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Lok Sabha Chunav 2024: राजस्थान के इन गांवों में क्यों हावी है आरक्षण का मुद्दा? पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट

लोकसभा चुनाव: राजस्थान में दूसरे चरण में आदिवासी अंचल कहे जाने वाला दक्षिणी राजस्थान में, जहां डूंगरपुर-बांसवाड़ा, उदयपुर, जालौर सिरोही लोकसभा सीटें आती हैं, आरक्षण का मुद्दा बीजेपी के लिए चुनौती बन सकता है।
Written by: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: April 24, 2024 19:38 IST
lok sabha chunav 2024  राजस्थान के इन गांवों में क्यों हावी है आरक्षण का मुद्दा  पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट
राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा से जनसत्ता.कॉम की ग्राउंड रिपोर्ट (Photo by Mohammad Qasim)
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पूर्वी राजस्थान के गांवों की चौपालों पर आरक्षण और संविधान चर्चा में है। यहां मीडिया के 'गिरते स्तर', राम मंदिर, धारा 370 पर भी चुनावी बातचीत आम है।

'संविधान खत्म होने की बात हो रही है, क्या यह गलत है? मुझे लगता है यह गलत नहीं है, जो एसटी\ओबीसी जनरल हैं,इन्हें जो आरक्षित सीटें दे रखी हैं सरकार ने, यह संविधान में लिखी हुई बात है, अगर संविधान खत्म हो गया तो आरक्षण भी गया।'

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यह बात प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे गंगापुर सिटी ज़िले के डिबस्या गांव के एक छात्र ने कही।

आरक्षण और संविधान पर क्यों है इतनी चर्चा? 

पूर्वी राजस्थान में ST,SC,OBC मतदाताओं की बड़ी संख्या है। पिछले दिनों अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट दौसा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा था कि भाजपा 400 सीट का नारा इसलिए दे रही है ताकि संविधान को बदल सके। कांग्रेस के तमाम बड़े नेता इस मुद्दे पर बीजेपी को घेर रहे हैं। ऐसे में लोगों के बीच यहां यह मुद्दा काफी चर्चित है कि संविधान बदलेगा तो उसके साथ आरक्षण भी खत्म कर दिया जाएगा।

इससे पहले नागौर लोकसभा सीट से बीजेपी प्रत्याशी ज्योति मिर्धा ने एक सभा में कहा था कि संविधान में बदलाव के लिए 400 सीटों की जरूरत है।' उनके इस बयान के बाद भाजपा द्वारा आरक्षण खत्म करने की धारणा ने जमीन पकड़ ली। भाजपा इसका नुकसान 2020 में  बिहार विधानसभा चुनाव में उठा चुकी है। तब आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत के 'आरक्षण की समीक्षा' करने के बयान ने तूल पकड़ लिया था।

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हालांकि, भाजपा इसे कांग्रेस की फैलाई गई अफवाह बता रही हैं। प्रधानमंत्री अपनी  चुनावी रैली में आरक्षण ना खत्म करने की बात कह रहे हैं। एक चुनावी सभा में तो पीएम ने यहां तक कह दिया कि अगर खुद बाबा साहब अंबेडकर भी आ जाएं तो आरक्षण खत्म नहीं हो सकता।

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राजस्थान में दूसरे चरण में आदिवासी अंचल कहे जाने वाले दक्षिणी राजस्थान की डूंगरपुर-बांसवाड़ा, उदयपुर, जालौर सिरोही लोकसभा सीटों पर मतदान होना है। आरक्षण का मुद्दा बीजेपी के लिए यहां भी चुनौती बन सकता है।

क्या कहते हैं गांव के लोग?  

