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मुद्दों की लड़ाई: जाटलैंड से बीजेपी तय करेगी दिल्ली का रास्ता, विपक्ष को बचाना लोकतंत्र

अगर इन दोनों ही रैलियों को ध्यान से देखा और समझा जाए तो साफ पता चलता है कि इंडिया और एनडीए किन मुद्दों के साथ इस बार चुनाव में आगे बढ़ने वाले हैं।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | April 01, 2024 00:43 IST
मुद्दों की लड़ाई  जाटलैंड से बीजेपी तय करेगी दिल्ली का रास्ता  विपक्ष को बचाना लोकतंत्र
लोकसभा चुनाव को लेकर सेट हुआ पूरा माहौल
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लोकसभा चुनाव का पहला सुपर संडे शानदार और सियासी रूप से काफी महत्वपूर्ण रहा। अगर एक तरफ राजधानी दिल्ली में इंडिया गठबंधन एकजुट हुआ तो दूसरी तरफ पश्चिमी यूपी का मेरठ एनडीए की ताकत का गवाह बना। अगर दिल्ली से लोकतंत्र बचाओ की हुंकार सुनने को मिली तो मेरठ से भ्रष्टाचार खत्म करो की ललकार रही। एक तरफ अगर अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की रिहाई की मांग हुई तो दूसरी तरफ पीएम मोदी की गारंटी की गूंज जनता के बीच में सुनाई पड़ी।

अगर इन दोनों ही रैलियों को ध्यान से देखा और समझा जाए तो साफ पता चलता है कि इंडिया और एनडीए किन मुद्दों के साथ इस बार चुनाव में आगे बढ़ने वाले हैं। इंडिया गठबंधन तो साफ कर चुका है कि वो लोकतंत्र बचाने की लड़ाई इस बार पुरजोर तरीके से लड़ने वाला है। जिस तरह से कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ ईडी कार्रवाई कर रही है, जिस तरह से अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी हुई है, उसे देखते हुए विपक्ष अभी इसी नॉरेटिव पर आगे बढ़ने वाला है कि भाजपा सत्ता में रहकर सिर्फ जांच एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है।

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वहीं दूसरी तरफ इन्हीं कार्रवाई को सही ठहराते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के पक्ष में भी माहौल बनाने की कोशिश की है। मेरठ की रैली में उन्होंने कई मौका पर जोर देकर बोला कि गरीबों का जो भी पैसा लूट गया है उसे वापस लाया जाएगा। उन्होंने अपनी गारंटी बताते हुए साफ कहा कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई हर कीमत पर होकर रहेगी।

वैसे इसी सुपर संडे में एक दिलचस्प बात ये भी रही कि विपक्ष ने अगर दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान को चुना तो प्रधानमंत्री मोदी ने बीजेपी का चुनावी शंखनाद उस मेरठ की धरती से किया जहां से 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में भी जीत की सियासी पिच तैयार की गई थी। अगर एक तरफ दिल्ली का रामलीला मैदान सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के आंदोलन की वजह से लोकप्रिय हुआ तो दूसरी तरफ 1857 की क्रांति ने मेरठ को इतिहास के पन्नों में दर्ज करवाया। अगर दिल्ली के रामलीला मैदान ने अरविंद केजरीवाल जैसे नेता को उठने का मौका दिया तो दूसरी तरफ मेरठ ने बीजेपी को जाट लैंड में अपनी पकड़ मजबूत करने का एक सुनहरा मौका दिया।

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अब क्योंकि बीजेपी ने जाट लैंड माने जाने वाले मेरठ से एक बार फिर अपना सियासी अभियान की शुरुआत की है तो प्रधानमंत्री मोदी ने भी बड़ा दांव चलते हुए किसानों को साधने का काम किया। समय-समय पर चौधरी चरण सिंह को याद किया और उनको दिए गए भारत रत्न का कई मौकों पर जनता के बीच में उत्साह के साथ जिक्र किया।

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चुनाव का पूरा शेड्यूल यहां जानिए

अगर पश्चिमी यूपी के सियासी समीकरण की बात करें तो उसको जान सब समझ आता है कि आखिर क्यों एनडीए ने एक बार फिर मेरठ के जरिए ही अपनी चुनावी परी की शुरुआत की है। असल में पश्चिमी यूपी में कुल 14 जिले हैं और वहां पर जाटों की आबादी 17% के करीब बैठती है। वही मथुरा में 40, बागपत में 30 और सहारनपुर में 20% जाट आबादी है। अब पीएम मोदी को पता है कि बीजेपी को अगर यूपी में 80 की 80 सीटें जींतनी है तो पश्चिमी यूपी में जाटों का पूर्ण समर्थन मिलना जरूरी है। इसी वजह से चौधरी चरण सिंह का जिक्र तो किया ही गया, जयंत चौधरी को भी एक ही मंच पर साथ लाया गया।

अब ये तो बीजेपी की रणनीति थी, लेकिन अगर इंडिया गठबंधन की बात करें तो दिल्ली से अपने चुनावी अभियान की शुरुआत करना भी एक बड़ा सियासी दांव है। यहां समझने वाली बात ये है कि आम आदमी पार्टी के लिए तो रामलीला मैदान उनकी सबसे बड़ी पृष्ठभूमि है। आंदोलन करके एक राष्ट्रीय पार्टी बनी आम आदमी पार्टी के लिए रामलीला मैदान ऐतिहासिक है, हर मायने में राजनीतिक रूप से उसे समय-समय पर फायदा भी देता रहा है। इसी वजह से इस समय जब उनकी पार्टी के सबसे बड़े नेता अरविंद केजरीवाल गिरफ्तार हैं तो इंडिया गठबंधन की पहली और सबसे बड़ी रैली दिल्ली के रामलीला मैदान में ही करवाई गई है।

राहुल गांधी से लेकर तेजस्वी यादव तक, फारूक अब्दुल्ला से लेकर महबूबा मुफ्ती तक, अखिलेश यादव से लेकर उद्धव ठाकरे तक, हर बड़ा चेहरा एक मंच पर साथ आया और सभी ने एक सुर में अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के खिलाफ आवाज बुलंद की। इंडिया गठबंधन की दिल्ली वाली रैली की हाईलाइट रहा सुनीता केजरीवाल का भाषण और कल्पना सोरेन की मोदी के खिलाफ हुंकार। एक तरफ सुनीता केजरीवाल ने 6 गारंटियों का ऐलान कर पूरे इंडिया गठबंधन के सामने एक एजेंडा सेट कर दिया तो वही कल्पना सोरेन ने तानाशाही जैसे शब्दों का प्रयोग कर भाजपा पर करारा प्रहार किया। इसके ऊपर राहुल गांधी से लेकर तेजस्वी यादव तक ने पीएम मोदी के 400 प्लस वाले आंकड़े की खुलकर खिल्ली उड़ाई। राहुल गांधी ने तो दावा कर दिया कि बीजेपी इस बार 180 सीटों से ज्यादा नहीं जीत पाएगी।

यानी कि इंडिया गठबंधन के मुद्दों की बात करें तो वो लोकतंत्र बचाने से लेकर जांच एजेंसी के दुरुपयोग जैसे मुद्दों के जरिए इस बार पीएम मोदी को हराने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी मोदी के चेहरे के साथ विकसित भारत का सपना दिखाकर जनता से तीसरी टर्म की मांग कर रही है।

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