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Lok Sabha Election Result 2024: मध्य यूपी में सपा की साइकिल ने मचाया धमाल, यादवलैंड की कायम रही धाक

मैनपुरी सीट पर डिंपल यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जयवीर सिंह को करारी शिकस्त दी है। डिंपल यादव को 596548 मत मिले हैं जबकि जयवीर सिंह को 375616 मत हासिल हुए। डिंपल की जीत 220932 मतों से हुई है। बसपा के शिव प्रसाद यादव को मात्र 66518 मत हासिल हुए। डिंपल यादव से पराजित होने वाले जयवीर सिंह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के पर्यटन मंत्री भी हैं।
Written by: दिनेश शाक्य
नई दिल्ली | Updated: June 05, 2024 10:54 IST
lok sabha election result 2024  मध्य यूपी में सपा की साइकिल ने मचाया धमाल  यादवलैंड की कायम रही धाक
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के साथ उनकी पत्नी और मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव। (यूट्यूब)
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उत्तर प्रदेश में यादवलैंड को समाजवादी पार्टी का प्रमुख आधार स्तंभ माना जाता है। 2024 संसदीय चुनाव के नतीजे में यादव लैंड में समाजवादी पार्टी की साइकिल जमकर दौड़ी है। यादव लैंड में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों के जीतने के पीछे समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले का बड़ा योगदान माना जा रहा है। संविधान को बचाने का मुद्दा इंडिया गठबंधन ने प्रभावी ढंग से उठाया जिसका फायदा इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों को खासी तादाद में मिला है।

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डिंपल यादव ने बीजेपी उम्मीदवार जयवीर सिंह को दी करारी शिकस्त

मैनपुरी सीट पर डिंपल यादव ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जयवीर सिंह को करारी शिकस्त दी है। डिंपल यादव को 596548 मत मिले हैं जबकि जयवीर सिंह को 375616 मत हासिल हुए। डिंपल की जीत 220932 मतों से हुई है। बसपा के शिव प्रसाद यादव को मात्र 66518 मत हासिल हुए। डिंपल यादव से पराजित होने वाले जयवीर सिंह उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के पर्यटन मंत्री भी हैं। मैनपुरी संसदीय सीट के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस सीट पर यादव मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है।

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फिरोजाबाद से सपा के अक्षय यादव ने बीजेपी के विश्वजीत सिंह को हराया

वहीं, फिरोजाबाद संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अक्षय यादव ने जीत हासिल की है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी भारतीय जनता पार्टी के ठाकुर विश्वजीत सिंह को रेकार्ड मत से परास्त किया है। सपा उम्मीदवार अक्षय यादव की 89,185 वोटों से जीत हुई। वह पहले राउंड से ही बढ़त बनाए रहे। उन्हें कुल 5,41,689 वोट मिले हैं। वहीं भाजपा उम्मीदवार विश्वदीप सिंह दूसरे नंबर पर रहे। उन्हें 4,52,504 और तीसरे नंबर पर रहे बसपा के चौधरी बशीर को 90,844 मत मिले हैं।

अक्षय यादव ने साल 2014 में पहली दफा फिरोजाबाद संसदीय सीट से चुनाव लड़ा था जिसमें अक्षय यादव को जीत हासिल हुई थी लेकिन 2019 के संसदीय चुनाव में समाजवादी परिवार में चल रही अनबन के चलते चाचा शिवपाल सिंह यादव भतीजे अक्षय यादव के मुकाबले चुनाव मैदान में खड़े हो गए थे चुनाव बाद जब नतीजा सामने आया तो अक्षय यादव पराजित हो गए।

इटावा में बीजेपी के रामशंकर कठेरिया की सपा के जितेंद्र दोहरे से हुई हार

दूसरी ओर इटावा संसदीय सीट पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो रामशंकर कठेरिया को समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार जितेंद्र दोहरे ने पराजित कर दिया है। मूल रूप से बसपाई जितेंद्र दोहरे ने साल 2020 में समाजवादी पार्टी की सदस्यता ग्रहण की थी। जितेंद्र दोहरे बसपा के महामंत्री के साथ-साथ जिला अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

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पहली दफा संसदीय चुनाव में उतरे जितेंद्र दोहरे की जीत में समाजवादी पार्टी के पीडीए फार्मूले का बड़ा योगदान माना जा रहा है। इटावा संसदीय सीट ने भारतीय जनता पार्टी की हैट्रिक में ब्रेक लगा दिया है। इत्र नगरी के रूप में पहचानी जाने वाली उत्तर प्रदेश की कन्नौज संसदीय सीट पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अखिलेश यादव को करीब पौने दो लाख मतों से जीत हासिल हुई है। अखिलेश यादव ने साल 2009 में कन्नौज संसदीय सीट से आखिरी चुनाव लड़ा था। उसके बाद करीब डेढ़ दशक बाद साल 2024 में अखिलेश यादव ने कन्नौज संसदीय सीट से चुनाव लड़ा है।

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साल 2000 में अखिलेश यादव ने कन्नौज संसदीय सीट से किस्मत आजमाई थी जिसके बाद उन्हें लगातार जीत दर जीत हासिल होती रही। ऐसा बताया जाता है कि नेताजी मुलायम सिंह यादव जब अखिलेश यादव का नामांकन करने के लिए कन्नौज गए तो वहां जनसभा में मतदाताओं के बीच यह कहने से नहीं चूके कि अपने बेटे अखिलेश यादव को आपको सौंप रहा हूं, सांसद बना कर भेज देना। 2019 में सपा बसपा गठबंधन के बावजूद समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार डिंपल यादव कन्नौज संसदीय सीट से भाजपा के सुब्रत पाठक के मुकाबले मामूली अंतर से पराजित हो गई थी।

वहीं, एटा संसदीय सीट पर बड़ा उलटफेर सामने आया है। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार देवेश शाक्य ने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार राजवीर सिंह राजू को कड़ी टक्कर देते हुए करीब 28000 मतों से पराजित कर दिया है। एटा संसदीय सीट से पहली दफा जीत हासिल करने वाले देवेश शाक्य मूल रूप से इटावा जिले के वासी है। देवेश शाक्य अपनी राजनीतिक पारी में पहली दफा जिला पंचायत सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए। देवेश जिला पंचायत अध्यक्ष का भी चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उनको कामयाबी नहीं मिली।

देवेश शाक्य ने जिस अंदाज में अपने पहले संसदीय चुनाव में दिग्गज माने जाने वाले राजवीर सिंह राजू को पराजित किया है ठीक इसी तरह उनके दिवंगत बड़े भाई विनय शाक्य ने अपने पहले विधानसभा चुनाव 2002 में ही पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धनीराम वर्मा को पराजित किया था। देश के हिंदू सेवक कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह राजू की इस तरह से हार होगी यह किसी ने भी नहीं सोचा होगा।

राजनीतिक दृष्टि से एटा लोकसभा को भाजपा का गढ़ माना जाता है। पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के बाद उनके बेटे राजवीर सिंह उर्फ राजू भैया यहां से सांसद बने। इस बार भी भाजपा ने उन पर भरोसा जताया। वहीं समाजवादी पार्टी ने शाक्य मतों के मद्देनजर देवेश शाक्य को मैदान में उतारा। एटा में तीसरे चरण में 7 मई को मतदान हुआ, जिसमें 59 फीसदी लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।

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