गांव के किसान राजराम पटेल कहते हैं,'संविधान को खत्म करने की कोशिश कोई नहीं कर सकता, जिस वक्त संविधान को खत्म करने की कोशिश हुई गदर मच जाएगा। यह ना कांग्रेस से खत्म होगा ना बीजेपी से होगा।'

गंगापुर सिटी ज़िले के गांव में एक बुजुर्ग (Photo by Mohammad Qasim)

टोंक सवाई माधोपुर लोकसभा से कांग्रेस के उम्मीदवार हरीश मीना ने भी जनसत्ता.कॉम के साथ बातचीत में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया और कहा कि बीजेपी संविधान को खत्म करना चाहती है। संविधान को कुचल रही है और इसका उदाहरण अरविंद केजरीवाल और हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी है।

गंगापुर सिटी-हिंडौन स्टेट हाइवे के बीच मौजूद सेवा गांव में खेती से जुड़े विजय सिंह मीना ने कहा-'बीजेपी 400 पार की बात क्यों कर रही है? क्योंकि वह संविधान बदलना चाहते हैं और हम ऐसा कभी नहीं होने देंगे।'

पूर्वी राजस्थान में आरक्षण पर जारी इस खुसफुसाहट को और बेहतर समझने के लिए हमने प्रदेश के एक वरिष्ठ पत्रकार से संपर्क किया। वह बताते हैं कि पूर्वी राजस्थान के जिन इलाकों में खासतौर पर यह चर्चा है वहां बड़ी तादाद में मीणा जाति के लोग रहते हैं और अधिकतर अब काफी पढ़े-लिखे हैं। वह संविधान के होने और आरक्षण के रहने का मतलब बेहतर तरीके से समझते हैं इसलिए इस तरह की चर्चा आम है।

वह आरक्षण पर जारी इस चर्चा को 'नैरेटिव गेम' बताते हुए कहते हैं कि जिस तरह 2014 के बाद से बीजेपी ने हिंदुओं को राम मंदिर आदि मुद्दों पर आकर्षित किया अब कांग्रेस इसकी काट जातिगत जनगणना और आरक्षण जैसे मुद्दों को बना रही है। अगर कांग्रेस इस नैरेटिव को भुनाने में कामयाब हुई तो खासतौर पर राजस्थान में पार्टी को टोंक-सवाईमाधोपुर, करौली-धौलपुर, भरतपुर,दौसा,डूंगरपुर बांसवाड़ा, कोटा जैसी सीटों पर अच्छा-खासा फायदा हो सकता है। इसके अलावा शेखावटी में सीकर, चुरू, झुंझुनू जैसी सीटों पर जाटों की नाराजगी और अग्निवीर जैसे मुद्दों के रहते भी कांग्रेस अपना प्रदर्शन बेहतर कर सकती है।

मीडिया से क्यों नाराज हैं गांव के लोग? 

'तुम तो बिके हुए हो सब,तुम तो सारी मीडिया बिके हुए हो पत्रकार जी'

'आप मीडिया से इतना क्यों नाराज़ हैं?'

'मीडिया...मीडिया उनकी तरफ है। हम रोजीना टेलीविज़न देखे हैं, सिर्फ एक साइड दिखाबे। मीडिया कोई की ना बोले बस बीजेपी के अलावा। क्या राम नाम उनन कू ही पतो है, हम ना जानते? राम हमारे नहीं हैं? राम घट घट में है, सबके मन में हैं। राम को बदनाम कर रहे हैं।' गांव के किसान रक्खी राम मीणा ने यह बातें काफी गुस्से भरे लहजे में कहीं।

चाय की दुकान पर मौजूद कुछ नौजवान (photo by Mohammad Qasim)

राजस्थान में अगले चरण का चुनाव 26 अप्रैल को होना है। यहां बची हुई 13 सीटों में टोंक-सवाईमाधोपुर भी एक है। पूर्वी राजस्थान की इस अहम इस सीट पर गुर्जर और मीणा जाति का काफी प्रभाव है। दोनों जातियों के बीच रहा लंबा सियासी संघर्ष चुनाव के परिणाम को भी प्रभावित करता है।

 यहां की 8 विधानसभाओं में से एक टोंक विधानसभा से कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट विधायक हैं वहीं सवाई माधोपुर विधानसभा से किरोड़ी लाल मीणा विधायक हैं। दोनों का अपनी जातियों पर काफी असर है। कांग्रेस की ओर से इस सीट पर हरीश चंद्र मीना चुनाव लड़ रहे हैं वहीं बीजेपी ने मौजूदा सांसद सुखबीर सिंह जौनपुरिया को मैदान में उतारा है।

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