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JNU के पूर्व छात्र नेता को CPI(ML) ने मैदान में उतारा, बिहार की इस सीट से मिला टिकट, सियासत में आने के लिए छोड़ दी प्रोफेसर की नौकरी

नालंदा से उम्मीदवार बनाने के पार्टी के फैसले से उत्साहित सौरव ने कहा, 'हम बिहार के सीएम नीतीश कुमार की सिद्धांतों की कमी वाली राजनीति पर हमला करेंगे।'
Written by: संतोष सिंह | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: April 01, 2024 11:23 IST
jnu के पूर्व छात्र नेता को cpi ml  ने मैदान में उतारा  बिहार की इस सीट से मिला टिकट  सियासत में आने के लिए छोड़ दी प्रोफेसर की नौकरी
पटना के पास मनेर के रहने वाले संदीप सौरव ने 2009 में जेएनयू से स्नातकोत्तर और 2014 में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की थी। (FB/ Sandeep Saurav)
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विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक का हिस्सा सीपीआई (एमएल) ने आरा, नालंदा और काराकाट सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों की घोषणा की है। पार्टी ने पालीगंज से विधायक संदीप सौरव को तीन बार के जेडीयू सांसद कौशलेंद्र कुमार के सामने नालंदा से मैदान में उतारा है, जबकि तरारी से विधायक सुदामा प्रसाद आरा से बीजेपी सांसद और केंद्रीय मंत्री आरके सिंह के खिलाफ मैदान में उतरेंगे। पूर्व विधायक राजाराम सिंह काराकाट से एनडीए प्रत्याशी उपेन्द्र कुशवाहा के खिलाफ चुनाव लड़ेंगे।

2020 में पालीगंज विधानसभा चुनाव भी जीता था

2013 में जेएनयू छात्र संघ के महासचिव रहे संदीप सौरव (36) ने राजनीति के लिए 2017 में हिंदी में सहायक प्रोफेसर की नौकरी नहीं की थी। उन्होंने महागठबंधन के उम्मीदवार के रूप में पालीगंज से 2020 का विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक लड़ा और विधायक बनकर सदन पहुंचे थे।

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2013 तक छात्रसंघ के दो बार राष्ट्रीय सचिव रहे

पटना के पास मनेर के रहने वाले सौरव ने 2009 में जेएनयू से स्नातकोत्तर और 2014 में पीएचडी की पढ़ाई पूरी की थी। सौरव 2013 तक अखिल भारतीय छात्रसंघ के दो बार राष्ट्रीय सचिव रहे थे। पहली पीढ़ी के राजनेता, सौरव एक ओबीसी परिवार से आते हैं। उनके पिता एक सीमांत किसान थे।

नालंदा से उन्हें मैदान में उतारने के पार्टी के फैसले से उत्साहित सौरव ने कहा, 'हम बिहार के सीएम नीतीश कुमार की सिद्धांतों की कमी वाली राजनीति पर हमला करेंगे। तीन बार के नालंदा सांसद ने पिछले 15 वर्षों में संसद में कोई स्थानीय मुद्दा नहीं उठाया है। हम इस बात पर चर्चा करेंगे कि कैसे महागठबंधन सरकार ने निरंतर भर्ती अभियान के साथ बेरोजगारी की समस्या को दूर करना शुरू किया। नीतीश के एनडीए में चले जाने के बाद गति ख़त्म हो गई। साथ ही एनडीए शासन में लोकतांत्रिक मूल्यों पर हो रहे हमलों को लेकर भी चिंता है।

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सीपीआई (एमएल) के आरा उम्मीदवार और ओबीसी नेता सुदामा प्रसाद (63) भोजपुर की राजनीति में 1997 से सक्रिय हैं। उन्होंने 2016 की पिटाई की घटना के बाद दलित अस्मिता यात्रा भी निकाली थी। भोजपुर सामाजिक आंदोलन का केंद्र रहा है। पार्टी के काराकाट उम्मीदवार राजाराम सिंह ओबीसी कुशवाह हैं। उनका मुकाबला राष्ट्रीय लोक मोर्चा प्रमुख और काराकाट के पूर्व सांसद उपेन्द्र कुशवाह से है।

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