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Bhopal Lok Sabha Election 2024: BJP का अभेद्य किला है भोपाल लोकसभा सीट, 1989 से है भगवा दल का कब्जा

Bhopal Lok Sabha Elections 2024 Date, Candidates Name, Caste Wise Population: भोपाल लोकसभा सीट को बीजेपी का गढ़ माना जाता है, जहां बीजेपी आखिरी बार 1984 में चुनाव हारी थी।
Written by: न्यूज डेस्क
Updated: February 06, 2024 19:10 IST
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भोपाल लोकसभा चुनाव 2024 (सोर्स - PTI)
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Bhopal Lok Sabha Election 2024 Deate, Candidate: लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान में अब महज कुछ हफ्तों का ही वक्त बचा है। किसी भी दिन चुनाव आयोग की प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी और आधिकारिक तौर पर आम चुनाव की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। चुनाव का ऐलान भले न हुआ हो लेकिन सियासी सरगर्मी अभी से सिर चढ़कर बोलने लगी है। लोकसभा चुनावों का जिक्र होगा और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल का जिक्र न हो, यह असंभव है। पिछली बार इस सीट पर बीजेपी की फायरब्रांड नेता साध्वी प्रज्ञा जीती थीं, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह बुरी तरह हारे थे।

कौन-कौन हो सकता हैं उम्मीदवार?

भोपाल की यह सीट बीजेपी और कांग्रेस के लिए पिछली बार नाक की लड़ाई बन गई थी। इस सीट पर साध्वी प्रज्ञा को मैदान में उतारकर बीजेपी ने हिंदुत्व का कार्ड खेला था, जबकि कांग्रेस ने मध्य प्रदेश के टॉप मोस्ट लीडर दिग्विजय सिहं पर दांव लगाया था। इस सीट पर पिछले लोकसभा चुनाव 6वें फेज में वोटिंग हुई थी, जो कि 11 मई 2019 को थी।

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इस सीट पर अभी न तो बीजेपी ने अपने किसी सीएम का ऐलान किया है और न ही कांग्रेस ने अभी तक किसी नेता के नाम पर मुहर लगाई है। साध्वी प्रज्ञा पिछले 5 साल में अपने बयानों के चलते काफी विवादों में रही है। ऐसे में अगर बीजेपी उनका टिकट काटकर किसी और को थमा दे, तो शहर की जनता को कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए। उम्मीदवारों के नाम का ऐलान होते ही इस बारे में हम आपको अपडेट जरूर देंगे।

क्रम संंख्याभोपाल लोकसभा सीट के प्रत्याशी
पार्टीप्रत्याशी
1बीजेपीअभी तय नहीं
2कांग्रेसअभी तय नहीं
3बीएसपीअभी तय नहीं

2019 में साध्वी प्रज्ञा ने जमाई थी धाक

पिछले चुनावों की बात करें तो भोपाल से बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा ने कांग्रेस नेता दिग्विज सिंह को एक बड़े अंतर से हराया था। इस सीट पर बीजेपी की साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को करीब 8,66,482 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस नेता को महज 5,01,660 वोट ही हासिल हुए थे। तीसरे नंबर पर बीएसपी के माधव सिंह अहिरवार को 11,277 वोट हासिल हुए थे।

क्रम संख्याभोपाल लोकसभा सीट 2019 के नतीजें
पार्टीप्रत्याशीवोटनतीजा
1बीजेपीसाध्वी प्रज्ञा ठाकुर8,66,482जीत
2कांग्रेसदिग्विजय सिंह5,01,660हार
3बीएसपीमाधे सिंह अहिरवार11,277हार

2014 का चुनाव परिणाम

2014 के चुनावों की बात करें तो बीजेपी ने मोदी लहर में यह सीट भी अपने नाम की थी। इस सीट पर बीजेपी ने अलोक संजर को उतारा था, जिन्हें करीब 7,14,178 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस नेता पीसी शर्मा को 3,43,482 वोट ही मिले थे।

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क्रम संख्याभोपाल लोकसभा सीट 2014 सीट परिणाम
पार्टीप्रत्याशीवोटनतीजा
1बीजेपीआलोक संजर7,14,178जीत
2कांग्रेसपीसी शर्मी3,43,482हार
3आपरचना ढींगरा21,298हार

2009 का चुनाव परिणाम

इसके अलावा साल 2009 में भी इस सीट पर बीजेपी ही जीती थी। 2009 मे इस सीट से कैलाश चंद्र जोशी जीते थे, जिन्हें 3,35,678 वोट मिले थे और कांग्रेस नेता सुरेंद्र सिंह ठाकुर क 2,70,521 वोट ही हासिल हुए थे।

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क्रम संख्याभोपाल लोकसभा सीट 2009 चुनाव नतीजे
पार्टीप्रत्याशीवोटनतीजा
1बीजेपीकैलाश चंद्र जोशी3,35,678जीत
2कांग्रेससुरेंद्र सिंह ठाकुर2,70,521हार
3हारअशोक नारायण सिंह18,649हार

1989 से बीजेपी का गढ़ है भोपाल

बता दें कि 1984 के बाद से इस सीट पर कांग्रेस कभी भी लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाई है। इस सीट से जीतने वाले कांग्रेस के आखिरी नेता केएन प्रधान थे। इसके बाद से यह सीट 1989 में बीजेपी के पास चली गई थी। लगातार 6 बार से यह सीट बीजेपी के पास ही है। इस सीट से बीजेपी नेता सुशील चंद्र वर्मा ने 1989 में जीत हासिल की थी। इसके बाद 1991, 1996, 1998 में भी बीजेपी ही जीती थी। बीजेपी की दिग्गज नेता उमा भारती ने इश सीट परर कांग्रेस के कद्दावर नेता सुरेश पचौरी को पटखनी दी थी। इसके अलावा पूर्व सीएम कैलाश जोशी 2004 और 2009 में यहां से बीजेपी के सांसद बन चुके हैं।

क्या है यहां का जातीय समीकरण

जातीय समीकरण की बात करें तो भोपाल सीट की जनसंख्या 26,79,574 है। यहां की 23.71 फीसदी आबादी ग्रमीण क्षेत्र में रहती है, जबकि 76.29 फीसदी शहरी इलाके में रहती है. भोपाल की 15.38 फीसदी जनसंख्या अनुसूचित जाति की है और 2.79 फीसदी अनुसूचित जनजाति की है। इस सीट पर 20 से 25 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं. वहीं, अनुसूचित जाति के वोटर्स यहां 14.83 प्रतिशत हैं और अनुसूचित जनजाति के वोटर्स 2.56 प्रतिशत है। मुस्लिम इस सीट पर नतीजों में अहम भूमिका निभा सकते हैं, हालांकि पिछले चुनाव में ध्रुवीकरण से बीजेपी का बड़ा फायदा भी हुआ था।

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