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कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा झटका! शीला दीक्षित के पुराने सहयोगी ने दिया इस्तीफा, दिल्ली में माने जाते थे पार्टी का दलित फेस

राजकुमार चौहान दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुराने सहयोगी माने जाते हैं और पार्टी के दिल्ली में बड़े दलित नेता भी कहे जाते रहे है।
Written by: ईएनएस | Edited By: Mohammad Qasim
नई दिल्ली | Updated: April 24, 2024 16:08 IST
कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा झटका  शीला दीक्षित के पुराने सहयोगी ने दिया इस्तीफा  दिल्ली में माने जाते थे पार्टी का दलित फेस
राजकुमार चौहान ने कांग्रेस का साथ छोड़ दिया है। (फोटो : Twitter)
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Lok Sabha Elections: दिल्ली में कांग्रेस के पूर्व कैबिनेट मंत्री राजकुमार चौहान ने बुधवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने पार्टी के कुछ अन्य नेताओं पर सार्वजनिक तौर पर अपमान करने का आरोप लगाते हुए यह फैसला लिया। द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते राजकुमार चौहान ने इस खबर की पुष्टि की और कहा कि वह किसी और दल के साथ जुड़ने को लेकर विचार नहीं कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी से मांग की है कि उन बाहरी लोगों पर कार्रवाई की जाए जो लोकसभा चुनाव की तैयारी के लिए दिल्ली पहुंचे हैं।

राजकुमार चौहान दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के पुराने सहयोगी माने जाते हैं और पार्टी के दिल्ली में बड़े दलित नेता भी कहे जाते रहे है।

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कई और नेता दे सकते हैं इस्तीफा

पार्टी सूत्रों के मुताबिक आने वाले 24 से 48 घंटों में और भी कई कांग्रेस नेता इस्तीफा दे सकते हैं। जिनमें ज्यादातर दिल्ली के वरिष्ठ नेता हैं। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने पार्टी छोड़ने का मन बना लिया है, वे जरूरी नहीं कि किसी अन्य पार्टी में शामिल होंगे लेकिन दिल्ली में वे सब भ्रष्टाचार के खिलाफ एक नया राजनीतिक मोर्चा बनाने के लिए एकजुट हो सकते हैं।

उत्तर पश्चिम दिल्ली के उम्मीदवार उदित राज के खिलाफ कथित तौर पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के एक वर्ग को लामबंद करने के लिए राकुमार चौहान पहले से ही चर्चा में हैं। उनके आरोप हैं कि दिल्ली के स्थानीय नेताओं को दरकिनार कर बाहरी लोगों को प्राथिमिकता दी जा रही है।

चौहान ने अपने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा--“मैंने इस्तीफा दे दिया है क्योंकि चुनाव उम्मीदवारों पर चर्चा के लिए एक बैठक बुलाई गई थी। अरविंदर सिंह लवली सहित उत्तर पूर्वी दिल्ली के लगभग 20 से 25 प्रमुख नेता उस बैठक का हिस्सा थे। बैठक के दौरान हम अपना पक्ष रखने की कोशिश कर रहे थे लेकिन हमें अनुमति नहीं दी गई, कमरे से बाहर निकलने के लिए कहा गया। अगर हम बंद कमरे में भी अपनी राय व्यक्त नहीं कर सकते तो कहां कर सकते हैं?”

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