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Bihar Lok Sabha Chunav: महंगाई - बेरोजगारी बड़े मुद्दे लेकिन जाति से ऊपर नहीं; अपनी बात को डिफेंड करने के लिए समर्थक दे रहे 'TINA' और 'जहर' जैसे तर्क

Bihar News in Hindi: रविशंकर सिंह कहते हैं कि वोटर अपने बेतुके कारणों से महंगाई को डिफेंड कर अपनी प्राथमिकता को उचित ठहरा रहे हैं। वो कहते हैं कि वोटर्स को 'जहर' से इंजेक्ट किया गया है। जब तक इसका प्रभाव रहेगा, वो ऐसे तर्क देते रहेंगे।
Written by: दीप्‍त‍िमान तिवारी | Edited By: Yashveer Singh
Updated: May 06, 2024 16:36 IST
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बिहार में महंगाई और बेरोजगारी से बड़ा फैक्टर जाति मालूम पड़ती है। (Express)
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Bihar Lok Sabha Elections: बिहार की चालीस लोकसभा सीटों में से पहले दो चरण में कुल नौ सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं। सात मई को तीसरे चरण में राज्य की पांच लोकसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। देश में इस समय भले ही 'विरासत टैक्स' और आरक्षण को लेकर सियासी तापमान बढ़ा हुआ है लेकिन बिहार में लोगों के लिए महंगाई और बेरोजगारी बड़े मुद्दे हैं। हालांकि फिर भी लोगों से बातचीत करने पर ऐसा मालूम चलता है कि यहां सबसे ऊपर कास्ट फैक्टर है, उसके बाद असल मु्द्दों का नंबर आता है।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यादव - मुस्लिम और दलितों का एक सेक्शन मोदी और नीतीश कुमार को मंहगाई के लिए जिम्मेदार मानता है तो वहीं अपर कास्ट वोटर्स और मोदी समर्थक ओबीसी इन मुद्दों से प्रभावित होने के बाद भी सरकार को डिफेंड करते नजर आते हैं। संयोग से, विरासत टैक्स और आरक्षण जैसे मुद्दों पर नेताओं द्वारा खपाई जा रही एनर्जी के बावजूद, यहां लोग मुश्किल से ही उनके बारे में बात कर रहे हैं।

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बेरोजगारी पर बात करते हुए मोदी समर्थक ये कहते नजर आते हैं कि सरकार सभी को नौकरी नहीं दे सकती थी। ये लोग सरकार के समर्थन में कई अन्य फायदे गिनाते हैं। इनमें से कुछ महंगाई को लेकर मजेदार बहाने देते हैं। कुछ तो बढ़ती महंगाई का कारण बांग्लादेशी घुसपैठ तक को बता देते हैं जबकि कुछ बीजेपी और मोदी को वोट देने की वजह TINA (देयर इज नो अल्टरनेटिव) बताते हैं।

राष्ट्रवाद और हिंदुत्व बीजेपी के लिए काम कर रहा?

मधेपुरा के एक छोटे व्यापारी (जाति हलवाई) 32 वर्षीय अमित कुमार कहते हैं कि मोदी सरकार में महंगाई आसमान छू रही है लेकिन उसके मुकाबले इनकम नहीं बढ़ रही है। वो कहते हैं कि मोदी सरकार में हमारे जैसे छोटे व्यापारी प्रभावित हुए हैं। सिर्फ बड़े व्यापारियों का भला हुआ है लेकिन क्या करें, कोई ऑप्शन नहीं है। एक तरफ गड्ढा है तो दूसरी तरफ आग है। पानी है ही नहीं।

हालांकि मोदी सरकार को समर्थन करने की वजह बताते हुए वो कहते है कि मोदी के कारण आज पाकिस्तान एक पत्थर फेंकने के काबिल नहीं है। अनुच्छेद 370 हटा दिया गया है और भगवान अपने घर विराजे हैं, सिर्फ भारत ही नहीं दुबई में भी।

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मोदी की फेस वैल्यू भी बड़ा फैक्टर!

