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पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता ने नामांकन रद्द होने को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, अदालत ने दिया यह जवाब

देबाशीष पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। फिलहाल पार्टी ने देबाशीष की जगह देबतनु भट्टाचार्य को नया उम्मीदवार बनाया और उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: April 29, 2024 12:06 IST
पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेता ने नामांकन रद्द होने को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती  अदालत ने दिया यह जवाब
लोकसभा चुनाव के लिए नामांकन रद्द होने के बाद शुक्रवार को बीरभूम में डीएम कार्यालय से निकलते हुए भाजपा नेता देबाशीष धर। (Photo: PTI)
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लोकसभा चुनाव 2024 के दो दौर पूरे हो चुके हैं। इस बीच पश्चिम बंगाल के बीरभूम लोकसभा सीट से बीजेपी उम्मीदवार देबाशीष धर का नामांकन स्क्रूटनी राउंड के दौरान रद्द होने को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। बीजेपी नेता देबाशीष धर ने नामांकन से संबंधित अपनी याचिका पर तत्काल सुनवाई करने की मांग की। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वह इस पर गौर करेगा। देबाशीष पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं। फिलहाल पार्टी ने देबाशीष की जगह देबतनु भट्टाचार्य को नया उम्मीदवार बनाया और उन्होंने अपना नामांकन भी दाखिल कर दिया है।

निर्वाचन अधिकारी ने तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द किया था

इससे पहले जिला निर्वाचन अधिकारी ने तकनीकी आधार पर नामांकन रद्द कर दिया था। देबाशीष धर ने जिला निर्वाचन अधिकारी के इस फैसले को चुनौती देने का ऐलान कर दिया था। उन्होंने कहा, “कुछ तकनीकी कारणों से मेरी उम्मीदवारी रद्द कर दी गई है। मैं अपनी पार्टी के नेताओं से बातचीत करने के बाद कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा। मुझे लगता है कि बताए गए कारण निराधार हैं।”

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पार्टी बंगाल की सभी 42 सीटों पर चुनाव मैदान में उम्मीदवार उतारी है

बीजेपी पश्चिम बंगाल की सभी 42 सीटों पर मैदान में हैं। पार्टी ने राज्य में किसी से गठबंधन नहीं किया है। इस बार पार्टी को उम्मीद है कि वह पहले से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल करेगी। हालांकि उसको राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिल रही है।

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''इस देश ने 3 दशकों तक अस्थिरता की कीमत चुकाई है, 3 दशकों तक अस्थिर सरकारें चलीं लेकिन पिछले 10 वर्षों में देश को एक मजबूत नेतृत्व मिला है, देश को स्थिरता मिली है। न केवल राजनीतिक स्थिरता है, बल्कि नीतियों और विकास कार्यक्रमों को लेकर भी स्थिरता रही है। अब अगर INDI गठबंधन कहता है कि शरद पवार को एक साल के लिए प्रधानमंत्री चुना जाएगा, ममता जी को एक साल के लिए चुना जाएगा, स्टालिन को एक साल के लिए चुना जाएगा, और यदि कुछ भी बचा तो राहुल जी चुने जायेंगे..देश ऐसे नहीं चलता…''

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