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हापुड़: तीन सांसद वाले जिले में समस्याओं का अंबार

हापुड़ विधानसभा क्षेत्र मेरठ लोकसभा सीट का हिस्सा है जबकि गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा अमरोहा लोकसभा से जोड़ा हुआ है तो धौलाना विधानसभा को गाजियाबाद लोकसभा सीट से जुड़ी है।
Written by: जनसत्ता | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: March 24, 2024 12:15 IST
हापुड़  तीन सांसद वाले जिले में समस्याओं का अंबार
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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दीपक अग्रवाल

देश में उत्तर प्रदेश का हापुड़ ऐसा पहला अनूठा जनपद है, जिसका अपना कोई सांसद नहीं है, लेकिन यहां की जनता तीन सांसदों का चुनाव करती है। इस जनपद का सृजन पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में 2011 में हुआ था। 12 वर्ष बाद भी यहां समस्याओं का अंबार है। चुनाव आयोग के निर्देशानुसार, जनपद में दूसरे चरण में 26 अप्रैल को शुक्रवार दिन तीन लोकसभा सीटों के लिए मतदान होगा।

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इसमें 11 लाख 52 हजार 662 मतदाता तीनों लोकसभा सीटों के उम्मीदवारों के लिए मतदान कर भाग्य का फैसला करेंगे। इसमें 6 लाख 17 हजार 628 पुरुष और 5 लाख 34 हजार 985 महिला मतदाता अपने मत का इस्तेमाल करेंगे। जिले में हापुड़, धौलाना और गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा क्षेत्र शामिल है।

हापुड़ विधानसभा क्षेत्र मेरठ लोकसभा सीट का हिस्सा है जबकि गढ़मुक्तेश्वर विधानसभा अमरोहा लोकसभा से जोड़ा हुआ है तो धौलाना विधानसभा को गाजियाबाद लोकसभा सीट से जुड़ी है। इस तरह हापुड़, गढ़मुक्तेश्वर व धौलाना तहसील के मतदाता तीन लोकसभा सीटों के प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला करते हैं। यानि जनपद में 442 मतदान केंद्रों के 1048 बूथों पर मतदान होगा। हापुड़ विधानसभा में 203043 पुरुष मतदाता व 175701 महिला तथा 23 थर्ड जेंडर मतदाता हैं यानि कुल 3 लाख 78 हजार 767 मतदाता मेरठ सांसद का चुनाव करेंगे।

इसी प्रकार धौलाना विधानसभा में 4 लाख 21 हजार 430 मतदाता हैं। यहां 2,25,119 पुरुष, 1,96,291 महिला व थर्ड जेंडर 20 मतदाता गाजियाबाद लोकसभा सांसद चुनेंगे। वहीं, गढ़मुक्तेश्वर में 3 लाख 52 हजार 465 मतदाता हैं। इसमें 1,89,466 पुरुष, 1,62,993 महिला व 6 थर्ड जेंडर मतदाता अमरोहा सांसद को चुनेंगे। 2009 में हुए परिसीमन के आधार पर हापुड़ जिले की तीन विधानसभा देश की तीन लोकसभा क्षेत्र में बंट गई हैं।

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जिला निर्वाचन अधिकारी प्रेरणा शर्मा ने बताया कि एक जनवरी 2024 तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले 14 हजार 328 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए हैं। जनपद सर्जित होने के बाद दो बार हुए लोकसभा चुनावों में गाजियाबाद व मेरठ लोकसभा सीट पर भाजपा ने कमल खिलाया, लेकिन जिले का कोई अपना औद्योगिक क्षेत्र नहीं बन पाया। वहीं, धौलाना औद्योगिक क्षेत्र यूपीएसआइडीसी क्षेत्र का प्रभार गाजियाबाद उद्योग विभाग के अधीन है तो हापुड़ के मेरठ रोड पर धीरखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र में लाइसेंस मेरठ जनपद से लेने पड़ते हैं। वहीं, गढ़मुक्तेश्रवर में तो कोई औद्योगिक क्षेत्र ही नहीं है।

उधर, अमरोहा लोकसभा से जुड़ी तीर्थनगरी गढ़मुक्तेश्वर के हालात भी बद से बदतर हैं। हरिद्वार के उत्तराखंड में चले जाने के बाद प्रदेश सरकार तीर्थनगरी का पर्यटन उद्योग के रूप में विकास करने में जुटी है, लेकिन आज भी वहां बदहाली है। क्षेत्र के सिंभावली व बृजनाथपुर चीनी मिल भी किसानों का गन्ना भुगतान रो-रोकर करती है। मेरठ लोकसभा से तीन बार सांसद बने राजेंद्र अग्रवाल ने हापुड़ की जनता को राहत दिलाने के लिए कुछ समय पूर्व लोकसभा में रेलवे क्रासिंग पर ओवरब्रिज बनाने की मांग की थी। वो अपने कार्यकाल में जनसमस्या हल कराने में ही जुटे रहे।

लोकसभा में भाजपा तो विस में गठबंधन के प्रत्याशी जीते

वर्ष 2019 में हापुड़ विधानसभा में भाजपा के सांसद राजेंद्र को गठबंधन प्रत्याशी हाजी याकूब से 18446 वोटों से शिकस्त मिली थी। तो धौलाना मे भाजपा के केंद्रीय मंत्री वीके सिंह को गठबंधन प्रत्याशी से 10547 वोट कम मिली थी। जनता का कहना है कि भाजपा सांसदों ने विधानसभा क्षेत्रों में हार के कारण ही किनारा किया है।

जबकि अमरोहा गढ़ सीट पर तो बसपा के दानिश अली ने भाजपा सांसद कंवर सिंह तंवर को 2019 में हरा दिया था।अमरोहा लोकसभा क्षेत्र के बृजघाट व तिगरी धाम के बीच बहने वाली गंगा नदी को जोड़ने वाले पुल की अहम मांग लंबे समय से जारी है। जिससे स्पष्ट है कि जनपद मे सभी लोकसभा सीटो पर सांसदों की ओर से समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है।

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