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गरीबी के आंकड़े बता रहे, आखिर क्यों फ्री राशन के नाम पर वोट जरूरी है

अब भारत में गरीबी की क्या स्थिति है, आखिर क्यों फ्री राशन की इतनी जरूरत है, ये जानेंगे, लेकिन पहले ये समझ लेते हैं कि चुनावी मौसम में फ्री राशन एक बड़ा मुद्दा कैसे बन गया है।
Written by: Sudhanshu Maheshwari
नई दिल्ली | Updated: May 16, 2024 17:35 IST
गरीबी के आंकड़े बता रहे  आखिर क्यों फ्री राशन के नाम पर वोट जरूरी है
फ्री राशन वाली राजनीति और भारत की गरीबी
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लोकसभा चुनाव में इस बार फ्री राशन भी एक बड़ा मुद्दा बन गया है। जिस देश में आजादी के बाद से ही गरीबी खत्म करने की कसमें खाई जा रही हैं, जिस देश में हर सरकार ने गरीबी हटाने को लेकर नारे दिए हैं, उसी देश में आजादी के 75 साल बाद भी फ्री राशन देने की जरूरत पड़ रही है। आज भी देश का एक बड़ा वर्ग ऐसा है जिसे अगर राशन सरकार द्वारा मुहैया ना करवाया जाए तो वो भूखे पेट सोने को मजबूर दिखेगा।

फ्री राशन मुद्दा कैसे बन गया?

अब भारत में गरीबी की क्या स्थिति है, आखिर क्यों फ्री राशन की इतनी जरूरत है, ये जानेंगे, लेकिन पहले ये समझ लेते हैं कि चुनावी मौसम में फ्री राशन एक बड़ा मुद्दा कैसे बन गया है। असल में कांग्रेस अध्यक्ष और इंडिया गठबंधन के बड़े नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बात करते हुए ऐलान किया है कि अगर केंद्र में सरकार बनती है तो गरीबों को पांच किलो की जगह दस किलो राशन फ्री में दिया जाएगा। उस ऐलान के मायने ज्यादा इसलिए है क्योंकि बीजेपी अपनी हर चुनावी सभा में अपनी फ्री राशन योजना का जिक्र कर रही है।

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क्या है फ्री राशन स्कीम?

असल में कोरोना काल के दौरान 2020 में मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) की शुरुआत की थी। उस योजना के तहत लाभार्थियों को 5 किलो अनाज फ्री में मिलना था। बीपीएल कार्ड वाले हर परिवार को एक महीने का पांच किलो राशन देने की बात थी। इसमें चार किलो गेंहूं और एक किलो चावल शामिल था। सरकार का ही आंकड़ा कहता है कि 80 करोड़ लोगों को इस योजना का फायदा मिला है। वहां भी सबसे ज्यादा 15.21 करोड़ लाभार्थी तो उत्तर प्रदेश से सामने आए हैं, दूसरे नंबर पर गुजरात है जहां 3.82 करोड़ परिवारों तक फ्री राशन पहुंचा है। इसके बाद नंबर पंजाब का आता है, फिर उत्तराखंड का, फिर हिमाचल, फिर मणिपुर और आखिर में गोवा।

भारत में गरीबी कितनी, पता चलेगा राशन क्यों जरूरी

मोदी सरकार ने कहा है कि 2028 तक वो इस योजना को जारी रखने वाली है और स्कीम के दायरे को भी बढ़ाया जाएगा। अब मुफ्त राशन देने का ऐलान हुआ, वो जरूरत थी, लेकिन उस जरूरत ने ये बात भी बता दी कि देश में गरीबी उस स्तर पर कम नहीं हुई जो होनी चाहिए थी। दावे जरूर हो रहे हैं कि भारत में सबसे तेजी से गरीबी खत्म हुई है, लेकिन जिस तरह से मुफ्त राशन को लेकर लोगों की निर्भरता ज्यादा है, वो अलग कहानी बयां करती है।

