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हिमाचल प्रदेश: शिमला सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर

कांग्रेस के उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी कृष्णदत्त सुल्तानपुरी के बेटे हैं, जो शिमला सीट से लगातार छह बार सांसद रहे हैं। आज तक इस सीट पर इतनी बार कोई भी नेता लोकसभा चुनाव नहीं जीता है।
Written by: पंकज रोह‍िला | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 29, 2024 12:36 IST
हिमाचल प्रदेश  शिमला सीट पर भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर
प्रतीकात्मक तस्वीर। (इमेज- एक्सप्रेस फाइल फोटो)
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भाजपा उम्मीदवार सुरेश कश्यप की बात करें तो वह 53 वर्ष के हैं और वायु सेना में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। शपथपत्र में उन्होंने बताया है कि उनके पास कुल 18 हजार रुपए नकद हैं और इनके विभिन्न बैंक में 11 खातों में भी जमा पूंजी है।

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इसके अलावा सौ ग्राम सोना व अन्य जेवरात हैं, जिनका बाजार मूल्य करीब साढ़े सात लाख रुपए है। उनके विभिन्न बैंक के माध्यम से पांच लोन भी चल रहे हैं। उन्होंने अपना चुनावी सफर बीडीसी सदस्य के रूप में शुरू किया था। वर्ष 2007 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर पच्छाद विधानसभा से चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए। इसके बाद 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने जीत हासिल की थी। बाद में भाजपा ने उन्हें वर्ष 2019 में लोकसभा का उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस नेता धनीराम शांडिल को बड़े मतों के अंतर से मात दी थी।

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दूसरी ओर, कांग्रेस के उम्मीदवार विनोद सुल्तानपुरी 42 वर्ष के हैं और कसौली विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। इनके पास दो लाख रुपए नकद हैं, जबकि पत्नी के पास केवल 25 हजार रुपए नकद हैं। विनोद सुल्तानपुरी के विभिन्न सात बैंकों में खाते हैं। इनके पास दो गाड़ियां और दो सौ ग्राम सोना है। विनोद सुल्तानपुरी वर्ष 2012 व 2017 के विधानसभा चुनाव में हार गए थे, मगर 2022 के चुनाव में उन्होंने वापसी की। वह कृष्णदत्त सुल्तानपुरी के बेटे हैं, जो शिमला सीट से लगातार छह बार सांसद रहे हैं। आज तक इस सीट पर इतनी बार कोई भी नेता लोकसभा चुनाव नहीं जीता है।

लोकसभा चुनाव के बाद नीतीश एक बार फिर ‘पलटी’ मारेंगे : तेजस्वी

ष्ट्रीय जनता दल (राजद) नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के एक बार फिर ‘पलटी’ मारने की भविष्यवाणी करते हुए दावा किया कि लोकसभा चुनाव परिणाम आने के बाद जनता दल यूनाइटेड (जदयू) अध्यक्ष एक बड़ा फैसला ले सकते हैं। उन्होंने पटना में संवाददाताओं से बातचीत के दौरान कहा, हमारे चाचा (जदयू प्रमुख नीतीश कुमार) पिछडों की राजनीति और पार्टी बचाने के लिए कोई भी बड़ा फैसला चार जून के बाद ले सकते हैं।

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नीतीश कुमार के महागठबंधन से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग)में चले जाने के कारण तेजस्वी यादव को इस साल जनवरी में उप मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। यह पूछे जाने पर कि क्या वह जदयू अध्यक्ष के साथ फिर से गठबंधन करेंगे तेजस्वी ने यादव ने कहा, यह बाद में देखा जाएगा। तेजस्वी ने यह भी दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में वापस नहीं आएंगे। राजद नेता ने कहा, मोदी हार गए हैं। वह चार जून के बाद प्रधानमंत्री नहीं रहेंगे।

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देश में एक नई सरकार होगी, जो रोजगार सृजन की बढ़ती जरूरत के प्रति संवेदनशील होगी। पिछले एक दशक में नीतीश कुमार ने दो मौकों पर भाजपा से नाता तोड़ तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद के नेतृत्व वाली राजद के साथ गठबंधन किया। नीतीश का 1990 के दशक से भाजपा से गठजोड़ रहा है और राजद से नाता तोड़ने के बाद उन्होंने दोनों बार केंद्र की सत्तारूढ़ पार्टी भाजपा नीत राजग में वापसी की। यह पूछे जाने पर कि क्या वह एक जून को विपक्षी इंडिया गठबंधन की प्रस्तावित बैठक में भाग लेंगे, तेजस्वी यादव ने कहा, हां, बैठक होगी तो हमलोग जाएंगे।

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