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बुलडोजर एक्शन, 1 करोड़ जुर्माना, जेल... पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के खिलाफ योगी सरकार ला रही नया कानून

पेपर कोडिंग को लेकर नई तैयारी की गई है। सभी क्वेश्चंस पेपर में गोपनीय कोड होगा। सभी पेजों पर गोपनीय सुरक्षा चिन्ह होंगे। यानी यूनिक बारकोड, क्यूआर कोड, यूनिक सीरियल नंबर रहेंगे।
Written by: न्यूज डेस्क | Edited By: संजय दुबे
नई दिल्ली | Updated: June 21, 2024 12:35 IST
बुलडोजर एक्शन  1 करोड़ जुर्माना  जेल    पेपर लीक और सॉल्वर गैंग के खिलाफ योगी सरकार ला रही नया कानून
यूपी सरकार नकल माफिया पर हुई सख्त।
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मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी में गड़बड़ियों को लेकर चल रहे बवाल के बीच यूपी की योगी सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राज्य सरकार ने ऐलान किया है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी को रोकने के लिए एक सख्त कानून बनाया जा रहा है। इस कानून के दायरे में पेपर लीक कराने वाले और साल्वर गैग के लोग होंगे। इसमें उनकी गतिविधियों को भी शामिल किया गया है। कानून के तहत ऐसे लोगों के खिलाफ एक करोड़ या इससे ज्यादा का भारी जुर्माना लगाने और जेल भेजने की कार्रवाई तो होगी ही, उनके घरों में बुलडोजर भी चलेगा। कानून में इसको लेकर प्रावधान बनाए जा रहे हैं।

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यूनिक बारकोड, क्यूआर कोड, यूनिक सीरियल नंबर से होगी कोडिंग

यूपी सरकार परीक्षाओं में गड़बड़ी और धांधली को रोकने के लिए एक नीति की भी घोषणा की है। सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है कि हर पाली में 2 या उससे अधिक पेपर सेट जरूर रहे। सभी की प्रिंटिंग कराने की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसी को सौंपी जाएगी। पेपर कोडिंग को लेकर नई तैयारी की गई है। सभी क्वेश्चंस पेपर में गोपनीय कोड होगा। सभी पेजों पर गोपनीय सुरक्षा चिन्ह होंगे। यानी यूनिक बारकोड, क्यूआर कोड, यूनिक सीरियल नंबर रहेंगे। इनको लाने-ले जाने वाले बॉक्स टेंपर प्रूफ मल्टी लेयर पैकेजिंग होगी।

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प्रश्न पत्रों को तैयार करने के लिए काफी समय दिया जाएगा। यानी पेपरों में किसी भी तरह की खामी रोकने के लिए जरूरी व्यवस्था की जाएगी। जिस एजेंसी से पेपर प्रिंट कराया जाएगा, परीक्षा नियंत्रक वहां नियमित रूप से निरीक्षण करेंगे। वहां पर मोबाइल या स्मार्ट फोन ले जाने, तस्वीरें लेने, कैमरे से फोटोग्राफी करने आदि की छूट नहीं मिलेगी। इस काम में लगे लोगों को बाहरी लोगों से मिलने-जुलने की भी मनाही होगी।

अब परीक्षाओं के केंद्रों के चयन के मानक भी कड़े किए जा रहे हैं। वही स्कूल-कॉलेजों और संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा, जिनके रिकॉर्ड अच्छे होंगे। केवल राजकीय माध्यमिक, डिग्री कॉलेज, विश्वविद्यालय, पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेज, मेडिकल कॉलेज अथवा साफ-सुथरे ट्रैक रिकॉर्ड वाले नामी और सुविधाओं वाले वित्त पोषित शैक्षिक संस्थान ही केंद्र बनाए जाएंगे। सभी केंद्रों के बाहर सीसीटीवी की व्यवस्था अनिवार्य रूप से होगी।

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रिक्रूटिंग एजेंसियों के लिए भी कई कड़े मानक तय किये गये हैं। चार अलग-अलग एजेंसियों को रिक्रूटिंग की परीक्षा कराने की जिम्मेदारी दी जाएगी। इसके साथ ही सरकार यह भी तय करने जा रही है कि परीक्षाएं होम रीजन से बाहर हों। यानी परीक्षार्थी को अपनी परीक्षा के लिए अपने गृह मंडल से बाहर जाना होगा। दिव्यांगों और महिलाओं को इसमें रियायत दी जाएगी। पीसीएस समेत सभी परीक्षाएं एक चरण में ही होंगी, लेकिन अगर छात्रों की संख्या 4 लाख से ज्यादा हैं तो उन्हें दो चरणों में कराया जा सकता है।

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