राज्यगरीबी (%)
बिहार33.74%
झारखंड42.16%
उत्तर प्रदेश37.08%
छत्तीसगढ़39.93%
मणिपुर36.89%
अरुणाचल प्रदेश34.67%
ओडिशा29.04%
असम32.07%
मध्य प्रदेश36.07%
कर्नाटक13.2%
Source: Niti Ayog

अब ऊपर दी गई इस टेबल से पता चलता है कि झारखंड में सबसे ज्यादा गरीबी चल रही है, दूसरे नंबर पर छत्तीसगढ़ आता है, तीसरे नंबर पर उत्तर प्रदेश और चौथे पायदान पर मध्य प्रदेश। अब तर्क दिया जाता है कि पहले की तुलना में ये आंकड़ा भी बेहतर है, पहले देश में इससे भी ज्यादा गरीबी थी। आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं, लेकिन हालात इतने अभी भी नहीं सुधर पाए हैं जहां पर लोगों को इतना आत्मनिर्भर बनाया जा सके कि वे अपने राशन का इंतजाम खुद कर लें।

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पाकिस्तान से ज्यादा भुखमरी भारत में!

वैसे सिर्फ गरीबी ज्यादा है, इसलिए राशन देना है, तो ऐसा भी नहीं है। भारत जैसे देश में गरीबी भी कई तरह की होती है। यहां पर लोग गरीब तो हैं ही, वहां भी कई ऐसे हैं जो अपना पेट नहीं पाल सकते हैं, जिन्हें दो वक्त की रोटी नसीब नहीं होती है। इस बात का पता ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत की बदतर रेटिंग से भी पता चल जाता है। हैरानी की बात ये है कि भारत इस मामले में अभी पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान और श्रीलंका से भी पीछे चल रहा है। पिछले साल जो रिपोर्ट सामने आई है, उसके मुताबिक 125 देशों में भारत 111वें स्थान पर खड़ा है, वही पाकिस्तान 99, श्रीलंका 64, नेपाल 81 और बांग्लादेश 84वें पायदान पर है। हैरानी की बात ये है कि भारत खुद को टॉप 100 में भी शामिल नहीं करवा पाया है।

राशन की क्वालिटी जरूरी, कौन ज्यादा देगा, ये नहीं

अब ये स्थिति बताती है कि भारत में फ्री राशन की कितनी जरूरत है, इसी के आधार पर हंगर इंडेक्स में भी स्थिति को सुधारा जा सकता है। लेकिन अगर ये कहना कि फ्री राशन के कोटे को बढ़ाने से जमीन पर हालात बेहतर हो जाएंगे, तो ऐसा नहीं लगता है। तमाम जानकारों का कहना है कि अब समय आ गया है कि राशन की क्वांटिटी से ज्यादा राशन की क्वालिटी पर फोकस किया जाए। अगर अच्छा राशन दिया जाएगा तो सेहत में सुधार होगा, सेहत में सुधार से दूसरे पैरामीटर्स पर भी सुधार देखने को मिलेगा। यानी कि एक पहलू सुधरने से दूसरे पहलू भी अपने आप सुधर जाएंगे।

गरीब का वोट किसके साथ- बीजेपी या कांग्रेस?

अब आखिर बीजेपी क्यों इस गरीब वोटर पर इतना फोकस कर रही है। असल में पीएम मोदी ने खुद के लिए एक अलग वोटबैंक तैयार कर लिया है, उस वोटबैंक का नाम है लाभार्थी वोटर। सरकार की योजनाओं का सबसे ज्यादा फायदा गरीब तबके को मिल रहा है। जब वो तबका उस योजना का लाभ लेता है, वो उसके बदले में मोदी को वोट देना चाहेगा। लोकनीति CSDS का सर्वे बताता है कि मोदी सरकार को गरीबों का 39 फीसदी वोट मिल सकता है, वहीं अगर उसके सहयोगियों को भी मिल दिया जाए तो एनडीए के खाते में 43% गरीब तबके का वोट जा सकता है। वहीं कांग्रेस को सिर्फ 22 फीसदी वोट ही मिलने का अनुमान है। ये अंतर ही बता रहा है कि कांग्रेस भी क्यों फ्री राशन योजना पर फोकस दे रही है।

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