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अनिल बलूनी की उम्मीदवारी ने गढ़वाल में चुनाव को एकतरफा किया

पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में मुख्य मुकाबला पूर्व राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक गणेश गोदियाल के बीच है।
Written by: सुनील दत्त पांडेय | Edited By: Bishwa Nath Jha
नई दिल्ली | Updated: April 19, 2024 05:28 IST
अनिल बलूनी की उम्मीदवारी ने गढ़वाल में चुनाव को एकतरफा किया
अनिल बलूनी। फोटो -(इंडियन एक्सप्रेस)।
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उत्तराखंड में गढ़वाल संसदीय सीट चर्चा के केंद्र में है। यहां से भाजपा के टिकट पर अनिल बलूनी मैदान में हैं, जिन्हें अपनी राष्ट्रीय छवि का फायदा होता दिख रहा है। बलूनी की उम्मीदवारी से गढ़वाल में चुनाव एकतरफा हो गया है। कांग्रेस में बिखराव दिख रहा है। जबकि, भाजपा ने गांव-गांव तक अपने संगठन का ढांचा खड़ा कर लिया है।

भाजपा ने पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में खूब ताकत झोंकी है। गढ़वाल के समीकरण भाजपा के लिए कितने अहम हैं, यह इसी बात से समझा जा सकता है कि यहां के उम्मीदवार के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी तक जनसभाएं कर चुके हैं। प्रदेश भाजपा के कई नेता भी पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में सक्रिय हैं।

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पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में मुख्य मुकाबला पूर्व राज्यसभा सदस्य और भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक गणेश गोदियाल के बीच है। इस लोकसभा सीट पर 13 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। वैसे 28 वर्षों तक पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का दबदबा रहा। 1990 में अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन शुरू होने के बाद उत्तराखंड भी राम लहर से अछूता नहीं रहा।

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1991 के लोकसभा चुनाव में यहां से भाजपा जीती और तब से यहां कांग्रेस में बिखराव जारी है। बलूनी को अपनी राष्ट्रीय छवि का फायदा मिल रहा है। पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र एक जमाने में देश के दिग्गज नेता हेमवती नंदन बहुगुणा और भुवन चंद्र खंडूड़ी की जन्म और कर्मस्थली रही है। दोनों नेताओं के बाद अनिल बलूनी तीसरी ऐसे राष्ट्रीय राजनेता है, जो यहां से मैदान में हैं। वे पिछले कई वर्षों से पौड़ी गढ़वाल में बेहद सक्रिय हैं। उन्होंने पिछले दिनों अपनी सांसद निधि से 15 करोड़ रुपए जारी कर यहां पर तारामंडल खोले जाने की पहल की।

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गढ़वाल के लोक पर्व ईगास को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में अनिल बलूनी का खास योगदान रहा है। ईगास को बूढ़ी दिवाली भी कहा जाता है। चुनाव प्रचार के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा भी कि ईगास लोक पर्व को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में अनिल बलूनी का बड़ा योगदान है। पौड़ी गढ़वाल के रहने वाले संदीप रावत कहते हैं कि यह संसदीय क्षेत्र कई साल के बाद फिर राष्ट्रीय राजनीति के फलक पर चर्चा बाकी पेज 8 पर में आ गया है।

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अमित शाह ने अपनी जनसभा में विकास का मुद्दा उठाया और भरोसा जताया कि अनिल बलूनी यहां अच्छा काम करेंगे। बलूनी कोरोना काल में यहां काफी सक्रिय रहे। अनिल बलूनी का कहना है कि उनका मुख्य उद्देश्य उत्तराखंड को एक विकसित प्रदेश के रूप में देखना है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस सपने को साकार करना है कि अगली सदी उत्तराखंड की है। इस लिहाज से पौड़ी गढ़वाल विकसित भारत के सपने को साकार करने में मुख्य भूमिका निभाएगा।

बलूनी को पौड़ी गढ़वाल से भाजपा से लोकसभा का टिकट मिलने के बाद कांग्रेस के गई दिग्गज नेता भाजपा में शामिल हुए हैं। बद्रीनाथ विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के मौजूदा विधायक राजेंद्र भंडारी ने भाजपा में शामिल होने के लिए विधायकी से भी अपना इस्तीफा दे दिया। आजादी के बाद से अब तक पौड़ी गढ़वाल संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस नौ बार और भाजपा छह बार लोकसभा चुनाव जीती है। 1991 के बाद इस संसदीय क्षेत्र में कांग्रेस का राजनीतिक ग्राफ लगातार गिरता रहा है।

यह उत्तराखंड की अकेली ऐसी सीट है ,जो गढ़वाल और कुमाऊं मंडल में फैला हुआ है। इसके तहत 13 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें 12 - बद्रीनाथ, थराली ,कर्णप्रयाग, केदारनाथ, रूद्रप्रयाग, देवप्रयाग, नरेंद्रनगर, यमकेश्वर, पौड़ी , श्रीनगर, चैबट्टाखाल,लैन्सडौन, कोटद्वार गढ़वाल मंडल में और एक विधानसभा क्षेत्र रामनगर कुमाऊं मंडल में है। यह संसदीय क्षेत्र पांच जिलों पौड़ी, रुद्रप्रयाग, चमोली, टिहरी और नैनीताल में फैला हुआ है।

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