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Godda Seat: बीजेपी के निशिकांत दुबे को अपने ही खास से मिल रही कड़ी चुनौती, जीत के लिए पार्टी की यह है रणनीति

गोड्डा संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा क्षेत्र जरमुंडी, मधुपुर, देवघर, पौरैयाहात, गोड्डा और महगामा है। इन्हें भाजपा का गढ़ माना जाता है। यहां 1989, 1996, 1998, 1999 , 2009 से 2019 यानी सात बार भाजपा का कमल खिला है। यहां से 2009, 2014 और 2019 के चुनाव में निशिकांत दुबे ने जीत हासिल की थी।
Written by: गिरधारी लाल जोशी
नई दिल्ली | Updated: May 28, 2024 13:59 IST
godda seat  बीजेपी के निशिकांत दुबे को अपने ही खास से मिल रही कड़ी चुनौती  जीत के लिए पार्टी की यह है रणनीति
Godda Lok Sabha Chunav Result 2024: गोड्डा लोकसभा सीट से बीजेपी के निशिकांत दुबे क्या चौथी बार मारेंगे बाजी? (एक्सप्रेस फाइल)
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झारखंड के गोड्डा लोकसभा क्षेत्र पर बीजेपी उम्मीदवार निवर्तमान सांसद निशिकांत दुबे के लिए चौथी बार कमल खिलाना आसान नहीं है। इसी वजह से गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव सरीखे बीजेपी की फौज प्रचार करने उतरी है। इनका मुकाबला कांग्रेस के प्रदीप यादव से है। इनके लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी चुनावी सभा कर गए हैं। संथाल परगना की गोड्डा सीट के 19 लाख मतदाता एक जून को ईवीएम की बटन दबाकर मतदान करेंगे।

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मैथिली ब्राह्मण बिरादरी के होने से हो सकते हैं वोटकटवा

बीजेपी के निशिकांत के लिए इनके कभी खास रहे अभिषेक झा ने मुश्किल कर दी है। ये निर्दलीय नामांकन कर चुनावी मैदान में डट गए हैं। मैथिली ब्राह्मण बिरादरी के होने के नाते ये वोटकटवा हो सकते हैं। पूर्व महापौर राजनारायण खवाड़े उर्फ बबलू खवाड़े की चुप्पी भी निशिकांत के लिए घातक हो सकती है। ये पंडा समाज से है। गोड्डा संसदीय क्षेत्र में मैथिली ब्राह्मण का वोट करीबन ढाई लाख है। हालांकि बीजेपी प्रत्याशी निशिकांत ने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण करने की कोशिश की थी।

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18 मार्च को बागेश्वर बाबा को भी देवघर बुलाया था

चुनाव की घोषणा के पहले 18 मार्च को इन्होंने संत सम्मेलन की आड़ में बागेश्वर धाम के बाबा धीरेंद्र शास्त्री को देवघर बुलवाया था। देवघर के शोभन नरौने हजारों की जुटी भीड़ मतदान में तब्दील हो सकेगी, इस पर आशंका जताते हैं। इसके अलावा ओवैसी की पार्टी एआइएमएआइ के उम्मीदवार मो मंसूर के अपना नामांकन वापस लेने से भी कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप यादव के मतों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है।

कांग्रेस के प्रदीप यादव अपने पारंपरिक मतों और झामुमो के संथाल आदिवासी मतों के एक साथ आने से हौसला बुलंद किए हुए हैं। यों दोनों ही प्रत्याशी गांव-गांव घूमकर प्रचार कर रहे हैं। निवर्तमान सांसद निशिकांत दुबे का विरोध भी कम नहीं है। त्रिकुटी पहाड़ पर रोपवे हादसे के बाद चालू न होने के पीछे इन्हीं की साजिश यहां के लोग मानते हैं। अडानी के पावर प्लांट में जमीन से बेदखल हुए लोग भी इन्हीं को दोषी करार देते हैं। मगर हकीकत यह है कि देवघर में एम्स, हवाई अड्डा, गोड्डा रेलवे से जुड़ जाना वगैरह उपलब्धियां भी लोग गिनाते हैं। वहीं प्रदीप यादव के लिए पूर्व मंत्री सुरेश पासवान और प्रदेश राजद सचिव संजय भारद्वाज अपनी टीम के साथ लगे हैं।

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गोड्डा संसदीय क्षेत्र में छह विधानसभा इलाका जरमुंडी, मधुपुर, देवघर, पौरैयाहात, गोड्डा और महगामा है। यह बीजेपी का गढ़ माना जाता है। यहां 1989, 1996, 1998, 1999 , 2009 से 2019 यानी सात बार बीजेपी का कमल खिला है। यहां से 2009, 2014 और 2019 का चुनाव निशिकांत दुबे ने फतह की है। पिछला चुनाव इन्होंने पौने दो लाख से ज्यादा मतों से जीता था। 2019 चुनाव में प्रदीप यादव को ही पराजित किया था। तब वे झारखंड विकास पार्टी में थे। 2004 का चुनाव इन्होंने बीजेपी के कमल से लड़ा था। और कांग्रेस के फुरकान अंसारी से शिकस्त खा गए थे। लेकिन अबकी कांटे की टक्कर है।

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