भागलपुर के सबोर एरिया में मुकेश चौधरी नाम के वोटर भी महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं लेकिन वो मोदी को वोट देने की वजह बताते हुए कहते हैं कि वो देश के लिए काम कर रहे हैं। अगली पीढ़ी की जिंदगी बन जाएगी।

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भागलपुर के बराबर वाली मुंगेर लोकसभा में मल्लाह जाति से संबंध रखने वाले वोट शत्रुघ्न साहनी अपनी रेहड़ी पर केले बेचते हैं और खुद को मोदी का समर्थक बताते हैं। वो कहते हैं कि एक ही हिंदू नेता है देश में। शत्रुघ्न कहते हैं कि मुगलों के आने के बाद पहली बार हिंदू अस्मिता बहाल हुई है।

वो मानते हैं कि लोग महंगाई से परेशान हैं लेकिन कहते हैं कि एक बार मोदी सरकार सारे बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों को देश से बार निकाल देगी तो महंगाई अपने आप कंट्रोल में आ जाएगी।

दीपक चौरसिया नाम के एक वोटर मानते हैं कि राष्ट्रवाद के आगे महंगाई को लेकर उनकी चिंता कम हो जाती है। दीपक एक पान की दुकान चलाते हैं। वो कहते हैं कि लोग सच में महंगाई से परेशान हैं। जो लोग मेरी दुकान पर आते हैं वो महंगाई के बारे में बात करते हैं लेकिन उनके पास और कोई ऑप्शन नहीं है।

कुछ वोटर्स कहते हैं- महंगाई जैसा कुछ नहीं

सुपौल में चाय की दुकान चलाने वाले शिवपूजन मंडल (जाति धानुक) मानते हैं कि महंगाई जनसंख्या के कारण बढ़ रही है। वो कहते हैं कि कोई भी बढ़ती जनसंख्या के बारे में बात नहीं कर रहा है।

सीतामढ़ी के वोटर सुअंश ठाकुर (जाति और पेश से नाई) यह मानने को तैयार ही नहीं हैं कि महंगाई या बेरोजगारी नाम की कोई चीज है या फिर बिहार में गरीबी है। वो कहते हैं कि हर दिन मोटरसाइकिलें बेची जा रही हैं। लोग मटन और चावल खा रहे हैं। सुअंश खुलकर कहते हैं कि वो मोदी को वोट कर रहे हैं।

ऐसे ही कुछ विचार रक्सौल के धनश्याम प्रसाद (60) के हैं। वो कहते हैं कि कोई महंगाई नहीं है। जब मटन पचास रुपये किलो था तब लोग साल में एक बार मटन खाते थे, आज जब इसकी कीमत 600 रुपये किलो है तो लोग रोज मटन खा रहे हैं। लालू राज की बात करते हुए वो कहते हैं कि अब वो दिन वापस नहीं चाहते।

फ्री राशन करेगा काम?

मोतीहारी में राजमिस्त्री का काम करने वाले बनकट के टाटावा ईबीसी अशोक दास भी महंगाई से जूझ रहे हैं, लेकिन वे अनाज जमा करने वाले बेईमान व्यापारियों को इसके लिए दोषी मानते हैं। वो कहते हैं कि मोदी फ्री राशन पहुंचाकर राहत दे रहे हैं। वो कहते हैं कि बड़ा मुद्दा ये है कि अगर मोदी नहीं होगा तो पाकिस्तान हमारे देश में घुस जाएगा।

वाल्मीकि नगर लोकसभा क्षेत्र के लौरिया में रहने वाले संजय जयसवाल कहते हैं कि निश्चित ही लोग महंगाई और बेरोजगारी से परेशान हैं लेकिन दो - तीन और मंदिर बनने के बाद मोदी को टाटा-बाय-बाय कह देंगे। हालांकि इसी लोकसभा के कपारधिक्का गांव में रहने वाले कुम्हार जाति के किशनदेव पंडित सरकार बदलने का मन बना चुके हैं।

