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Arunachal Pradesh Assembly Election Results 2024: अरुणाचल प्रदेश में कैसे मिली BJP को बंपर जीत? समझिए किन फैक्टर्स का मिला फायदा

Arunachal Pradesh Assembly Elections 2024: अरुणाचल प्रदेश में बीजेपी की जीत के क्या मायने हैं। पढ़ें आदित्य तिवारी की रिपोर्ट
Written by: न्यूज डेस्क
नई दिल्ली | June 02, 2024 21:19 IST
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Arunachal Pradesh Assembly Elections 2024: अरुणाचल प्रदेश में घोषित हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे (एक्सप्रेस/फोटो)
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Arunachal Pradesh Assembly Election Results 2024: अरुणाचल प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि मौजूदा सरकार पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से बहुमत हासिल करके सत्ता में आई है। इसका महत्व इसलिए ज्यादा है क्योंकि वोटर्स बीजेपी का मूल्यांकन न केवल उसके विचारधारा के अनुसार कर रहे थे, बल्कि पार्टी की सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों पर भी अपनी मुहर लगा रहे थे। 19 अप्रैल को अरुणाचल प्रदेश के लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दशक लंबे कार्यकाल और मुख्यमंत्री पेमा खांडू के नेतृत्व में आठ वर्षों के कार्यकाल का मूल्यांकन करते हुए मतदान किया था।

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एक दौर था जब प्रधानमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों के अरुणाचल प्रदेश के दौरे चर्चा का विषय बनते थे, बल्कि आज के वक्त में यह दौरे काफी आम हो गए हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने सभी पूर्ववर्तियों की तुलना में पूर्वोत्तर में सबसे ज़्यादा दौरे किए हैं। सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र अभी भी लोकप्रिय मीडिया की कहानियों से काफ़ी हद तक दूर दिखता है, लेकिन “डबल इंजन” बीजेपी सरकार के लिए प्राथमिकता बना हुआ है। यह केंद्र और राज्य में संबंधित नेताओं की स्थायी लोकप्रियता को दर्शाता है।

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डबल इंजन सरकार का फायदा

राजधानी इटानगर के डोनी पोलो हवाई अड्डे के उद्घाटन के साथ दिल्ली की राज्य से दूरी महज तीन घंटे की उड़ान भर रह गई। वहीं राज्य की राजधानी में एक हवाई अड्डा एक स्पष्ट बुनियादी ढांचे की जरूरत की तरह लगता है, यह उल्लेखनीय है कि भारत को देश के इस सुदूर हिस्से में एक हवाई अड्डा बनाने में 75 साल लग गए। ऐसी परियोजनाएं केवल बुनियादी ढाँचे के बारे में नहीं हैं, वे आकांक्षाओं और राष्ट्रीय एकीकरण का प्रतीक भी माना जाता हैं।

बीजेपी की अरुणाचल में जीत ऐसे नेतृत्व का प्रतीक है, जो लोगों के बीच स्थिरता और सद्भाव को बढ़ावा देता है। अरुणाचल प्रदेश
भारत की विविधता का एक सूक्ष्म जगत है, जिसमें 26 प्रमुख जनजातियां और 100 से ज़्यादा उप-जनजातियाँ हैं, जिनमें से प्रत्येक की संस्कृतियां, भाषाएं और प्रथाएं अद्वितीय मानी जाती हैं।

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पेमां खांडू के नेतृत्व को स्वीकृति

14 लाख की आबादी वाले इस राज्य में जनता ने एक बार फिर सत्ताधारी बीजेपी पर भरोसा जताया है। ऐसे जटिल प्रशासन के लिए एक समावेशी नेता की आवश्यकता होती है जो बिना किसी भेदभाव के काम करे, जिसमें बीजेपी के पेमा खांडू ने अपने आप को साबित करने में सफलता पाई है।

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अंतिम छोर तक पहुंची सुविधाएं

इस जीत में एक अहम बिंदु यह भी है कि यह एक डिसीजन मेकिंग लीडरशिप को सहमति देती है। भारत सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को लागू करने में अंतिम छोर तक वितरण सुनिश्चित करना भी अहम रहा है। राज्य सरकारें यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं कि लाभ इच्छित प्राप्तकर्ताओं तक पहुँचें। अरुणाचल प्रदेश सरकार इस संबंध में सक्रिय रही।

इसका एक उदाहरण जल जीवन मिशन है, जहाँ अरुणाचल 100 प्रतिशत संतृप्ति हासिल करने वाला पहला राज्य बन गया। 15 अगस्त, 2019 को अरुणाचल प्रदेश में केवल 22,796 घरों में नल के पानी के कनेक्शन थे, यह संख्या बढ़कर 2,28,546 हो गई। राज्य के कठिन भूभाग और आबादी को देखते हुए यह उपलब्धि अभूतपूर्व है।

विकास की तेज रफ्तार ने जनता का बदला मूड

न्यूनतम विकास के पहले के सोच से इतर, अरुणाचल ने एक तेज गति वाले सक्रिय दृष्टिकोण को देखा है। राज्य ने 3 लाख से अधिक घरों को बिजली दी है। पीएम आवास योजना के तहत 35,000 से अधिक घरों का निर्माण किया है। सबसे गरीब लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करने वाले 2,900 से अधिक स्वयं सहायता समूहों को मजबूत किया है। राज्य में पहला मेडिकल कॉलेज खुला है। यहां गांवों और सुरक्षाकर्मियों को नेटवर्क कवरेज प्रदान करने के लिए 4 जी मोबाइल टावर लगाए हैं, और कुल सड़क बुनियादी ढांचे में 64 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की है।

ये सारे विकास कार्य आखिरी एक दशक से भी कम समय में हुए हैं। यह कहना कि पूर्वोत्तर के राज्य के लोग केवल केंद्र की सत्ताधारी को ही वोट देते हैं, एक सतही विश्लेषण ही होग। इसे वोटर्स की सूझबूझ का भी अपमान ही माना जाना चाहिए, बल्कि इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि आखिर ऐसा क्या रहा , जिसने मतदाताओं को फिर से बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए सहज किया।

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