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अगर इन तीन चुनौतियों से पार पा लें AAP - कांग्रेस तो जीत सकते हैं दिल्ली की सभी सातों सीटें, वरना मुश्किल

Delhi Lok Sabha Chunav: बीजेपी पिछले दो लोकसभा चुनावों में दिल्ली की सभी सात सीटों पर परचम फहरा चुकी है। अगर वह इस बार भी ऐसा करती है तो यह हैट्रिक होगी।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: Yashveer Singh
नई दिल्ली | Updated: May 15, 2024 16:35 IST
अगर इन तीन चुनौतियों से पार पा लें aap   कांग्रेस तो जीत सकते हैं दिल्ली की सभी सातों सीटें  वरना मुश्किल
दिल्ली में इंडिया गठबंधन को कितनी सीटें दिलवा पाएंगे केजरीवाल? (PTI)
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अरविंद केजरीवाल अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आने के बाद जमकर प्रचार कर रहे हैं। देश की राजधानी नई दिल्ली की सात लोकसभा सीटों पर छठे फेज में 25 मई को वोट डाले जाएंगे। राजधानी नई दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने कांग्रेस से गठबंधन किया है।

इस गठबंधन के तहत आप दिल्ली की चार लोकसभा सीटों- पूर्वी दिल्ली, वेस्ट दिल्ली, साउथ दिल्ली और नई दिल्ली लोकसभा सीट पर जबकि कांग्रेस पार्टी नॉर्थ ईस्ट दिल्ली, नॉर्थ वेस्ट दिल्ली और चांदनी चौक लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है।

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आम आदमी पार्टी का दावा है कि अरविंद केजरीवाल के लोकसभा चुनाव के बीच में जेल से बाहर आने पर राजधानी की हवा बदल गई है और अब सातों सीटों पर इंडिया गठबंधन ने बढ़त बना ली है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली में न सिर्फ आम आदमी पार्टी बल्कि कांग्रेस के प्रत्याशियों के लिए भी वोट मांग रहे हैं।

केजरीवाल ने भले ही जेल से बाहर आते ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का प्रचार अभियान में जान फूंक दी हो लेकिन आज भी बढ़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या ये दोनों पार्टी मिलकर भी दिल्ली में बीजेपी को सातों सीटें जीतने से रोक पाएगी? आइए आपको बताते हैं कुछ ऐसे फैक्ट्स के बारे में जिन्हें खुद अरविंद केजरीवाल भी नजर अंदाज नहीं कर सकते।

पिछले चुनाव के आंकड़े इंडिया गठबंधन के पक्ष में नहीं

लोकसभा चुनाव 2019 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि बीजेपी ने राजधानी नई दिल्ली की सातों लोकसभा सीटों पर न सिर्फ जीत हासिल की बल्कि अपने दूसरे नंबर पर रहे प्रत्याशी से कम से कम 23% ज्यादा वोट भी हासिल किए। दिल्ली में 2019 लोकसभा में बीजेपी को करीब 57% वोेट मिला जो कांग्रेस (22.6%) और आप (18.2%) को मिले कुल वोट से ज्यादा था।

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राजधानी नई दिल्ली में जिस सीट पर हार-जीत का अंतर सबसे कम था, वो थी चांदनी चौक लोकसभा सीट। जहां बीजेपी के हर्षवर्धन ने कांग्रेस प्रत्याशी को सवा दो लाख से ज्यादा वोटों से हराया। इस सीट पर हर्षवर्धन को करीब 53% वोट मिले यानी कांग्रेस और आप को मिले कुल वोटों से भी ज्यादा।

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साल 2019 में दिल्ली में तीन लोकसभा सीटें ऐसी थी जहां बीजेपी ने तीन लाख से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की जबकि दो लोकसभा सीटें ऐसी थीं जहां हार-जीत का अंतर साढ़े पांच लाख से ज्यादा था। पश्चिमी दिल्ली और उत्तर पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीटों पर बीजेपी की जीत का मार्जिन करीब चालीस फीसदी थी। ऐसे में आप और कांग्रेस पार्टी के लिए किसी भी सीट पर जीत हासिल करने के लिए न सिर्फ एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर करना होगा बल्कि जीत के लिए बीजेपी के वोटों में भी सेंध लगानी होगी।