वो कहते हैं कि किसान बीस रुपये किलो चावल बेच रहा है और चालीस रुपये किलो खरीद रहा है। क्या मंदिर हमें खाना देंगे। अगर यही पैसा स्कूल और अस्पताल खोलने के लिए खर्च किया जाता तो बेहतर होगा। वो कहते हैं कि मोदी ने सबकुछ बेच दिया है। सरकार ने बिजली के बिल बढ़ाने के लिए स्मार्ट मीटर लगा दिए हैं।

'वोटर्स में जहर इंजेक्ट किया गया, इसलिए नहीं दिखाई दे रही महंगाई'

मधेपुरा में रहने वाले रविशंकर सिंह (जाति राजपूत) जो एक यूट्यबर हैं, एक नया दृष्टिकोण देते हुए कहते हैं कि वोटर अपने बेतुके कारणों से महंगाई को डिफेंड कर अपनी प्राथमिकता को उचित ठहरा रहे हैं। वो बताते हैं कि कई जगहों पर इस तरह के जोक भी चल रहे हैं 'अबकी बार, चार सौ पार' सरसों के तेल के लिए दिया गया नारा है। वो कहते हैं कि वोटर्स को जहर से इंजेक्ट किया गया है। जब तक इसका प्रभाव रहेगा, वोटर ऐसे तर्क देते रहेंगे।

सीतामढ़ी में लेबर चौक पर आसपास के गांवों से लोग काम की तलाश में आते हैं। ये सभी काम की कमी और महंगाई पर बात भी करते हैं। इन्हीं में से एक रघुनाथ साहू (जाति - ओबीसी कलवर) कहते हैं कि महंगाई इतनी ज्यादा है कि दो वक्त का खाना जुगाड़ना मुश्किल हो गया है। हम फ्री राशन नहीं चाहते। बस इतनी व्यवस्था कर दो कि हमें हर दिन काम मिल जाए और हम जो चाहें, खरीद सकें, चाहे दाम कितना भी हो। रघुनाथ साहू महंगाई के लिए बिहार की नीतीश सरकार को जिम्मेदार मानते हैं। वह कहते हैं कि बिहार में उनकी ही सरकार है।

विरासत टैक्स और आरक्षण पर कम ही हो रही चर्चा

यहां विजय कुमार (कोइरी जाति) डिटेल में बात करते हुए बताते हैं कि कैसे मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर बनाया गया, इससे भारत कैसे टॉप पर पहुंचा और अब दुनिया हमें 'गुरु' मान रही है। वह करते हैं कि भारत अब दुनिया को मिसाइल एक्सपोर्ट कर रहा है।

विजय जब ये बातें द इंडियन एक्सप्रेस को बताते हैं, तब बदरी राय (जाति यादव) और सत्तार अंसारी मुस्कान के साथ एक दूसरे को देखते हैं। अंसारी मानते हैं कि मोदी ने देश के लिए अच्छा काम किया है। वो कहते हैं कि बस लड़वाने वाला काम ठीक नहीं किए।

इन सभी से जब आरक्षण को लेकर सवाल किया जाता है तो वो एक सुर में कहते हैं कि ऐसा कुछ भी नहीं होने वाला। 'विरासत टैक्स' को लेकर भी कुछ ऐसी ही राय है। मधेपुरा के अमरदीप यादव कहते हैं कि ऐसा करना संभव नहीं है। मोतिहारी में ईबीसी दिहाड़ी मजदूर मोहित कुमार राजनीतिक बयानबाजी के रूप में खारिज कर देते हैं। वो कहते हैं कि कोई न किसी का गहना ले सकता है और न कोई आरक्षण हटा सकता है। सब बकवास है लेकिन मोदी पर विश्वास है। वो जो करेंगे ठीक ही करेंगे।

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