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बिहार: बेगूसराय में विरोध के बीच चुनाव लड़ रहे हैं गिरिराज सिंह

वर्ष 1952 से 2019 तक बेगूसराय में 17 संसदीय चुनाव हुए हैं। इसमें नौ बार कांग्रेस जीती है। दो बार जद (एकी), दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की है।
Written by: गिरधारी लाल जोशी | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: May 09, 2024 12:46 IST
बिहार  बेगूसराय में विरोध के बीच चुनाव लड़ रहे हैं गिरिराज सिंह
गिरिराज सिंह। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली बेगूसराय की संसदीय सीट भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की बन गई है। यहां से केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तीसरी बार कमल खिलाने के लिए जोर लगा रहे हैं। यूं तो वर्ष 2014 में भाजपा के भोला सिंह जीते थे। गिरिराज सिंह वर्ष 2014 में नवादा के सांसद निर्वाचित हुए थे। इस तरह बेगूसराय में गिरिराज सिंह का यह दूसरा मौका है। लेकिन इस बार चुनावी लड़ाई में अंतर है।

उस वक्त माकपा और राजद अलग-अलग मैदान में उतरी थी लेकिन इस बार एक साथ हैं। अब गिरिराज सिंह की लड़ाई इंडिया गठबंधन से है। इसी के तहत भाकपा ने अवधेश राय को उम्मीदवार बनाया है। वे बछवाड़ा विधानसभा क्षेत्र से तीन बार विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। यहां चौथे चरण में चुनाव होना है।

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अलबत्ता 2014 संसदीय चुनाव में राजद और भाकपा को मिले मत को जोड़ दिए जाएं तो भाजपा के उम्मीदवार के मत से एक लाख तीस हजार से ज्यादा हैं। उस वक्त भाजपा के भोला सिंह को 4 लाख 28 हजार से ज्यादा मत प्राप्त हुए थे। वहीं राजद के तनवीर हसन को 3 लाख 69 हजार से अधिक और भाकपा के राजेंद्र प्रसाद सिंह को एक लाख 92 हजार मत हासिल हुए थे।

मगर 2019 के चुनाव का आंकड़ा बताता है कि भाजपा के गिरिराज सिंह ने भारी बहुमत से जीत हासिल की थी। जबकि भाकपा ने कन्हैया कुमार को और राजद ने तनवीर हसन को उतारा था। भाकपा और राजद के मिले मत जोड़ दिए जाएं तो भी भाजपा उम्मीदवार को कोई फर्क नहीं पड़ा। तब भाजपा प्रत्याशी गिरिराज सिंह को छह लाख 87 हजार से ज्यादा और भाकपा के कन्हैया कुमार को 2 लाख 67 हजार से अधिक मत मिले थे।

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वहीं राजद के तनवीर को एक लाख 96 हजार से ज्यादा मत प्राप्त हुए थे। भाजपा उम्मीदवार की जीत आसानी से हुई थी। उस समय मोदी लहर का करिश्मा था। लेकिन इस बार सीधी लड़ाई में कड़ा मुकाबला है। इसलिए भागलपुर से भाजपा के कार्यकर्ताओं की टोलियां बुलाई गई है।

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राजकुमार सिंह, संतोष कुमार और प्रीति शेखर की टोलियां बखरी, साहेबपुर कमाल और बेगूसराय में घूमती नजर आर्इं। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बुधवार को चुनावी सभा को संबोधित किया है। इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह चुनाव सभा कर चुके हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी राजग प्रत्याशी को जिताने की अपील कर गए हैं। वहीं राजद नेता तेजस्वी यादव और वीआइपी के मुकेश सहनी भाकपा उम्मीदवार के पक्ष में कई चुनावी सभा कर गए हैं। प्रचार जोरों पर है, लेकिन संघर्ष कड़ा है।

वर्ष 1952 से 2019 तक बेगूसराय में 17 संसदीय चुनाव हुए हैं। इसमें नौ बार कांग्रेस जीती है। दो बार जद (एकी), दो बार भाजपा ने जीत दर्ज की है। वर्ष 1996 तक यह इलाका लेनिनवाद का कहलाता था। इसके बाद वामपंथियों का लाल झंडा कमजोर हुआ। वर्ष 1999 के बाद कांग्रेस की जमीन खिसकी। बेगूसराय लोकसभा इलाका सात विधानसभा क्षेत्रों बछवाड़ा, तेघड़ा, मटिहानी, बेगूसराय, साहेबपुर कमाल, बखरी और चेरियाबरियारपुर को समेटे है। सूत्रों के अनुसार, गिरिराज सिंह मोदी करिश्मा पर आश्रित हैं। वहीं भाकपा के अवधेश राय अपनी पार्टी की खोई जमीन तलाश रहे है।

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