 10 प्रतिशत तक बढ़ गया था। नागपुर में लोग बेरोजगारी और नागरिक सुविधाओं जैसे स्थानीय मुद्दों के बारे में बात कर रहे हैं और जाति की डायनामिक्स को देखते हुए कांग्रेस का मानना ​​​​है कि इस बार उसके पास एक मौका है।

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पांच लाख से अधिक वोटों से जीतेंगे गडकरी- बीजेपी

नितिन गडकरी को मोदी सरकार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले केंद्रीय मंत्रियों में से एक के रूप में जाना जाता है। वह मोदी सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों और पिछले दो कार्यकालों में उनके ट्रैक रिकॉर्ड के आधार पर वोट मांग रहे हैं। नागपुर में एक सभा में आत्मविश्वास से भरे गडकरी कहते हैं, ''जीत के बारे में कोई संदेह नहीं है, लेकिन हमें नागपुर में भाजपा के लिए 75% वोट शेयर के लिए प्रयास करना चाहिए।" वहीं उनके समर्थकों का कहना है कि वे इस बार उन्हें पांच लाख से अधिक वोटों से जीतने में मदद करेंगे। नागपुर महाराष्ट्र की उन पांच सीटों में एक है, जहां 19 अप्रैल को पहले चरण में मतदान होगा।

नितिन गडकरी 2014 में 2.16 लाख वोटों से जीते थे और पांच साल बाद उनका वोट शेयर और जीत का अंतर दोनों बढ़ गया। 2019 में कांग्रेस का वोट शेयर भी बढ़ गया था। नितिन गडकरी शहर के हर कोने में रैलियों को संबोधित कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की बात दोहराते हुए प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा, "गडकरी जी को 65% वोट मिलेगा। हमें विश्वास है कि हमारी जीत का अंतर बढ़ेगा। बुनियादी ढांचे के विकास में उनका काम उनकी सफलता है।” भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने बड़े विदर्भ क्षेत्र में भाजपा की उपस्थिति को मजबूत करने में वर्तमान उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

कांग्रेस ने स्थानीय उम्मीदवार पर जताया है भरोसा

लेकिन पिछली बार अंदरूनी कलह से बेपरवाह कांग्रेस का मानना ​​है कि उसके पास नागपुर कांग्रेस अध्यक्ष विकास ठाकरे के रूप में एक मजबूत स्थानीय उम्मीदवार है। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का मानना ​​है कि वह 2019 के विपरीत एक बेहतर विकल्प हैं जब वर्तमान प्रदेश कांग्रेस प्रमुख नाना पटोले को एक बाहरी व्यक्ति के रूप में देखा गया था। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि नागपुर के पूर्व मेयर के रूप में अपने कार्यकाल के कारण विकास ठाकरे एक लोकप्रिय व्यक्ति हैं और उन्हें एक शानदार नेता के रूप में भी देखा जाता है। वर्तमान में वह नागपुर पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। फडणवीस ने दो बार इस विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व किया है।

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ये मुद्दे कर सकते हैं प्रभावित

कांग्रेस उम्मीदवार विकास ठाकरे नगर निकाय चलाने वाली भाजपा के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर पर भरोसा कर रहे हैं। उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहा, "नागपुर के लोग नौकरियों, महंगाई और पानी और बिजली जैसी सुविधाओं को लेकर चिंतित हैं। नगर निकाय भाजपा के पास है लेकिन वे अभी भी पानी उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं और सड़कें भी दयनीय स्थिति में हैं। सिर्फ हर जगह सीमेंट-कंक्रीट डालने से विकास नहीं होता। युवाओं को नौकरी चाहिए और प्रदेशवासियों को समय पर पानी और सस्ती दर पर बिजली चाहिए। भाजपा यह सब प्रदान करने में विफल रही है।"

कांग्रेस को इस बार वंचित बहुजन अघाड़ी, बीएसपी और एआईएमआईएम का भी समर्थन मिलने की उम्मीद है। तीनों पार्टियों ने नागपुर में कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। 2019 में वीबीए और बसपा को लगभग 5% वोट मिले थे। इसे ध्यान में रखते हुए विकास ठाकरे शहर के दलित और मुस्लिम इलाकों में जमकर प्रचार कर रहे हैं और अपने कुनबी (ओबीसी) समुदाय के समर्थन पर भी भरोसा कर रहे हैं। कांग्रेस के एक अंदरूनी सूत्र के मुताबिक विदर्भ में कुनबी समुदाय मराठा आरक्षण के मुद्दे पर भाजपा से नाराज है और यह बात विकास ठाकरे के पक्ष में जा सकती है।

बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा

नागपुर के सीताबर्डी इलाके में एक चाय की दुकान पर राकेश वाघ, जो लगभग तीस साल के हैं और एक निजी कंपनी में काम करते हैं, वह कहते हैं, “हां, नागपुर में बड़े फ्लाईओवर और मेट्रो लाइनें हैं और यह सब अच्छा दिखता है। लेकिन इससे हमारी समस्याएं हल नहीं हुईं। नागरिक सुविधाएं ख़राब हैं। पानी की कटौती एक बड़ी समस्या है और बिजली शुल्क अत्यधिक है। ये मुद्दे हमारे लिए मायने रखते हैं, न कि केवल फ्लाईओवर और मेट्रो के लिए।"

सुयोग केंद्रे कहते हैं, "मध्यम वर्ग, लोअर मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए मुद्दे बुनियादी नागरिक सुविधाएं, बढ़ती महंगाई और नौकरियों की कमी हैं। हम मेट्रो और फ्लाईओवर के निर्माण के खिलाफ बहस नहीं कर रहे हैं, लेकिन अगर युवाओं के पास रोजगार नहीं होगा तो उनका उपयोग कौन करेगा? शिक्षित युवाओं को नौकरी के लिए मुंबई और पुणे की ओर पलायन करना पड़ता है।" हालांकि उसी चाय की दुकान पर एक अन्य ग्राहक ने बुनियादी ढांचे के काम के लिए नितिन गडकरी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वह अपने ट्रैक रिकॉर्ड के कारण फिर से जीतेंगे। लेकिन वह भी इस बात से सहमत हैं कि नागरिक सुविधाओं की कमी और बेरोजगारी प्रमुख मुद्दे हैं जिन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

पीएम मोदी कर चुके हैं प्रचार

अब इतने मुद्दों के बीच नितिन गडकरी भले ही अपने विकास कार्यों का प्रचार करें लेकिन स्थानीय मुद्दे जरूर चुनाव प्रचार को प्रभावित कर रहे हैं।हालांकि नितिन गडकरी नागपुर में डेरा डाले हुए हैं और जमकर चुनाव प्रचार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी नितिन गडकरी के लिए प्रचार कर चुके हैं।

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