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एक का साथ तो छूटेगा… रायबरेली से लड़ रहे राहुल के लिए अमेठी ने पैदा किया धर्मसंकट

कांग्रेस ने शुक्रवार को जैसे ही ऐलान किया कि राहुल नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ी सीट रायबरेली से भी चुनाव लड़ेंगे, बीजेपी और वाम दलों ने इसे 'वायनाड के लोगों के साथ विश्वासघात' करार दिया।
Written by: शाजु फिलिप | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: May 04, 2024 09:21 IST
एक का साथ तो छूटेगा… रायबरेली से लड़ रहे राहुल के लिए अमेठी ने पैदा किया धर्मसंकट
कांग्रेस नेता राहुल गांधी अप्रैल में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। (फोटो: कांग्रेस/एक्स)
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कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सभी अटकलों पर विराम लगाते हुए शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के रायबरेली से अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस पर केरल में बीजेपी और वाम दलों दोनों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई। हालांकि वायनाड के लोगों ने कहा कि राहुल गांधी 2019 में अमेठी के अपनी पारिवारिक सीट पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से हारने के बाद यहां से लोकसभा में पहुंचे थे। ऐसे में भले ही वह दोनों सीटें जीत लें, फिर भी वह सीट नहीं छोड़ेंगे। वायनाड में केरल के बाकी निर्वाचन क्षेत्रों के साथ 26 अप्रैल को दूसरे चरण में मतदान हुआ था।

वायनाड के लोगों ने "विश्वासघात" करार दिया

कांग्रेस ने शुक्रवार को जैसे ही ऐलान किया कि राहुल नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ी सीट रायबरेली से भी चुनाव लड़ेंगे, बीजेपी और वाम दलों ने इसे "वायनाड के लोगों के साथ विश्वासघात" करार दिया। वायनाड में अपने अभियान के दौरान राहुल ने यूपी में चुनाव लड़ने का कोई संकेत नहीं दिया था। तब सीपीआई (एम) के नेतृत्व वाले वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), जो कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की मुख्य विरोधी है, ने यह कहकर आलोचना की थी कि कांग्रेस नेता "हिंदी पट्टी से भाग गए हैं।"

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वायनाड वालों ने जताई उम्मीद- हमें नहीं छोड़ेंगे राहुल

हालांकि वायनाड के लोगों की आम धारणा यह है कि अगर राहुल गांधी रायबरेली सीट भी जीत लेते हैं तब भी वह वायनाड निर्वाचन क्षेत्र से सांसद बने रहना पसंद करेंगे। वायनाड के पुलपल्ली के एक किसान एम वी पॉलोज़ का मानना है कि वायनाड ने "2019 के चुनावों में राहुल को बचाया।" उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि अगर वह रायबरेली से भी जीतते हैं तो वह इस सीट को बरकरार रखेंगे। हमें यकीन है कि वह वायनाड में जीतेंगे, जो हमेशा कांग्रेस के लिए सबसे सुरक्षित सीट रही है। लोग राहुल के रायबरेली से चुनाव लड़ने के खिलाफ नहीं हैं. पिछली बार भी उन्होंने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इसका वायनाड के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ा।''

राहुल गांधी ने खुद को "वायनाड का भाई और बेटा" कहा था

जब राहुल ने इस बार वायनाड में प्रचार किया, तो उन्होंने खुद को लोगों के परिवार का सदस्य - "वायनाड का भाई और बेटा" कहकर मतदाताओं के साथ तालमेल बिठाने की कोशिश की। उनकी प्रचार रैलियां और रोड शो में कांग्रेस या यूडीएफ के किसी अन्य घटक के झंडे आदि नहीं थे।

वायनाड के मुत्तिल में आईयूएमएल कार्यकर्ता एमके अली ने राहुल के रायबरेली से चुनाव लड़ने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, “कई लोग (राहुल के) फैसले पर चर्चा कर रहे हैं। अधिकतर लोगों ने इसका स्वागत किया, क्योंकि यह बीजेपी के अभियान का करारा जवाब था। अगर राहुल के रायबरेली से चुनाव लड़ने से इंडिया ब्लॉक को कुछ और सीटें जीतने में मदद मिलती है, तो हमें आपत्ति क्यों होनी चाहिए? जब वह वायनाड में चुनाव लड़ने आए तो पहले से ही चर्चा थी कि वह किसी अन्य सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। वायनाड राहुल के लिए निश्चित जीत है। हम नहीं जानते कि रायबरेली में क्या होगा, लेकिन वह वायनाड को नहीं छोड़ सकते।''

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मुल्लानकोल्ली पंचायत के एक स्वतंत्र सदस्य जोस नेलेडोम ने कहा, “राहुल ने हमेशा दावा किया है कि वायनाड उनका दूसरा घर है। इस हिसाब से तो उन्हें यह सीट बरकरार रखनी होगी। जब परिवार की इस सीट से भावनात्मक लगाव के बावजूद अमेठी ने उनका समर्थन नहीं किया, तो वायनाड के लोगों ने उनके लिए बड़ी जीत सुनिश्चित की।"

उन्होंने कहा, "वह एक राष्ट्रीय नेता हैं और लोग राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य को समझते हैं। इसलिए, मुझे लगता है कि लोग उनके फैसले का समर्थन करेंगे।'' मेप्पडी निवासी हुसैन ने कहा, “हमें उम्मीद है कि राहुल वायनाड को बरकरार रखेंगे। उन्हें हम प्रेम करते हैं। उन्होंने निर्वाचन क्षेत्र में गरीबों के लिए बहुत कुछ किया है।”

वायनाड में 2019 में 79.77 फीसदी की तुलना में 2024 में 73.57 फीसदी मतदान हुआ, लेकिन कांग्रेस सूत्रों ने कहा कि वे गिरावट से चिंतित नहीं हैं। उनमें से एक ने कहा, “कई युवा उच्च शिक्षा या नौकरी के लिए विदेश गए हैं। मुख्य रूप से मतदान में गिरावट इसी वजह से हुई।''

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