एक-दूसरे को वोट ट्रांसफर कराना आसान नहीं

दिल्ली में भले ही आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के तहत चुनाव लड़ रहे हों लेकिन हकीकत यही है कि मुस्लिम वोट को छोड़कर राजधानी की सातों सीटों पर दोनों ही पार्टियों के लिए अपने खुद के कट्टर कट्टर समर्थकों के वोट एक-दूसरे के लिए ट्रांसफर करवाना बड़ी चुनौती होगी। केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद भले ही दोनों दल एक-साथ प्रचार करते नजर आएं लेकिन हकीकत ये है कि कुछ दिनों पहले तक दोनों पार्टियां के बीच ग्राउंड पर कोई तालमेल नजर नहीं आ रहा था।

हाल ही में केजरीवाल के जेल से बाहर आने के बाद उनके स्वागत के लिए रखे गए कार्यक्रम में भगवंत मान पंजाब में कांग्रेस का सूपड़ा साफ कर देने का दावा करते हैं। हालांकि बाद में वो खुद को संभालते हुए इंडिया गठबंधन की बात करने लगते हैं लेकिन हकीकत यह है कि राजधानी नई दिल्ली में अभी तक न तो आम आदमी पार्टी का पुराना कार्यकर्ता और न ही कांग्रेस की लोकल लीडरशिप इस गठबंधन को हजम कर पा रही है। ऐसे में दोनों ही दलों के अपने-अपने वोट को एक-दूसरे को ट्रांसफर करना एक बड़ी चुनौती होगा।

कांग्रेस की मौजूदा स्थिति

दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों के ऐलान के बाद से ही लोकल लीडरशिप और सेंट्रल लीडरशिप में मतभेद नजर आ रहे हैं। दिल्ली में कांग्रेस के अध्यक्ष रहे अरविंदर सिंह लवली, पूर्व मंत्री राजकुमार चौहान सहित कई नेता पहले ही बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। जो कांग्रेस पार्टी में हैं भी, उनमें से एक वर्ग या तो प्रत्याशी को नहीं पचा पा रहा है या वह उस आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर असहज है, जिसने दिल्ली में उसके वोट में सेंध लगाकर विधानसभा व निगम चुनावों में कांग्रेस को अर्श से फर्श पर लाकर खड़ा कर दिया। दिल्ली कांग्रेस कवर करने वाले पत्रकारों की मानें तो शहर में सिर्फ नेता ही नहीं बड़ी संख्या में कांग्रेस के ग्राउंड लेवल वर्कर भी इस बार बीजेपी में शामिल हुए हैं।

दिल्ली में किस सीट पर कौन प्रत्याशी

लोकसभा सीटबीजेपीइंडिया गठबंधन
1नई दिल्लीबांसुरी स्वराजसोमनाथ भारती
2पूर्वी दिल्लीहर्ष मल्होत्राकुलदीप कुमार
3उत्तर पूर्वी दिल्लीमनोज तिवारीकन्हैया कुमार (कांग्रेस)
4चांदनी चौकप्रवीण खंडेलवालजयप्रकाश अग्रवाल (कांग्रेस)
5साउथ दिल्लीरामवीर सिंह बिधुड़ीसहीराम पहलवान
6पश्चिमी दिल्लीकमलजीत सेहरावतमहाबल मिश्रा
7उत्तर पश्चिमी दिल्लीयोगेंद्र चंदौलियाउदित राज (कांग्रेस)

बीजेपी ने एंटी इनकंबेंसी से बचने के लिए बदल दिए छह प्रत्याशी

राजधानी नई दिल्ली की सातों लोकसभा सीटें जीतने के लिए बीजेपी कितनी सजग है, उसका अनुमान आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि बीजेपी ने यहां सात में से छह सीटों पर अपने प्रत्याशी बदल दिए। इस बार बीजेपी ने सभी सातों सीटों पर अपने पुराने कार्यकर्ताओं पर दांव लगाया है। इनमें दो पूर्व मेयर हैं और एक पूर्व विधायक हैं। बीजेपी ने जिन मौजूदा सासंदों के टिकट काटे उनमें एक पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं। खास बात ये है कि कांग्रेस की तरह बीजेपी में नए प्रत्याशियों के खिलाफ विरोध के स्वर न के बराबर सुनाई दिए।

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