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केरल में इतिहास रचेगी बीजेपी? इन सीटों पर है खास फोकस, जानिए कांग्रेस-लेफ्ट को चौंकाने के लिए क्या है प्लान

पिछले हफ्ते त्रिशूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रोड शो किया था और फिर उसके बाद महिलाओं की एक विशाल रैली में हिस्सा लिया था।
Written by: शाजु फिलिप | Edited By: Nitesh Dubey
नई दिल्ली | Updated: January 08, 2024 17:59 IST
केरल में इतिहास रचेगी बीजेपी  इन सीटों पर है खास फोकस  जानिए कांग्रेस लेफ्ट को चौंकाने के लिए क्या है प्लान
केरल के त्रिशूर में पीएम नरेंद्र मोदी (फ़ोटो सोर्स: @narendramodi)
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बीजेपी आने वाले लोकसभा चुनाव में दक्षिण भारत से भी अधिक सीटें जीतने पर फोकस कर रही है। बीजेपी को तेलंगाना और केरल से काफी उम्मीदें हैं। बीजेपी ने केरल में अभी तक कभी एक लोकसभा सीट नहीं जीती है। पिछले हफ्ते त्रिशूर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक रोड शो किया था और फिर उसके बाद महिलाओं की एक विशाल रैली में हिस्सा लिया था। इसके साथ ही बीजेपी ने राज्य में चुनावी बिगुल बजा दिया है।

केरल में बीजेपी का संगठन अभी मजबूत नहीं है। इसलिए उसने उन मुट्ठी भर सीटों पर ध्यान केंद्रित करने को चुना है, जहां वह अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। त्रिशूर एक ऐसा क्षेत्र है जहां भाजपा वामपंथियों और कांग्रेस के खिलाफ अपनी संभावनाएं तलाश रही है। 2019 के लोकसभा चुनावों में भाजपा ने अभिनेता से नेता बने सुरेश गोपी को मैदान में उतारा और उन्हें 28.2% वोट शेयर हासिल हुआ।

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भाजपा ने संकेत दिया है कि पूर्व राज्यसभा सांसद गोपी त्रिशूर से ही उसके उम्मीदवार होंगे। पीएम मोदी के रोड शो में उनके साथ रहने वाले गोपी पर भरोसा करने के अलावा भाजपा को यह भी उम्मीद है कि ईसाइयों का एक बड़ा हिस्सा उसे वोट देगा।

एक और संसदीय सीट जहां भाजपा अपनी संभावनाएं तलाश रही है वह तिरुवनंतपुरम है। यहां कांग्रेस के शशि थरूर लगातार जीत रहे हैं। तिरुवनंतपुरम भाजपा के लिए उम्मीद की किरण रही है क्योंकि यह राज्य की 20 लोकसभा सीटों में से एकमात्र सीट है जहां वह पिछले दो चुनावों में दूसरे नंबर पर रही है। बीजेपी का सबसे अच्छा प्रदर्शन 2014 में था जब पार्टी के दिग्गज नेता ओ राजगोपाल को 32.32% वोट मिले थे और वह शशि थरूर से मामूली अंतर से हार गए थे, जिन्हें 34.09% वोट मिले थे। 2009 के चुनावों की तुलना में राजगोपाल ने अपने वोट शेयर में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की थी।

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राजगोपाल एक लोकप्रिय नेता हैं और संघ परिवार के दायरे के बाहर से वोट हासिल करने में कामयाब रहे क्योंकि यहां हिंदू वोट बैंक है और भाजपा के पास अन्य क्षेत्रों की तुलना में बेहतर जमीनी स्तर पर कैडर है। 2019 में भाजपा के कुम्मनम राजशेखरन ने भी 31% से अधिक वोट हासिल किए, लेकिन शशि थरूर से हार गए, जिन्हें 41% से अधिक वोट मिले।

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सबरीमाला विरोध प्रदर्शन के कारण 2019 में भाजपा ने एक और लोकसभा सीट पर ध्यान केंद्रित किया वह मध्य केरल में पथानामथिट्टा है। कांग्रेस के एंटो एंटनी 2009 से सीट जीत रहे हैं। 2019 में भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन को मैदान में उतारा, जो विरोध प्रदर्शन में सबसे आगे थे। हालांकि वह तीसरे स्थान पर रहे, लेकिन पार्टी का वोट शेयर 2014 के मुकाबले 15.95% से बढ़कर 28.97% हो गया।

पथानामथिट्टा में लगभग 35% ईसाई मतदाता हैं, जिनमें से बड़ी संख्या नॉन-कैथोलिक हैं, जबकि 58% वोटर हिंदू हैं। हिंदुओं में से 20% नायर समुदाय से हैं। भाजपा यहां ईसाइयों तक पहुंचने की रणनीति बनाएगी। ईसाइयों ने बड़े पैमाने पर कांग्रेस से हटकर CPIM को वोट किया और इसका असर हुआ कि उसने 2021 में पथानामथिट्टा लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाले सभी सात विधानसभा क्षेत्रों में जीत हासिल की।

भाजपा तिरुवनंतपुरम जिले की अट्टिंगल सीट पर भी फोकस कर रही है, जिस पर वामपंथियों का दबदबा था। 2019 में कांग्रेस के अदूर प्रकाश ने उनसे यह सीट छीन ली। राज्य में भाजपा की महिला चेहरा शोभा सुरेंद्रन ने अट्टिंगल से चुनाव लड़ा और 24.18% वोट हासिल किए। भाजपा के मजबूत प्रदर्शन का श्रेय सबरीमाला मुद्दे पर सीपीआई (एम) के खिलाफ हिंदुओं की नाराजगी को दिया गया। इस बार भी भाजपा पिछड़े हिंदू एझावा समुदाय से एक प्रमुख नेता को मैदान में उतार सकती है, जिसे निर्वाचन क्षेत्र में प्रभावशाली माना जाता है। 2019 में तीनों पार्टियों ने एझावा उम्मीदवारों को मैदान में उतारा था।

केरल में भाजपा ने पिछले कुछ वर्षों में कई प्रमुख नौकरशाहों, अभिनेताओं और खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ा है, जिन्होंने वोट शेयर बढ़ाने में मदद की है, लेकिन जीत पार्टी को नहीं मिली है। भाजपा की सहयोगी धर्म जन सेना का नेतृत्व एझावा समुदाय करता है, जो परंपरागत रूप से सीपीआई (एम) के साथ रहा है।

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