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एक रैली अनगिनत संदेश, इंडिया गठबंधन वालों ने दिल्ली के रामलीला मैदान को ही क्यों चुना?

Ramleela Ground Histroy: रामलीला मैदान में हुई विपक्षी नेताओं की रैली में खास बात यह रही कि ईडी द्वारा गिरफ्तारी के चलते अरविंद केजरीवाल इसमें शामिल नहीं हो सके, जिनकी राजनीति ही इसी ऐतिहासिक मैदान से शुरू हुई थी।
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | Updated: March 31, 2024 21:37 IST
एक रैली अनगिनत संदेश  इंडिया गठबंधन वालों ने दिल्ली के रामलीला मैदान को ही क्यों चुना
दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई इंडिया गठबंधन की महारैली (सोर्स - एक्सप्रेस फोटो)
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Lok Sabha Elections 2024: लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है और विपक्षी दलों द्वारा बनाए गए इंडिया गठबंधन (India Alliance Rally) ने आज दिल्ली में एक बड़ी महारैली की गई थी। खास बात यह रही कि यह रैली दिल्ली के रामलीला मैदान (Ramleela Maidan History) में हुई, जो कि देश के कई बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों का गवाह रहा है, जिसका इतिहास सबसे अहम है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने खुद इसी रामलीला मैदान से अपनी राजनीति की शुरुआत की थी।

आम आदमी पार्टी ने रामलीला मैदान में विशाल रैली करने के लिए सारी तैयारियां की थी और आप नेता गोपाल राय ने रामलीला मैदान को आंदोलनों की जन्मस्थली बताया था। उनका कहना था कि वह राह से भटके नहीं, क्योंकि यह वही स्थान है जहां 2011 में सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के नेतृत्व में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन केंद्रित था।

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अन्ना हजारे के उस आंदोलन के कारण अंततः आम आदमी पार्टी अस्तित्व में आई थी। इसके चलते ही कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार केंद्र की सत्ता से बाहर हो गई थी। इतना ही नहीं दिल्ली में भी पूर्व सीएम मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की भी सरकार चली गई थी।

कब बना था दिल्ली का रामलीला मैदान

रामलीला मैदान के इतिहास की बात करें तो यह 1930 के दशक की शुरुआत में इसे तालाब को भरकर बनाया गया था। दिल्ली इतिहासकार नारायणी गुप्ता के अनुसार अजमेरी गेट के पास का मैदान, जहां वर्तमान में मैदान स्थित है, 19वीं शताब्दी में ही रामलीला समारोहों की मेजबानी करता था। अंतिम मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने खुद इसके मार्ग में बदलाव का आदेश दिया था। ज़फ़र का शासनकाल 1837 से 1857 तक रहा। 1876 तक, चांदनी चौक के माध्यम से जुलूस के बाद, गेट के बाहर रामलीला मनाने का रिवाज था, जो आज रामलीला मैदान से लगभग एक किलोमीटर दूर है।

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दशकों से यह मैदान केवल सेलिब्रेशन का नहीं बल्कि भारतीय राजनीति का अहम गढ़ भी रहा है। 1975 में इसी मैदान पर जय प्रकाश नारायण द्वारा पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के खिलाफ आंदोलन किया गया था। इंदिरा ने 1971 में लोकसभा के लिए अपने चुनाव में कदाचार का आरोप लगाते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय में एक याचिका खो दी थी। रायबरेली से उनकी चुनावी जीत को अमान्य घोषित कर दिया गया था।

इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल

सुप्रीम कोर्ट से इंदिरा गांधी को आंशिक राहत मिल गई थी लेकिन उन्होंने अपने पद से इस्तीफा नहीं दिया था। जेपी नारायण ने 25 जून को रामलीला मैदान में एक विशाल रैली बुलाई, जहां उन्होंने पीएम के इस्तीफे के लिए दबाव बनाने के लिए एक सप्ताह के सत्याग्रह की घोषणा की। उनके भाषण के कुछ देर बाद ही इंदिरा ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी।

1977 में बनी थी पहली गैर कांग्रेसी सरकार

1977 में आपातकाल हटने के बाद जेपी नारायण लाखों लोगों के साथ एक और विशाल रैली को संबोधित करने के लिए रामलीला मैदान में लौटे थे। उन्होंने लोगों से "स्वतंत्रता और गुलामी" के बीच चयन करने का अवसर न चूकने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा था कि इस बार सवाल यह नहीं है कि जनता पार्टी या कांग्रेस चुनाव में जीती या नहीं, बल्कि यह है कि "आप और आपके बच्चे और देश आजाद होगा या गुलाम।" उस वर्ष जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव जीता और केंद्र में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनाई।

रामलीला मैदान से ही हुई थी आप की शुरुआत

साल 2011 में अन्ना हजारे ने इसी मैदान से जनलोकपाल की मांग को लेकर आंदोलन किए थे। इसी आंदोलन में उनके साथ अरविंद केजरीवाल भी थे। इसी आंदोलन से आम आदमी पार्टी का जन्म हुआ था और तीन बार दिल्ली में सरकार बनाई थी। अब दिलचस्प बात यह है कि आज जब इंडिया गठबंधन की रैली हो रही थी, तो उसमें अरविंद केजरीवाल गठबंधन में होने के बावजूद भी मौजूद नहीं थे, क्योंकि दिल्ली के कथित शराब घोटाले के आरोप में ईडी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और वे 1 अप्रैल तक ईडी की हिरासत में हैं।

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